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प्रयागराजः यमुना के बाद गंगा के भी तेवर पड़े नरम

Tue, 24 Sep 2019 12:46 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
खतरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना के बाद रविवार को गंगा का भी जलस्तर घटने लगा। गंगा-यमुना दोनों एक-एक सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घट रही हैं। इससे लोगों ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। गलियों-बस्तियों से पानी सिमटने के साथ ही अब वहां संक्रमण फैलने की आशंका है। उधर, हमीरपुर, बांदा में जल स्तर तेजी से घटने से अगले 48 घंटे में यहां भी तटवर्ती इलाकों में भरा जल काफी हद तक उतरने की बात कही जा रही है।

खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर जाने के बाद यमुना तो शनिवार की रात से मामूली गति से घटने लगी, लेकिन गंगा का जलस्तर रात भर स्थिर रहा। सुबह से गंगा के जलस्तर के भी घटने का क्रम शुरू हुआ, लेकिन उतार-चढ़ाव बने रहने की वजह से लोग दिल थामे रहे। दोपहर दो बजे फिर गंगा स्थिर हो गई। हालांकि छतनाग में गंगा और नैनी में यमुना के घटने से थोड़ी राहत महसूस की जाती रही। रात दस बजे से फिर गंगा-यमुना में क्रमश: एक-डेढ़ सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घटाव शुरू हो गया। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार फिलहाल चंबल, केन और बेतवा के बांधों से बड़ी जलराशि नहीं छोड़ी गई है।

इससे अब गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार कमी आने की उम्मीद है। फिलहाल कहा जा रहा है कि अगर इसी तरह से पानी घटता रहा तो दोनों नदियां 48 घंटे बाद खतरे के निशान से नीचे पहुंच सकतीं हैं। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बताया कि हमीरपुर में यमुना 15 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घट रही है, जबकि बांदा में भी जलस्तर तेजी से घट रहा है। ऐसे में यहां भी सोमवार दोपहर तक नदियों के जलस्तर के घटने के अनुपात में तेजी आ सकती है। फिलहाल दोनों नदियों के तटवर्ती इलाकों में अब तक ढाई लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में है।

जिस गति से जल स्तर घट रहा है, उससे मंगलवार तक गंगा-यमुना प्रयागराज में खतरे के निशान से नीचे बहने लगेगी। हमीरपुर और बांदा में यमुना खतरे के निशान से नीचे आ गई है। अब चंबल, केन और बेतवा से जल दबाव नहीं है। इसलिए अब बाढ़ का खतरा बढ़ने जैसी चिंता नहीं रह गई है। बृजेश सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई बाढ़ खंड, प्रयागराज

गंगा का जलस्तर रात 10 बजे
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फाफामऊ -85.61मीटर
छतनाग -  84.86 मीटर
यमुना का जलस्तर
नैनी - 85.50 मीटर
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खतरे का निशान- 84.73 मीटर
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
एक महीने की मुसीबत देकर जाएगी बाढ़

प्रयागराज। शहरियों के लिए बाढ़ लंबी मुसीबत का कारण बनने जा रही है। अब जबकि बाढ़ का पानी घटने लगा है, प्रभावित इलाकों में गंदगी और दुर्गंध से लोगों का जीना मुहाल है। पानी निकलने के बाद गंदगी मच्छर जनित बीमारियों से निपटने की प्रशासन के सामने चुनौती होगी। अफसरों का कहना है कि पांच से छह दिन बाद ही बाढ़ का पानी निकलेगा लेकिन अपने पीछे गंदगी का अंबार छोड़ जाएगा। बाढ़ के पानी के साथ कछारी इलाके की गंदगी भी मोहल्लों में पहुंच गई है।

