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हिरासत में आसाराम की मौत: अस्पताल के रिकॉर्ड ने किया पुलिस की कहानी का पोस्टमार्टम, दो पुलिसवालों पर मुकदमा

Sun, 14 Apr 2024 04:00 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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हिरासत में मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी के मितौली क्षेत्र के पकरिया जलालपुर में बच्ची की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिए गए गांव के ही आसाराम (48) की मौत हो गई। परिजनों ने थर्ड डिग्री से मौत का आरोप लगाते हुए शनिवार को लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर कस्ता चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। छह घंटे तक हंगामा हुआ। इस मामले में पिपरझला पिकेट प्रभारी समेत दो पुलिसकर्मियों पर हत्या और अवैध रूप से हिरासत में रखने का मुकदमा दर्ज होने के बाद लोग शांत हुए। 

आसाराम को छह घंटे तक पुलिस हिरासत में रखा गया था। इस दौरान क्या हुआ, यह तो पुलिस ही जाने लेकिन आसाराम की मौत के बाद गढ़ी गई पुलिस की कहानी का पोस्टमार्टम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और जिला अस्पताल के रिकॉर्ड ने कर दिया।  

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मितौली और जिला अस्पताल की इमरजेंसी के रजिस्टर में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर की ओर से दर्ज विवरण में स्पष्ट लिखा गया है कि अस्पताल में आसाराम को बेहोशी की अवस्था में लाया गया। चर्चा है कि मितौली थाने में ही आसाराम बेहोश हो गया था। पुलिस टीम रात 9.50 बजे सीएचसी मितौली पहुंची। यहां से रेफर होने के बाद देर रात करीब 11 बजे पुलिस टीम आसाराम को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। यहां इमरजेंसी के रजिस्टर में आसाराम को मृत अवस्था में लाने का जिक्र है।
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मौके पर तैनात रही पुलिस फोर्स - फोटो : अमर उजाला
दोनों पहलुओं पर गौर करें तो पुलिस ने कई अहम बातें छिपाईं। शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे से लेकर रात करीब नौ बजे तक यानी करीब साढे़ सात घंटे आसाराम पुलिस की अवैध रूप से हिरासत में था। इस दौरान उसके साथ क्या हुआ, यह पुलिस ही जानती है लेकिन उसके शरीर पर चोटों के निशान पुलिस की बर्बरता की गवाही दे रहे हैं। 
 
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लोगों का समझाने का प्रयास करते पुलिस अफसर - फोटो : अमर उजाला
परिजनों का आरोप है कि थाने में उसके साथ मारपीट की गई, करंट भी लगाया गया। हालांकि पुलिस के हवाले से मिली पोस्टर्माटम रिपोर्ट की जानकारी के अनुसार, आसाराम के शरीर पर चोटों के निशान नहीं थे। एसपी गणेश प्रसाद साहा ने खुद इसकी पुष्टि की। वहीं मौत की वजह स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित किया गया। 
 

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कस्ता चौराहे पर जाम लगाकर किया हंगामा - फोटो : अमर उजाला
परिजनों का आरोप, मौत होने के बाद सूचना दी
आसाराम के बेटे रोहित व केपी सिंह ने आरोप लगाया कि मितौली थाना परिसर में पुलिस ने आसाराम को बेरहमी से पीटा। करंट भी लगाया, जिससे उनकी मौत हो गई। जब मौत हो गई, तब हम लोगों को सूचना दी। रात में ही पुलिस ने शव परिजनों को बीमारी से मौत होने की बात कहते हुए सौंप दिया था। सुबह गांव में तनाव फैल गया।
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मृतक आसाराम के परिवार की महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
मजदूरी कर परिवार चलाते थे आसाराम 
आसाराम के पास मात्र ढाई बीघे जमीन बताई जा रही है। वह अपनी पत्नी माया देवी व बेटों का भरण पोषण मेहनत मजदूरी कर करता था। आसाराम के तीन बेटों में रोहित शादीशुदा हैं, जबकि केपी व अंकित अभी अविवाहित हैं। 
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स्थिति बिगड़ने पर बुलाई गई थी फोर्स - फोटो : अमर उजाला
अपने ही सिपाहियों का नाम नहीं जानती थाना पुलिस
पुलिस ने पिकेट प्रभारी और हेड कांस्टेबल के खिलाफ हत्या और अवैध रूप में कैद में रखने की धाराओं में रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन अपने ही थाने की पिकेट के प्रभारी के नाम की जगह अज्ञात लिख दिया। इतना ही नहीं, आसाराम को थाने लाने वाले और उससे पूछताछ करने वालों का जिक्र भी गोलमोल तरीके से किया।   
 
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हिरासत में आसाराम की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
पता चला है कि मितौली थाने के दो सिपाहियों ने आसाराम से पूछताछ की थी। इसमें पूछताछ करने के दौरान बेरहमी से पीटने के लिए चर्चित सिपाही भी शामिल था। मृतक की पीठ पर गहरे निशानों से स्पष्ट है कि उस पर कई डंडे तोड़े गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस ने तहरीर लिखवाने में भी खेल किया। जिस पिकेट प्रभारी को सब जानते हैं, उसे पुलिस ने अज्ञात में लिखवा दिया। मारपीट करने वाले सिपाही का नाम नामजद नहीं कराया है, जबकि एफआईआर में जस्सी का जिक्र है।
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घटना के बाद सड़क पर जुटी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
पिकेट प्रभारी के साथ दो अन्य अज्ञात सिपाहियों के आसाराम को ले जाने की बात का भी जिक्र एफआईआर में किया गया है। परिजन हंगामा करने के दौरान पुलिस पर एक लाख रुपये लेने का आरोप लगा रहे थे लेकिन तहरीर में उसका जिक्र नहीं किया। मितौली थाने के इंस्पेक्टर राजू राव ने बताया है कि पिकेट प्रभारी का नाम लालचंद है, उसके साथ हेड कांस्टेबल पर गंभीर आरोप लगाया है। प्रकरण की जांच वह स्वयं करेंगे।  
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