अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन प्रतियोगिता में सेना का दबदबा कायम रहा। 42.195 किमी दौड़ में पुरुषों में अमेठी के राहुल कुमार (नायब सूबेदार) पुरुष वर्ग में चैंपियन बने।
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इंदिरा मैराथन 2019 चैंपिन
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इंदिरा मैराथन में महिला वर्ग में पश्चिम बंगाल की श्यामली चैंपियन रहीं, वहीं प्रयागराज की नीता पटेल दूसरे स्थान और हरियाणा की अनीता रानी ने तीसरी पोजीशन हासिल की।
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35वीं अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन को मंगलवार सुबह 6.30 बजे आनंद भवन पर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उपेंद्र तिवारी ने हरी झंडी दिखाई।
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इंदिरा मैराथन मंगलवार की सुबह 6.30 बजे आनंद भवन से शुरू होकर चंद्रशेखर आजाद पार्क स्थित मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में पूरी हुई।
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पुरुष वर्ग में प्रथम तीन स्थान पर रहे धावकों के बीच कांटे का मुकाबला रहा। गाजीपुर के हरेंद्र चौहान राहुल से मात्र एक मिनट13 सेकेंड पीछे रह गए। राहुल ने दो घंटे 28 मिनट और 35 सेकेंड तथा हरेंद्र ने दो घंटे 29 मिनट 48 सेकेंड में दौड़ पूरी की। वहीं सेना के नायक हिमाचल प्रदेश के हेतराम ने दो घंटे 30 मिनट 23 सेकेंड में दौड़ पूरी कर तीसरा स्थान हासिल किया।
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मैराथन में प्रथम स्थान पाने वाले राहुल व श्यामली को दो-दो लाख रुपये मिले। द्वितीय स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों को एक-एक लाख तथा द्वितीय उपविजेताओं को 75-75 हजार रुपये मिले।
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क्रास कंट्री में 15 से 20 वर्ष आयु के बालक-बालिका वर्ग में स्थानीय धावक छाए रहे। आठ किमी दौड़ वाली इस प्रतियोगिता में प्रयागराज के शनि निषाद व पूजा पटेल विजेता रहे। वहीं सैतान भाई राम दूसरे तथा मिर्जापुर के संदीप यादव तीसरे स्थान पर रहे। मिर्जापुर की खुशबू सरोज दूसरे तथा प्रयागराज की अंजली पटेल तीसरे स्थान पर रहीं।
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आठ किमी दूरी वाले 45 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पुरुष वर्ग में छत्तीसगढ़ के राम आसरे विजेता रहे। जौनपुर के सुरेंद्र प्रताप यादव द्वितीय तथा अलीगढ़ के चंद्रपाल सिंह तृतीय रहे। पांचवें स्थान पर गिरीश चंद्र प्रयागराज के अकेले धावक रहे जो प्रथम 10 में स्थान बना पाए। वहीं चार किमी दूरी वाले वरिष्ठ महिला वर्ग में सभी 10 स्थानों पर प्रयागराज का कब्जा रहा। इस वर्ग में एच. संगनी देवी प्रथम रहीं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रोफेसर अर्चना चहल द्वितीय तथा बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋतु जैन तृतीय रहीं।
क्रास कंट्री दौड़ में बेईमानी का आरोप, हंगामा, चक्काजाम
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प्रदेश क्रास कंट्री के प्रतिभागियों ने गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। मेयोहाल पर धरना-प्रदर्शन के बाद चंद्रशेखर आजाद पार्क के सामने भी उन्हाेंने नारेबाजी की तथा चक्काजाम कर दिया। उनका कहना था कि कई खिलाड़ियों ने वाहनों से दूरी पूरी की है। वे क्रास कंट्री
केधावकों के पैर में भी चिप लगाने की मांग कर रहे थे। वहां मौजूद फोर्स ने किसी तरह से उन्हें हटाया। वहीं खेल प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताया।
क्रास कंट्री दौड़ में गड़बड़ी के आरोप हर साल लगते रहे हैं। इसके मद्देनजर इस वर्ष सीसीटीवी कैमरे लगाने के अलावा वीडियोग्राफी भी कराई गई। इसके बावजूद वाहनों से खिलाड़ियों को लाने तथा बीच में उनके घुसने के आरोप लगे।
उम्र को मात देकर दौड़े 82 साल के सहदेव
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अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन में जोश, जज्बा और साहस को लोग हर तरफ सलाम करते नजर आए। उम्र को पछाड़कर 82 वर्ष के सहदेव जब इस राष्ट्रीय स्पर्धा में दौड़े तो लोग देखते रह गए।
हालांकि इस मैराथन में अंतिम 10 विजेताओं की सूची में वजह जगह नहीं बना सके, लेकिन दौड़ में शामिल होना ही उनके लिए जीत से बढ़कर था। उनका कहना था कि जिंदगी सिर्फ उम्र भर की दौड़ है।
सोहबतियाबाग के सहदेव इंदिरा मैराथन में सबसे बुजुर्ग धावक के रूप में शामिल हुए। 4501 टैग नंबर के इस बुजुर्ग खिलाड़ी पर सबकी नजर बनी रही।
मैराथन का रंग पड़ा फीका, विजेताओं ने बनाई दूरी
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इंदिरा मैराथन 2019 का आयोजन खेल प्रेमियों तथा आयोजकों की चिंता बढ़ाने वाला रहा। लगातार 35 वर्षों से आयोजित हो रहे देश के इस सबसे पुराने मैराथन की चमक फीकी पड़ती दिखाई दी। इस बार नामी खिलाड़ी नहीं आए तो सरकारी उपेक्षा भी जगह-जगह दिखाई दी।
1985 में शुरू इस आयोजन में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह समेत केंद्र और प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। इसके महत्व को देखते हुए इसे विश्व स्तरीय बनाने की मांग लगातार उठती रही लेकिन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को आमंत्रित करना तो दूर देश के प्रमुख खिलाड़ी भी दूसरे मैराथन को वरियता देते हैं।
इस बार पुरुष वर्ग में विगत वर्षों के पदक विजेता किसी भी खिलाड़ी ने हिस्सा नहीं लिया। इसका नतीजा इंदिरा मैराथन के परिणाम के रूप में देखा जा सकता है। महिला वर्ग में भी पिछले वर्ष की उपविजेता श्यामली सिंह ही इस बार मैराथन का हिस्सा बनीं।
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प्रमुख खिलाड़ियों के न आने की मुख्य वजह दूसरे आयोजनों को बताया जा रहा है। दक्षिणी एशियाई गेम्स दिसंबर में हो रहा है। इसके अलावा मुंबई में नेवी मैराथन का आयोजन 23 नवंबर को होना है। कई खिलाड़ी इन दोनों प्रतियोगिताओं में शामिल रहे हैं। इन प्रतियोगिताओं की तैयारी प्रभावित न हो इसलिए उन्होंने इंदिरा मैराथन में हिस्सा नहीं लिया। इसके अलावा सरकारी उपेक्षा को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि समापन समारोह में कोई भी वरिष्ठ अफसर मौजूद नहीं रहा।
कहीं जाम तो कहीं जानवर बने धावकों की राह में बाधा
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35वीं अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन में देश भर से शामिल हुए धावकों को कई जगह बाधाओं से होकर गुजरना पड़ा। 42किमी लंबी इस राष्ट्रीय स्पर्धा के लिए एक लेन खाली कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन सड़कों पर धावक और वाहन एक साथ दौड़ते नजर आए।
कहीं जाम ने एथलीटों का रास्ता रोका तो कहीं जानवर राह में रोड़ा बने। इसी तरह की बदइंतजामी व अनदेखी के बीच सूबे के खेल मंत्री की मौजूदगी में मैराथन पूरी हुई।
धावकों के लिए बाधा बने रहे मवेशी
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कहीं जाम ने एथलीटों का रास्ता रोका तो कहीं जानवर राह में रोड़ा बने
वैदिक मंत्रोच्चार से बटुकों ने धावकों पर की पुष्प वर्षा, किया उत्साहवर्धन
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मंगलवार को इंदिरा मैराथन में शामिल धावकों के उत्साहवर्धन एवं मदद के लिए समाजसेवियों एवं स्थानीय लोगों ने सड़क के किनारे थोड़ी-थोड़ी दूर पर पानी, ग्लूकोज, नींबू पानी का स्टाल लगाए थे।
अरैल में नए पक्के घाट के सामने सच्चा बाबा आश्रम के सामने 101 बटुकों ने धावकों पर वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ पुष्प वर्षा करके थकान और पसीने से चूर धावकों में ऊर्जा का संचार कर रहे थे। इस दौरान वहां सड़क के किनारे खड़े अन्य दर्शक भारत माता के जयकारे और वीर तुम बढ़े चलों के नारे लगाकर भी धावकों को उत्साहित कर रहे थे।
मैराथन में बेटियों ने दिखाया दमखम
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इंदिरा मैराथन में चिकित्सा इंतजाम भी नाकाफी रहे। कहने के लिए तो पांच एंबुलेंस लगाई गई थी, लेकिन पूरे रास्ते भर सिर्फ दो ही नजर आईं।
एथलीट टीमों के सबसे पीछे एंबुलेंस चल रही थी। 108 एंबुलेंस के एमटी संतोष भारती ने बताया कि एथलीट टीमों के साथ उनका समन्वय बना रहा। यही वजह थी कि जहां भी धावकों को मोच आने या फिर लुढ़कने की शिकायतें मिलीं, तत्काल एंबुलेंस पहुंची और उपचार किया गया।
मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ
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इंदिरा मैराथन 2019 में मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। जिसमें कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया।