Bijnor News: प्रबल अग्रवाल की हत्या में कोर्ट ने आशीष अग्रवाल, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, अनुज गुप्ता, राहुल गुप्ता, निखिल अग्रवाल, संजय गुप्ता को दोषी करार दिया। बहन प्राची ने बताया कि 14 साल तक लड़ाई लड़ी, इस दौरान रुपयों का लालच भी दिया गया।
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जेल जाते हत्यारे, बिलखती बहन प्राची और प्रबल की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
साल 2012 में हुए प्रबल हत्याकांड में कोर्ट ने सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। 14 साल में 17 लोगों की गवाही हुई और प्रबल की बहन की गवाही अहम बनी। अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. शहजजाद अली ने सातों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट से बाहर आते ही प्रबल की बहन ने कहा कि यह संघर्ष और न्याय की जीत है।
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जेल जाते सातों हत्यारे।
- फोटो : अमर उजाला
कोतवाली शहर के मोहल्ला जाटान निवासी प्रबल अग्रवाल पुत्र आलोक अग्रवाल 19 दिसंबर 2012 की रात शहनाई बैंक्वेट हॉल में अग्रसेन जयंती कार्यक्रम में शामिल हुआ था। इस दौरान युवती से बात करने को लेकर वहां मौजूद कई लोगों ने उसे पीटा था। हालत बिगड़ी तो उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद हत्या के इस पूरे मामले को दबाने के लिए प्रबल के शव को गंगा में फेंक दिया गया था। करीब एक माह बाद उसका शव पुलिस ने हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा से बरामद किया था।
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हत्यारों को जेल ले जाती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर कोर्ट में यह मामला तभी से चल रहा था। इस मामले में पुलिस ने संजय गुप्ता एडवोकेट, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता, आशीष उर्फ आशु के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. शहजजाद अली ने इन सभी सात अभियुक्तों को प्रबल की हत्या में दोषी करार दिया है। कोर्ट में मौजूद सभी अभियुक्तों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल पंवार ने बताया कि इस मामले में सजा पर फैसला अब 31 जुलाई को आएगा।
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जेल जाते हत्यारे।
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कई दिन चला था धरन-प्रदर्शन, छह माह बाद हो गई थी पिता की मौत
प्रबल हत्याकांड में शहर में खूब बवाल रहा था। कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन हुआ था और शहर भर में प्रबल के परिवार और नागरिकों ने कैंडल मार्च निकाले। करीब एक माह बाद शव मिला तो पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी थी। प्रबल की हत्या से उसके पिता आलोक अग्रवाल सदमे में थे और घटना के छह माह बाद ही उनकी मौत हो गई थी।
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बिलख पड़ी बहन प्राची।
- फोटो : अमर उजाला
प्रबल की बहन बोली, लालच दिया, पर संघर्ष जारी रहा
प्रबल की बहन प्राची बुधवार को कोर्ट में मौजूद रही। अभियुक्त कोर्ट रूम में उससे माफी मांगते रहे, लेकिन प्राची ने साफ कहा कि वह उन्हें सजा दिलाना चाहती है। कोर्ट से बाहर आकर प्राची ने कहा कि 14 साल यह लड़ाई चली। शुरू में कोई वकील उनका केस लेने तक को तैयार नहीं था। इसके बाद अधिवक्ता अहमद जकावत ने उनके केस में पैरवी की। इस दौरान उसे रिश्तदारों और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से खूब लालच दिया गया, लेकिन वह डटी रही। आज यह न्याय की जीत है।
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प्रबल अग्रवाल की बहन प्राची।
- फोटो : अमर उजाला
मैं कैसे माफ कर दूं, मेरा इकलौता भाई था...
