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UP Flood: अब खाने-पीने के भी लाले...नावें और मोटर बोट नाकाफी, गंगा-यमुना का जलस्तर गिरा, पर दुश्वारियां बरकरार

Wed, 06 Aug 2025 01:04 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में मंगलवार को थोड़ी गिरावट दर्ज की गई लेकिन खतरा बरकरार है। फाफामऊ में शाम तक गंगा खतरे के निशान (84.738 मीटर) से ऊपर 85.99 मीटर पर रहीं। वहीं नैनी में यमुना नदी का जलस्तर 85.79 मीटर रिकॉर्ड किया गया। 
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सलोरी इलाके में बाढ़ के पानी में डूबी पहली मंजिल तो लोग दूसरी मंजिल पर शरण लेने को मजबूर हो गए है - फोटो : अमर उजाला
गंगा और यमुना का जलस्तर भले ही कम होने लगा है लेकिन खतरा बरकरार है। साथ ही बाढ़ की चपेट में आई करीब पांच लाख की आबादी की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। हालात यह है कि लोगों के सामने भोजन-पानी का संकट खड़ा होने लगा है।

वहीं, राहत शिविरों में शरणार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट मोड पर है। मंडलायुक्त व डीएम ने मंगलवार को व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर तैयारियां परखीं।
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गंगा की रफ्तार स्थिर होने के बावजूद दारागंज के निचले इलाके में बाढ़ के पानी से सामान निकालते हुए - फोटो : अमर उजाला
यमुना के जलस्तर में गिरावट सोमवार शाम से ही शुरू हो गई थी जो मंगलवार को भी जारी रही। सिंचाई विभाग को मंगलवार की शाम की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना में गिरावट प्रति घंटे 075 सेमी दर्ज की गई है। वहीं, फाफामऊ में गंगा के जलस्तर में भी प्रति घंटे एक सेमी की गिरावट दर्ज की गई। 

 
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गंगा की रफ्तार स्थिर होने के बावजूद दारागंज गंगा मूर्ति स्थल चौराहे पर भरा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
इसका नतीजा यह रहा कि गंगा का जलस्तर शाम पांच बजे के करीब 86 मीटर से नीचे चला गया। राहत की बात यह भी रही कि गंगा व यमुना का जल तेजी से निकल रहा है। इसका नतीजा रहा कि छतनाग में जलस्तर में प्रतिघंटे तीन सेमी की गिरावट दर्ज की गई। 

 

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मकान का पहला तल डूबने के बाद कुछ इस तरह बाहर निकलता युवक। - फोटो : अमर उजाला
दोनों नदियों के जलस्तर में गिरावट को लेकर सिंचाई विभाग के अफसरों के संकेत सकारात्मक हैं। अधिशासी अभियंता दिग्विजय सिंह का कहना है कि फिलहाल दोनों नदियों के जलस्तर में गिरावट जारी रहने की उम्मीद है।

गंगा-यमुना में बाढ़ की स्थिति (6 अगस्त सुबह 8 बजे तक) 
खतरे का निशान 84.734 है।

यमुना का जलस्तर 85.31 रिकॉर्ड किया गया। करीब एक मीटर पानी कम हुआ है।
गंगा का जलस्तर 85.74 सेंटीमीटर रिकॉर्ड किया गया। जलस्तर करीब आधा मीटर पानी कम हुआ है। 
 
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अशोक नगर चौराहे स्थित ऋषिकुल विद्यालय राहत शिविर में आश्रय लिए लोग - फोटो : अमर उजाला
अब खाने-पीने के भी लाले
बाढ़ की अवधि बढ़ने के साथ इसमें फंसे लोगों की दुश्वारियां भी बढ़ती जा रही है। बाढ़ पीड़ितों के बीमार पड़ने की शिकायतें बढ़ने के साथ ही भोजन-पानी का भी गंभीर संकट पैदा हो गया है। प्रशासन की ओर से मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों में भोजन के पैकेट और राहत सामग्री वितरित कराई गई लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। सलोरी के रमेश पुरोहित, छोटा वघाड़ा में फंसे दुर्गेश कुशवाहा, म्योराबाद की रंगीता आदि बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर हैं। 
 
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छोटा बघाड़ा क्षेत्र में बाढ़ के पानी से घर आने जाने के लिए नाव का सहारा लेते लोग - फोटो : अमर उजाला
नाकाफी साबित हो रहीं नावें और मोटर बोट
बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने और लाने-ले जाने के लिए 323 नावें व तीन मोटर बोट लगाई गई हैं। सदर तहसील के अंतर्गत 133 नावें चलाई जा रही हैं लेकिन इनका लाभ सभी प्रभावितों को नहीं मिल पा रहा है। कई क्षेत्रों में नावें पहुंच ही नहीं पा रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से खाने के पैकेट, लाई-चना समेत अन्य राहत सामग्री पहुंचाई गई लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। लोग कंट्रोल रूम के अलावा अन्य लोगों को लगातार फोन करते रहे लेकिन मदद नहीं मिली। 
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छोटा बघाड़ा क्षेत्र में बाढ़ का पानी लोगों के घरो में प्रवेश कर चुका है - फोटो : अमर उजाला
खेती को नुकसान, मांगी गई रिपोर्ट
बाढ़ की चपेट में आने से हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। जिला प्रशासन की ओर से इस नुकसान का आकलन कराया जाएगा। इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। इस बाबत तहसीलों और ब्लॉकों से प्रभावित क्षेत्र, बोया गया क्षेत्र, कटान की स्थिति, तीन इंच से अधिक गाद वाली खेती योग्य भूमि का क्षेत्रफल, फसल क्षति आदि बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। 

