कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पांचवीं मंजिल से गिरकर डॉ. दीक्षा की मौत के मामले में घर वालों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। पिता प्रदीप तिवारी ने कहा है कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई का फैसला करेंगे। इसके साथ ही शुक्रवार दोपहर बरेली में संजयनगर स्थित श्मशान भूमि पर डॉ. दीक्षा का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में शहर के गण्यमान्य लोग व परिजन मौजूद रहे।
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Diksha Tiwari Death Case
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले कानपुर से पोस्टमार्टम के बाद डॉ. दीक्षा के पार्थिव शरीर को लेकर उनके परिवारीजन बृहस्पतिवार देर रात बरेली पहुंचे थे। यहां आवास पर अंतिम दर्शन व श्रद्धांजलि के बाद सुबह 10 बजे अंतिम संस्कार किया गया। डॉ. दीक्षा प्रिंटिंग प्रेस कारोबारी प्रदीप तिवारी की बेटी थीं। इनका परिवार सुरेश शर्मा नगर के फेस टू में चंद्रशेखर पार्क के पास बने आवास में रहता है।
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दीक्षा ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमबीबीएस किया था। बुधवार को वह अपने दो साथी डॉक्टरों के साथ जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के परीक्षा हॉल की पांचवीं मंजिल पर गई थीं। वहां संदिग्ध परिस्थितियों में डक्ट में नीचे आ गिरीं और उनकी मौत हो गई। परिवार इसे हत्या और मेडिकल कॉलेज प्रशासन हादसा बता रहा है।
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पिता को साजिश की आशंका, बोले- बेहद खुश थी दीक्षा
प्रदीप तिवारी ने बताया कि एक महीने पहले दीक्षा घर आई थीं। कानपुर में एमबीबीएस पूरा होने के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में दो साल के अनुबंध पर उन्हें नौकरी मिली थी। इसी महीने 25 जून को उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन करना था। दस जून को वह मेरठ जाकर बेटी की ज्वाइनिंग संबंधी कागजी औपचारिकता पूरी कराकर आए थे। वह काफी खुश थी। इस लिहाज से आत्महत्या जैसी कोई बात तो संभव ही नहीं है।
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हत्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ भी हो सकता है। साथी डॉक्टरों को सब जानकारी होगी। साजिश भी हो सकती है। इसीलिए वह पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखना चाहते हैं, इसके बाद आगे कार्रवाई के बारे में विचार करेंगे।
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बदहाल व्यवस्था पर भी बिफरे प्रदीप
दीक्षा के पिता प्रदीप तिवारी ने कहा कि उन्हें मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वो डक्ट दिखाया जिसका स्लैब टूटने से दीक्षा की नीचे गिरकर मौत हो गई। उन्होंने बताया कि स्लैब काफी कमजोर था। दीक्षा साथी डॉक्टरों के साथ वहां गई थीं। दीक्षा के साथी ने बताया कि पहले वह उस जगह बैठा था।
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बाद में जब वह हट गया तो साथियों से बात करते हुए दीक्षा वहां बैठ गईं। तब वह टूट गया और दीक्षा पांचवीं मंजिल से नीचे आ गिरीं। प्रदीप तिवारी का कहना है कि हो सकता है कि निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब रहने की वजह से उनकी बेटी की जान चली गई हो।
अंतिम विदाई
डॉ.दीक्षा को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। क्षेत्रीय लोगों के अलावा व्यवसायी भी मौजूद थे। सभी लोगों ने परिवार को सांत्वना भी दी। इस दौरान पिता प्रदीप फफक रहे थे कि नाजों से पाली होनहार बेटी उन्हें छोड़कर हमेशा के लिए चली गई। उनकी बहन व अन्य रिश्तेदारों ने भी उन्हें दिलासा दिया। भाई इंजीनियर मयंक तिवारी समेत परिवार के अन्य लोग भी शोकाकुल थे।