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प्रयागराज तिहरे हत्याकांडः सात भाई थे, तीन की हत्या हो गई, तीन जेल में

Thu, 21 May 2020 01:43 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
कोरांव के निश्चिंतपुर गांव में बुधवार को जमीन के विवाद में पहली बार खून की होली नहीं खेली गई थी। इससे पहले 2014 में भी इसी चार बीघा जमीन के विवाद में क्षेत्र पंचायत सदस्य रहे मुलायम यादव की हत्या भी हो चुकी है। इस मामले में मुख्य आरोपी बरमदीन व उसके तीन बेटे अभी जेल में हैं। 

गांव के रामजन यादव और उनकी पत्नी जोखनी देवी के पास करीब 40 बीघे जमीन थी। बेटा ना होने की वजह से जोखनी देवी ने अपने नाती बरमदीन को अपने साथ रख लिया। उसे जमीन का उत्तराधिकारी बना दिया। इसी समय रामजन यादव के रिश्तेदार शिवनारायण यादव भी वहीं आकर रहने लगे। रामजन की मौत के बाद शिवनारायण ने भी उनकी जमीन पर दावा ठोंक दिया। 36 बीघे भूमि का मामला तो बातचीत से निपट गया, लेकिन 4 बीघे का विवाद लगभग 20 साल से चला आ रहा है।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
दोनों ही पक्ष इस जमीन पर दावा जताते रहे हैं। 2014 में शिवनारायण के बेटे मुलायम यादव की घर के पास ही जंगलों में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मुलायम उस समय क्षेत्र पंचायत सदस्य भी थे। इस कांड में बरमदीन मुख्य आरोपी बनाया गया। उनके साथ ही बेटे लक्ष्मण कुंवर और अनिरुद्ध के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चारों अभी तक जेल में हैं।

मुलायम की हत्या और बरमदीन व उसके तीन बेटों के जेल जाने के बाद भी दुश्मनी ठंडी नहीं हुई, बल्कि और बढ़ गई। अक्सर विवाद होता रहा और मामला पुलिस तक भी जाता रहा। बुधवार को बरमदीन के बेटे इंद्र बहादुर राम सिंह और रविंद्र जब उसी विवादित जमीन को ट्रैक्टर से जोतने के लिए पहुंचे तो उनकी आरोपियों ने हत्या कर दी।

ये हुए नामजद

विंध्यवासिनी की तहरीर पर शिवनारायण, ज्ञान सिंह, रवि सिंह, धीर सिंह, राम सिंह, कृष्ण कुमार उर्फ बाबा, हरीकृष्ण, साहेब लाल, रामायण, प्रेमशंकर,  मान सिंह, चंद्रशेखर, बुद्धिमान सिंह, आशीष सिंह, सुरेंद्र सिंह, बबीता, रंजना, अजय कुमार, विजय कुमार, राजकली और वंदना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। पुलिस ने दबिश देकर सुरेंद्र सिंह, प्रेम शंकर, धीर सिंह, बुद्धिमान सिंह, आशीष यादव, चंद्रशेखर, बबीता, रंजना, रामकली और वंदना को गिरफ्तार कर लिया।
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निश्चिंतपुर गांव के रहने वाले बरम दिन यादव के सात बेटे थे। 4 बीघे जमीन की दुश्मनी में उनके तीन बेटों की हत्या हो गई। बरमदीन और उसके तीन बेटे हत्या के आरोप में पहले से ही जेल में हैं। सात बेटों के परिवार में आज गांव में सिर्फ बड़े बेटे विंध्यवासिनी ही मौजूद थे। उनकी आंखों में सिर्फ आंसू थे।

बरमदीन के सबसे बड़े विंध्यवासिनी यादव (50) हैं। बुधवार को दूसरे नंबर के इंद्र बहादुर यादव (45), रविंद्र यादव (38) और राम सिंह (35) की हत्या कर दी गई। लक्ष्मण यादव, कुंवर जी और अनिरुद्ध यादव 2014 में मुलायम यादव की हत्या में जेल चले गए थे। तीनों तब से जेल में ही है। आज खेत में झगड़े के समय जेल में बंद अनिरुद्ध यादव की पत्नी सुनीता और बेटी रागिनी भी मौजूद थीं। हमलावरों ने सुनीता (36)और रागिनी (16) को भी बुरी तरह से पीटा है। दोनों कि अस्पताल में हालत गंभीर बनी हुई है।

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6 दिन पहले मुंबई से आए थे दोनों भाई, क्वारंटीन रहते तो ना होती घटना

कोरांव के निश्चिंतपुर गांव में बुधवार को मारे गए इंद्र बहादुर यादव और रविंद्र यादव 14 मई को मुंबई से वापस आए थे। अगर दोनों 21 दिनों तक घर में ही क्वारंटीन रहते तो शायद यह घटना टल सकती थी। इस मामले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साफ साफ देखी जा सकती है। इस घटना से पता चलता है कि निगरानी समितियां व स्वास्थ्य विभाग के लोग प्रवासी लोगों की निगरानी के लिए कितना सतर्क हैं।

गांव वालों ने बताया कि 2014 में मुलायम यादव की हत्या के बाद जब बरमदीन और उनके तीन बेटे जेल चले गए तो इंद्र बहादुर राम सिंह और रविंद्र भी दुश्मनी से बचने के लिए मुंबई चले गए थे। वे वहां प्राइवेट काम करने लगे थे। कोरोना संकट के बाद जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो इंद्र बहादुर और रविंद्र वहां फंस गए थे। रामसिंह 1 साल पहले ही यहां आ गए थे। इंद्र बहादुर और रविंद्र किसी तरह जुगाड़ करके 14 मई को मुंबई से प्रयागराज पहुंचे।

मुंबई से यहां आने वालों को 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाता है। लेकिन पिछले हफ्ते से नियम बदलकर उन्हें होम क्वारंटीन करने के निर्देश दे दिए गए थे। लेकिन मुंबई से आने वाले हर शख्स के क्वारंटीन की जिम्मेदारी पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई है। हर गांव में निगरानी समिति भी बनाई गई है लेकिन उसके बाद भी घटना हो गई। इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह बाद में तय होगा लेकिन अगर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग सजग होता तो यह घटना जरूर टल जाती।
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परिजनों के रुदन से दहला गांव

निश्चिंतपुर गांव में एक साथ तीन हत्याओं से पूरे गांव में मातम पसर गया। मृतकों की पत्नियों व बच्चों के रुदन और उनकी चीत्कार से ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं। दोपहर में इंद्र बहादुर, राम सिंह और रविंद्र की हत्या की खबर जब परिवार की महिलाओं ने सुनी तो उन पर जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा। बच्चे भागते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। इंद्र बहादुर की पत्नी रजवंती देवी, दो बेटे तरुण और शिवकुमार उनके शव से लिपट कर रोने लगे।

लोगों ने देखा तो उनके भी आंसू बह निकले। राम सिंह यादव की पत्नी सुशीला देवी और दो बेटे जयसिंह व अमित बदहवास हालत में पिता को ढूंढने लगे। पिता को लोग अस्पताल लेकर चले गए थे। रवींद्र की पत्नी गुलाब कली और बेटे अंशु और शुभम के आंसू नहीं रुक रहे थे। बेटियों रचना, प्राची और वर्षा की दर्दनाक चीखों से लोग दहल जा रहे थे। 
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