 

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छोटा बघाड़ा में बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश कर चुका है। बाढ़ के पानी में स्नान करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ क्षेत्रों में अब भी आठ हजार से अधिक उपभोक्ताओं के घरों में अंधेरा
बाढ़ की वजह से निचले इलाकों में अब भी आठ हजार से अधिक उपभोक्ताओं के घरों में अंधेरा छाया हुआ है। चार दिन बाद भी इन घरों में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। जलस्तर में मामूली गिरावट के बाद मंगलवार को कई इलाकों में आपूर्ति बहाल कर दी गई। इससे अशोकनगर की बेली कॉलोनी की बकरीद वाली गली समेत अन्य मोहल्लों में रहने वालों को राहत मिली। 

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छोटा बघाड़ा इलाके में गहरे पानी में ट्यूब के सहारे रील बनाते युवक - फोटो : अमर उजाला
वहीं, गंगानगर इलाके में ट्रांसफॉर्मर डूबा होने से आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। बाढ़ प्रभावित कीडगंज के यमुना बैंक रोड स्थित उपकेंद्र व दारागंज के बक्शी बांध जलमग्न हैं, जिससे वहां बिजली बहाल नहीं हो सकी है। मंगलवार को मुख्य अभियंता राजेश कुमार ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा, दूसरी लाइन से संबंधित मोहल्लों में बिजली आपूर्ति बहाल की जा रही है।

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बाढ़ के पानी में घिरा सिक्स लेन पुल का बड़ा हिस्सा। पानी की रफ्तार तेज होने पर पुल बनाने का रोका - फोटो : अमर उजाला
गंगा-यमुना की रफ्तार थमी, राहत की उम्मीद जगी
प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में मंगलवार को थोड़ी गिरावट दर्ज की गई लेकिन खतरा बरकरार है। फाफामऊ में शाम तक गंगा खतरे के निशान (84.738 मीटर) से ऊपर 85.99 मीटर पर रहीं। वहीं नैनी में यमुना नदी का जलस्तर 85.79 मीटर रिकॉर्ड किया गया। दोनों नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से करीब पांच लाख की आबादी बाढ़ से जूझ रही है।

 

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बाढ़ के पानी में डूबा संगम स्थित बडे़ हनुमान मंदिर का परिसर - फोटो : अमर उजाला
समय के साथ बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां भी बढ़ती जा रही हैं। आशियाना छूटने के बाद अब उनके सामने भोजन-पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राहत शिविरों में लगातार बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। 

 

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दारागंज के निचले इलाके में बाढ़ के पानी से कुछ इस तरह आते-जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
बीते रोज जहां 8386 लोगों ने सरकारी राहत शिविरों में शरण ली थी, वहीं मंगलवार को यह संख्या बढ़कर 9470 हो गई। यह संख्या अभी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। 

 

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बाढ़ के पानी में घिरा सिक्स लेन पुल का हिस्सा। पानी की रफ्तार तेज होने पर पुल बनाने का काम रोका - फोटो : अमर उजाला
अंतिम सफर भी मुश्किल, करनी पड़ी वैकल्पिक व्यवस्था
बाढ़ की वजह से अंतिम संस्कार की डगर भी कठिन हो गई है। ऊपर से प्रशासन एवं नगर निगम की अव्यवस्था ने अपनों को खोने वालों का दर्द और बढ़ा दिया है। अंतिम संस्कार के लिए घाटों पर किसी तरह के इंतजाम नहीं हैं। बीते रोज अत्यधिक दबाव के कारण दारागंज विद्युत शवदाह गृह भी जवाब दे गया। 

 

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सादियाबाद इलाके में बाढ़ के पानीमें डूबा स्कूल - फोटो : अमर उजाला
नगर निगम के मुख्य अभियंता विद्युत संजय कटियार ने बताया कि विद्युत शवदाह गृह पर इन दिनों दबाव बढ़ गया है। आम तौर पर रोजाना 20 से 22 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है लेकिन सोमवार को 40 शवों की अंत्येष्टि हुई। इससे क्वॉयल गर्म होकर जल गया। 

 

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यमुना की रफ्तार में कुछ कमी के बावजूद निचले इलाके के मकान अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं - फोटो : अमर उजाला
इसकी वजह से मंगलवार को बंद रखना पड़ा। अब पैनल ठीक कर लिया गया है और बुधवार से विद्युत शवदाह गृह में अंत्येष्टि की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि शंकरघाट एवं फाफामऊ स्थित विद्युत शवदाह गृह चालू हैं और उनमें अंत्येष्टि की जा रही है। बता दें कि बाढ़ की वजह से चंद्रशेखर आजाद, छतनाग समेत ज्यादातर श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहे। 

 
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यमुना की रफ्तार में कुछ कमी के बावजूद निचले इलाके के मकान अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं - फोटो : अमर उजाला
इसे देखते हुए नगर निगम की ओर से बुधवार से अंत्येष्टि के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। अपर नगर आयुक्त दीपेंद्र यादव ने बताया कि झुंसी व आसपास तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश से छतनाग घाट आने वाले शवों के लिए नीबी में अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। नगर आयुक्त सीलम साई तेजा ने बताया कि फाफामऊ में भी एक अन्य घाट की व्यवस्था की गई है। 

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