मैं कैसे माफ कर दुं, मेरा इकलौता भाई था। यह कहते-कहते मृतक प्रबल की बहन प्राची अदालत में फफक कर रो पड़ी। भाई की हत्या के मामले में सजा पर सुनवाई के दौरान माहौल भावुक हो गया। दोषी अनुज गुप्ता प्राची के सामने हाथ जोड़कर माफी की गुहार लगाता रहा। लेकिन बहन का दर्द छलक पड़ा और उसने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने इकलौते भाई के हत्यारों को कभी माफ नहीं कर सकती।
बुधवार दोपहर करीब एक बजे अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट नंबर छह में फैसला सुनाने से पहले जज ने कहा कि क्या मृतक की बहन प्राची आप लोगों को माफ कर पाएगी। इसके बाद सभी दोषियों ने हाथ जोड़कर प्राची से माफी मांगी। लेकिन भाई की मौत से टूट चुकी बहन प्राची ने माफ नहीं किया।
कोर्ट में जज के सामने ही दोषी अनुज गुप्ता ने प्राची से कहा, मुझे माफ कर दो, हमसे गलती हो गई। तुम जहां कहोगी, वहां उस चौराहे पर माफी मांगूंगा। यह सुनने के बाद प्राची ने कहा कि मेरे भाई ने भी तुम्हारे आगे हाथ जोड़े होंगे, लेकिन तुमने उसे नहीं छोड़ा। उसका शव भी नहीं दिया। इसके बाद दोषी ने कहा कि उसके दो बच्चे हैं, माफ कर दो। इतना सुनने के बाद प्राची भावुक होकर रोते हुए बोली, मेरा भी इकलौता भाई था। मारने के बाद फेंक आए थे, मेरे भाई को तुम गली में फेंक जाते। लेकिन तुम्हें लगा कि कुछ नहीं होगा। नोएडा से केस की पैरवी करने थोड़ी आएगी। पैसे नहीं हैं, लेकिन ईश्वर ने मेरी सुन ली। जो, इस कोर्ट में फैसला आया। मैं तुम्हें माफ नहीं करुंगी। इस दौरान पूरे कोर्ट रूम में सन्नाटा पसरा रहा।
प्रबल की अंतिम यात्रा में उमड़ी थी भीड़। फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
जीत गया संघर्ष, हार गया रसूख
कोर्ट रूम के अंदर सभी सात दोषियों आशीष अग्रवाल, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, अनुज गुप्ता, राहुल गुप्ता, निखिल अग्रवाल, संजय गुप्ता के चेहरे पर डर साफ नजर आया। सभी के चेहरे पर 31 जुलाई को सजा पर आने वाले फैसले का डर साफ नजर आ रहा था।
प्रबल की हत्या में जो सात अभियुक्त दोषी करार दिए गए हैं, वह सभी रसूखदार लोग हैं। इनमें संजय गुप्ता एडवोकेट रामलीला सेवा समिति में संरक्षक हैं। इससे पहले वह इसमें अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा विनय अग्रवाल और उनके बेटे अपूर्व अग्रवाल का परिवार भाजपा से जुड़ा रहा है। विनय अग्रवाल की पत्नी संगीता अग्रवाल वर्तमान में राज्य महिला आयोग की सदस्य हैं। इसके अलावा अनुज गुप्ता के भाई संजीव गुप्ता भी भाजपा संगठन में नगराध्यक्ष रह चुके हैं। अन्य अभियुक्तों का परिवार भी रसूखदार परिवारों में गिना जाता है।
प्रबल के परिवार की माली हालत उतनी अच्छी नहीं थी। पिता आलोक अग्रवाल किराना की दुकान करते थे। प्रबल परिवार का एकलौता बेटा था। बहन प्राची ने कहा कि आरोपी लगातार यही सोचते रहे कि पैसे से कमजोर परिवार किस तरह पैरवी करेगा। मैं खुद नोएडा से तारीखों पर आती थी। लेकिन अंत में लंबे संघर्ष से यह केस न्याय की दहलीज तक पहुंच गया।