सिपाही शिवहरि अवस्थी और टेंपो ड्राइवर दयाराम।
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जेल से होती थीं व्हाट्सएप कॉल, बैरक में बनाए जाते थे प्लान
एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि अशरफ और उसके गुर्गों की सप्ताह में कम से कम एक बड़ी मीटिंग जेल के अंदर जरूर होती थी। इसमें पुराने मुकदमों में लाभ लेने, गवाहों को धमकाकर खामोश रखने, विरोध की स्थिति में उनकी हत्या करने, पुलिस व जेल अधिकारियों को प्रलोभन देने, नहीं मानने पर उनकी और अभियोजन अधिकारियों की हत्या का प्लान तक बनाया जाता था। हालांकि बरेली जिला जेल में ही पूरी सेटिंग होने की वजह से बरेली में ऐसी नौबत नहीं आई। जेल में टेंपो चालक नन्हे के मोबाइल से भी अशरफ ने लोगों से बात की थी जिसकी पुष्टि हुई है। जेल से अधिकांश व्हाट्सएप कॉल ही हुई हैं पर कई बार शातिर इसका डाटा भी उड़ा देते थे। अब सर्विलांस सेल इसका रिकॉर्ड निकलवाने में जुटी है।