फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कटान का कहर: मोहाना नदी में समाए घर, कैसे मनेगी दिवाली? महिलाएं बोलीं- हम बर्बाद हो गए, कोई सुनने वाला नहीं

Sat, 26 Oct 2024 01:01 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

Lakhimpur Kheri News: दिवाली से पहले लोग अपने घरों को सजाने-संवारने का काम कर रहे हैं। घर को रोशन करने के लिए तैयारियां करने में जुटे हैं। लेकिन, गांव जसनगर के लोग इस त्योहार पर पीड़ा में डूबे हुए हैं। बेबसी ऐसी कि लोगों ने अपने घर खुद ही तोड़ दिए। पढ़िए इन बेबस ग्रामीणों के दर्द का कहानी...  
विज्ञापन
1 of 6
गांव जसनगर निवासी जमुनादेवी - फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में सुख-समृद्धि के त्योहार दिवाली के मौके पर गांव जसनगर के लोगों के लिए मोहाना नदी अभिशाप बन गई। 49 घरों वाले इस छोटे से गांव के आठ ग्रामीणों के घर नदी में समा गए। जिन लोगों के घर कटने की कगार पर हैं, वे अपने ही हाथों से उन्हें तोड़ रहे हैं ताकि गृहस्थी का सामान और ईंटें तो बचा सकें। दिवाली के पर्व पर ये लोग सड़क के किनारे तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं। 
विज्ञापन

2 of 6
गांव के कई मकान नदी की जद में आए - फोटो : अमर उजाला
इनके घर नदी में समाए 
गांव जसनगर निवासी जगदीश, श्रीराम, हरीश श्यामलाल, नत्थू राम और धर्मेंद्र के पक्के मकान मोहाना नदी में समा गए हैं। अब यह लोग सड़क पर रहने को मजबूर हैं। तंबू के नीचे किसी तरह जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि पाई-पाई जोड़कर जो घर बनवाया था, वह अब छिन चुका है। वो भी त्योहार के मौके पर। अब तो सड़क पर ही दिवाली मनेगी। इन बाढ़ पीड़ितों के चेहरे पर आक्रोश साफ देखा जा सकता है। 
विज्ञापन

3 of 6
कटान पीड़ित - फोटो : अमर उजाला
नहीं मिली मदद 
प्रशासनिक मदद मिली या नहीं, इस सवाल पर गुस्से में कहते हैं कि जब कोई सुनने वाला ही नहीं है तो किससे कहें। अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। मदद तो दूर की बात है, कोई जिम्मेदार अफसर झांकने तक नहीं आया। बाढ़ पीड़ितों ने तय किया है कि अब वे लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अपनी पीड़ा कहेंगे।

4 of 6
कटान पीड़ित - फोटो : अमर उजाला
रोशनी के त्योहार पर इनके घर अंधेरा
जसनगर गांव निवासी छोटी पत्नी नत्थूलाल रोते हुए कहती हैं कि हम सब कंगाल हो गए हैं। मकान था, चार एकड़ जमीन थी... सब कुछ नदी में समा गया। दिवाली के मौके पर हम बर्बाद हो गए, कोई सुनने वाला नहीं है। इसी गांव की जमुना देवी पत्नी शिव भगवान बताती हैं जमीन से परिवार की गुजर बसर होती थी। दो बेटे, दो बेटियां हैं। चिंता खाए जा रही है कि अब खर्चा कैसे चलेगा। 
विज्ञापन

5 of 6
नदी किनारे खड़े ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
अपने हाथों से तोड़ा बसेरा
तारा देवी पत्नी जगदीश बताती हैं गांव में उनका पक्का मकान था। पूरा परिवार हंसी-खुशी रहता था, लेकिन मोहाना नदी ने सब छीन लिया। जिस घर को बड़ी उम्मीदों से बनाया था, उसे अपने ही हाथों तोड़ना पड़ा। अब जीवन किस तरह जिया जाए, समझ में नहीं आ रहा। सरकारी अफसर भी हाल पूछने नहीं आए। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
मोहाना नदी कर रही कटान - फोटो : अमर उजाला
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता संपूर्णानंद ने बताया कि गांव को बचाने के लिए प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर नदी में डाला जा रहा है। इसकी परियोजना बनाई जा रही है। पक्का काम किया जाएगा।  

खबर से रसंबंधित वीडियो 

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें