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prayagraj violence : कानपुर बवाल के बाद ही शुरू हो गई थी प्लानिंग, पंफलेट लगने के बाद भी पुलिस को नहीं लगी भनक

Mon, 13 Jun 2022 01:05 AM IST
विनोद सिंह आलोक श्रीवास्तव, प्रयागराज

सार

शायद यही वजह थी कि जुमे पर बिना किसी घोषित बंदी के ही पुराने शहर के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। अब सवाल यह उठता है कि शासन की ओर से चेताए जाने के बाद हाई अलर्ट पर रहने और पुख्ता चौकसी बरतने का दावा करने वाले अफसरों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
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Prayagraj News : प्रयागराज में हिंसा। - फोटो : अमर उजाला।
अटाला में हुए बवाल के बाद उठे सवालों पर आला पुलिस अफसर लगातार दावा करते रहे कि पुलिस की ओर से मुकम्मल तैयारियां की गई थीं। लेकिन उनके दावे सवालों के घेर मे है। दरअसल शुक्रवार से कई दिनों पहले ही जुमे पर बंदी के पम्फलेट अटाला स्थित दुकानों व घरों के बाहर लगा दिए गए थे। सवाल यह है कि इसके बावजूद पुलिस को इस बात की भनक कैसे नहीं लगी। माहौल भांपने में अफसरों से कहां चूक हुई।


बड़ी बात यह है कि बवाल के दूसरे दिन भी कई घरों के बाहर यह पम्फलेट लगे नजर आए। इसमें जुमे पर बंदी की बात लिखी थी। सूत्रों का कहना है कि कानपुर में तीन जून को हुए बवाल के बाद से ही यह पम्फलेट लगाए जाने लगे थे। गुपचुप तरीकों से रात में ही इन्हें लगाया जाता था। खास बात यह कि न सिर्फ घरों के बाहर और दरवाजों पर बल्कि दुकानों के बाहर भी यह पम्फलेट चिपकाए गए थे।
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Prayagraj News : प्रयागराज में हिंसा। - फोटो : अमर उजाला।
बिना बंदी के ही दुकानें रहीं बंद
शायद यही वजह थी कि जुमे पर बिना किसी घोषित बंदी के ही पुराने शहर के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। अब सवाल यह उठता है कि शासन की ओर से चेताए जाने के बाद हाई अलर्ट पर रहने और पुख्ता चौकसी बरतने का दावा करने वाले अफसरों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। आखिर कैसे जुमे पर बंदी के जरिए विरोध का संदेश देने की मुहिम को आगे बढ़ाया जाता रहा और पुलिस अफसरों की ओर से इसे लेकर कोई एहतियातन कार्रवाई नहीं की गई।


जानकारों का कहना है कि अफसर लाख दावे करें लेकिन जिस तरीके से बवाल हुआ, उससे साफ है कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि किस कदर आग भड़काने की साजिश रची जा रही है। ऐसा होता तो पूरी तैयारी जुमे के दिन सिर्फ फोर्स तैनात करने तक ही सीमित न रहती। पम्फलेट लगाने वालों को पहले ही चिह्नित कर लिया गया होता और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी होती।
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Prayagraj News : जावेद पंप। हिंसा का मुख्य आरोपी। - फोटो : अमर उजाला।
क्या करती रहीं खुफिया एजेंसियां?
अटाला बवाल के बाद पुलिस के साथ ही खुफिया एजेंसियां भी सवालों के घेरे में हैं। दरअसल कानपुर बवाल के बाद इस बात के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से सक्रिय रहें। इस बात का पता लगाएं कि कहीं किसी तरह की कोई संदिग्ध गतिविधि तो नहीं है। लेकिन आईबी की स्थानीय इकाई ही नहीं बल्कि स्थानीय अभिसूचना इकाई भी इस मामले में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। किसी को भनक ही नहीं लग पाई कि  शहर का माहौल बिगाड़ने के मकसद से इतनी बड़ी साजिश रची जा रही है।

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prayagraj violence - फोटो : अमर उजाला
किसने दिया दगा?
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार की जा रही बैठकों पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल अफसरों की ओर से लगातार समुदाय विशेष केप्रबुद्धजनों और धर्मगुरुओं संग बैठकें की जा रही थीं। उनसे अपील की जा रही थी कि जुमे की नमाज शांतिपूर्ण और सद्भाव के साथ संपन्न कराई जाए। अफसरों ने यह भी दावे किए थे कि  बैठकों में यह आश्वासन मिला है कि सौहार्र्द का माहौल कायम करने में सभी पुलिस-प्रशासन का हरसंभव सहयोग करेंगे। ऐसे में सवाल यह है कि बंदी के जरिए विरोध की आग सुलगाने की साजिश के बारे में पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी गई। 
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prayagraj violence - फोटो : अमर उजाला
व्हाट्सएप पर जावेद फैला रहा था नफरत, शेयर किए थे मैसेज

अटाला में पथराव, बमबाजी व आगजनी की घटना का मास्टरमाइंड  जावेद मोहम्मद उर्फ जावेद पंप व्हाट्सएप पर नफरत फैला रहा था। वह सोशल मीडिया के जरिये ही शहर को आग में झोंकने की साजिश रच रहा था। उसकी प्लानिंग 10 जून को भारत बंद कराने की थी और वह इस मैसेज को व्हाट्सएप के जरिये शेयर कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल की जांच पड़ताल की तो यह खुलासा हुआ। फिलहाल उसका मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजने की तैयारी की जा रही है।
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शुक्रवार को ही ले लिया गया था हिरासत में
जावेद मोहम्मद को पुलिस ने शुक्रवार रात में ही हिरासत में ले लिया था। सूत्रों का कहना है कि उसके बारे में पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि अटाला बवाल की आग भड़काने में मुख्य रूप से उसका ही हाथ था। इसके बाद पुलिस ने करेली के जेके आशियाना मोहल्ले में स्थित उसके घर में दबिश दी और उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसे थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की गई। उसने खुद को निर्दोष बताया और बवाल से अपना कोई भी संबंध होने की बात से इनकार कर दिया। लेकिन जब पुलिस ने उसके मोबाइल की जांच पड़ताल की तो साजिश की बात पुख्ता हो गई।
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सोशल मीडिया पर भारत बंद कराने के लिए चला रहे थे अभियान
सूत्रों का कहना है कि उसका व्हाट्सएप अकाउंट खंगालने पर पता चला कि वह भाजपा की पूर्व प्रवक्ता के बयान को लेकर व्हाट्सएप पर नफरत फैलाने में लगा हुआ था। यही नहीं वह और उसके साथी भारत बंद कराने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे थे। उसने जुमे के दिन लोगों से अटाला पर जुटने का आह्वान किया था। उसकी 10 जून को भारत बंद कराने की प्लानिंग थी और इसके लिए वह अपने जानने वालों को लगातार मैसेज भेज रहा था।

उसके मोबाइल से कई मैसेज व चैट डिलीट मिले हैं। माना जा रहा है कि बवाल के बाद पुलिस से बचने केलिए ऐसा किया गया। मोबाइल से डिलीट किए गए डाटा की रिकवरी की कोशिश की जा रही है। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। एसएसपी अजय कुमार का कहना है कि मोबाइल से 10 जून को भारत बंद आह्वान के मैसेज भेजने की बात सामने आई है। जांच पड़ताल की जा रही है।

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Prayagraj News : जावेद पंप का मकान गिराता बुलडोजर। - फोटो : अमर उजाला।
मोटर पंप का करता है व्यवसाय
अटाला बवाल के मामले में गिरफ्तार 56 साल का जावेद मोहम्मद पुत्र मो. अजहर सबमर्सिबल पंप का व्यवसाय करता है। वह आईईआरटी से सेल्स मैनेजमेंट में डिप्लोमा कोर्स कर चुका है। उसके चार बच्चों में दो बेटियां व दो बेटे हैं। उसकी एक बेटी आफरीन फातिमा दिल्ली में रहकर पढ़ाई करती है, जबकि छोटी बेटी घर पर ही रहती है। दो बेटों में मो. इमाम और शुजात मोहम्मद शामिल हैं। जावेद वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया का पदाधिकारी भी है। उसने कुछ समय पहले तक ट्रांसपोर्ट नगर में एक कार्यालय खोल रखा था।
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prayagraj violence - फोटो : अमर उजाला
मोबाइल में मिले कई नंबर रडार पर
सूत्रों का कहना है कि जावेद के मोबाइल में मिले कई फोन नंबर पुलिस के रडार पर हैं। यह वे मोबाइल नंबर है,ं जिन पर उसने भारत बंद के आह्वान संबंधित मैसेज फॉरवर्ड किए थे। पुलिस इन सभी मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटा रही है। पता लगाया जा रहा है कि इन नंबरों का इस्तेमाल कौन-कौन से लोग कर रहे थे। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इनमें सभी स्थानीय हैं या कुछ बाहरी लोग भी हैं। 
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