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Lakhimpur Kheri News: 'सुधर जाओ' की चिंगारी ने लगा दी इतनी बड़ी आग, केंद्रीय मंत्री ने कहा था- पलिया नहीं लखीमपुर खीरी तक छोड़ना पड़ जाएगा

Mon, 04 Oct 2021 11:27 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
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Lakhimpur Kheri Violence - फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर में बवाल की आग आठ दिन पहले संपूर्णानगर में किसान गोष्ठी से सुलगनी शुरू हुई थी। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र को 25 सितंबर को लखीमपुर जाते समय किसानों ने काले झंडे दिखाए थे। मिश्र इससे खफा हो गए। उन्होंने जनसभा में कहा कि अगर हम कार से उतर जाते तो उन्हें भागने का रास्ता नहीं मिलता। कृषि कानून के खिलाफ केवल 10-15 लोग शोर मचा रहे हैं। सुधर जाओ, वरना हम सुधार देंगे, दो मिनट लगेंगे। किसान एक सप्ताह से टिप्पणी का विरोध कर रहे हैं। आपको बता दें कि संपूर्णानगर में 25 सितंबर को किसान गोष्ठी आयोजित की गई थी। संपूर्णानगर क्षेत्र में प्रथम आगमन होने पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी को किसानों ने गदनियां चौराहे और महंगापुर गुरुद्वारा के पास काले झंडे दिखाए। उनके पोस्टर-बैनर भी फाड़ दिए। पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की तो नोकझोंक भी हुई। मगर इस विवाद को पुलिस ने बहुत गंभीरता से नहीं लिया और विरोध की आग भीतर ही भीतर सुलगती रही।
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गाड़ी में लगाई आग - फोटो : अमर उजाला
रविवार को जब वहां मंत्री के बेटे की कार से कुचलकर किसान की मौत हुई तो यह मामला गरमा गया और विवाद ने कुछ ही देर में बवाल का रूप ले लिया।
 
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घायलों को ले जाती एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
कहा था- पलिया नहीं लखीमपुर खीरी तक छोड़ना पड़ जाएगा
बताया जाता है कि संपूर्णानगर में किसान गोष्ठी को संबोधित करने के दौरान केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी ने कहा कि कुछ लोग किसानों को भड़का रहे हैं। किसानों के हित में लाए गए तीन कृषि कानूनों को काला कानून बताया जा रहा है, लेकिन तीन कृषि कानूनों में काला क्या है यह कोई भी नहीं बता पा रहा है। 
 

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किसानों ने तोड़ा होर्डिंग - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने एक सभा में खुद के विरोध का जिक्र करते हुए मंच से कहा था, ‘विरोध करने वालों आकर सामना करो, हम आपको सुधार देंगे। मैं केवल मंत्री या सांसद नहीं हूं, जो लोग मेरे विषय में जानते हैं, उनको पता होगा कि मैं किसी चुनौती से भागता नहीं। जिस दिन मैंने उस चुनौती को स्वीकार कर लिया,  उस दिन पलिया नहीं लखीमपुर खीरी भी छोड़ना पड़ जाएगा। यह याद रखना।’
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किसानों ने किया हेलीपैड पर कब्जा - फोटो : अमर उजाला
लगातार वायरल हो रहा वीडियो
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बयान का वीडियो 25 सितंबर से ही सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। चर्चा है कि उनके इस बयान के बाद ही किसानों में उनको लेकर गुस्सा था, जो लगातार बढ़ता ही जा रहा था। रविवार को हुए बवाल के बाद यह वीडियो एक बार फिर चर्चा में आ गया और तेजी से वायरल होने लगा। लोगों का कहना है कि मंत्री का यह बयान ही पूरे बवाल की जड़ बन गया।

 
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घटनास्थल पर पुलिस - फोटो : अमर उजाला
मुकदमा दर्ज होने के बाद और बिगड़ा मामला
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री को गदनिया और महंगापुर में किसानों ने काले झंडे दिखाए थे। इस घटना के अगले ही दिन 26 सितंबर को महंगापुर में एक मुकदमा अमनीत सिंह और उसके दो साथियों के खिलाफ दर्ज कराया गया। दूसरा मुकदमा गदनियां में महेंद्र सिंह समेत 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराया गया था। आरोप था कि अमनीत ने काले झंडे दिखाने का वीडियो बनाकर वायरल किया था। किसी ने कोविड 19 के नियमों का पालन भी नहीं किया था।
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किसानों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
किसान समूह और भाजपाई भी आए सामने
27 सितंबर को किसानों पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया। अगले ही दिन किसान समूहों ने मंत्री पर उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाकर निघासन में विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि मंत्री के दबाव में पुलिस ने उनके घरों में दबिश देकर महिलाओं से अभद्रता की। वहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वालों पर मुकदमा दर्ज न कराने का आरोप लगाकर थाने का घेराव कर लिया। उन्होंने सीओ कार्यालय का भी घेराव कर हंगामा किया।

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केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र - फोटो : अमर उजाला
किसानों के बीच छिपे हैं अराजक तत्व
प्रदर्शन के दौरान किसानों की मौत पर गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी ने कहा कि पूरी घटना के लिए अराजक तत्व जिम्मेदार हैं। उन्होंने अपने बयान सुधर जाओ... के बारे में कहा कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। वह एक रजिस्टर्ड किसान हैं। किसानों के खिलाफ नहीं हो सकते हैं।
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मैं गाड़ी में नहीं था-आशीष मिश्र

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केंद्रीय मंत्री का बेटा - फोटो : अमर उजाला
तिकुनिया में बवाल के बाद गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र मोनू ने कहा कि वह उस गाड़ी में नहीं थे, जिसके नीचे आकर किसानों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि उनकी तीन गाड़ियां थीं, जिसमें उनके कार्यकर्ता बैठे थे। फूलमाला लेकर स्वागत के लिए जा रहे थे।
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