बागपत के रमाला में तुषार चौहान का पैतृक आवास
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आठवीं के बाद छोड़ दी पढ़ाई, दस साल से नहीं आया गांव
ग्रामीणों के अनुसार तुषार चौहान ने आठवीं कक्षा तक मेरठ में पढ़ाई की थी, लेकिन इसके बाद उसने स्कूल जाना छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि पिछले करीब दस वर्षों से वह अपने पैतृक गांव रमाला भी नहीं आया था। उसका परिवार मेरठ के गंगानगर क्षेत्र में रहकर अपना कामकाज करता है।
तुषार के दादा गोवर्धन सिंह स्वतंत्रता सेनानी रहे थे, जबकि उसके पिता शैलेंद्र मेरठ में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। गांव में उसके चाचा खेती-बाड़ी करते हैं और समय-समय पर जमीन के ठेके की उगाही लेने गांव आते रहे हैं।