बाढ़ का पानी निकलने के बाद यह गंदगी बस्तियों में ही रह जाएगी तथा इनकी सड़न लोगों की बीमारी का कारण बनेगी। इसके अलावा खाली स्थानों, सड़काें, गलियों में कीचड़ का आलम होगा। हजारों मकानों में अभी से बाढ़ का पानी घुस गया है। इस तरह से 15 दिन से भी अधिक समय तक पानी में डूबे रहने से मकान कमजोर हो जाएंगे तो सीलन की भी शिकायत होगी। इसकी वजह से बाहर ही नहीं घर के भीतर भी बदबू, मच्छर आदि से लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। प्रशासन भी बाढ़ का पानी निकलने के बाद आने वाली इस मुसीबत से अवगत है तथा इससे निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। 
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
सड़क पर सफाई, गलियों में ‘नरक’

प्रयागराज। बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में गंदगी से गलियां और नालियां बजबजा रही हैं। सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। रविवार को बारिश के बाद फैला कीचड़ से परेशानी का कारण बना रहा। जल कुंभी का फैलाव मुसीबत बना है। सीवर ओवर फ्लो होने से शौचालयों की गंदगी गलियों तैर रही है। सफाई कार्य में नगर निगम कर्मचारियों की लापरवाही बाढ़ पीड़ितों पर भारी पड़ रही है। लोग परेशान होकर भटक रहे हैं, कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। 

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तैर रही गंदगी
राजापुर, गंगानगर, भुलई का पुरवा, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, सलोरी, दारागंज, बक्शी कला में गंदगी फैली है। कूड़े के ढेर अब कीचड़ में तब्दील होकर फिसलन का कारण बने हैं। मोहल्लों में भरे पानी में हर तरफ फैली जलकुंभी बड़ी मुसीबत है। राजापुर, गंगानगर, नेवादा, छोटा बघाड़ा, ढरहरिया, ऊंचवागढ़ी, सरकुलर रोड, बेली आदि मोहल्लों की गलियों में उतराती गंदगी बीमारी बांट रही है। 
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खाना भले न मिले लेकिन सफाई जरूरी है

रविवार को यमुना किनारे बसे मोहल्लों में यमुना के पानी के उतरने से लोगों ने राहत की सांस तो ली लेकिन अब भी भीतर और बाहर मुसीबतों की बाढ़ बरकरार है। घरों की निचली मंजिल का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा है, ऐसे में लोग घरों में कैद हैं। कई जगहों पर किसी भी तरह की राहत अब तक नहीं पहुंच सकी है। मायूस होकर मोहम्मद कासिम बोले, मदरसा तायरा और मस्जिद में पानी भरा है, लिहाजा जुमे की नमाज भी नहीं हो सकी। बाकी छात्रों को दूसरे मदरसों में भेज दिया गया है। गड्ढा कॉलोनी में डा.आजमी और शमीम दरोगा वाली गली के पास रहने वाली अंजुम बोलीं, पानी लौटने से यहां जबर्दस्त गंदगी फैली है, जिसकी सफाई जल्द से जल्द न कराई गई तो संक्रामक बीमारी के फैलने का अंदेशा है। खाना भले न मिले लेकिन सफाई जरूरी है।
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
सभी शिक्षण संस्थान 26 तक बंद

प्रयागराज। बाढ़ के मद्देनजर शहरी क्षेत्र के सभी शिक्षण संस्थान 26 सितंबर तक बंद रहेंगे। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने ग्रामीण इलाकों में भी गंगा, यमुना तथा अन्य सहायक नदियों से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूल-कालेजों को 26 तक बंद करने का आदेश दिया है। पूर्व में 22 सितंबर तक 12वीं तक स्कूल बंद किए गए थे लेकिन अब भी बड़े इलाके में बाढ़ की समस्या बनी हुई है। इसे देखते हुए डीएम ने तीन दिन छुट्टी और बढ़ा दी है। डीएम ने सभी कोचिंग संस्थानों में भी 30 सितंबर तक शिक्षण कार्य बंद रखने का आदेश दिया है। बाढ़ तथा त्योहार को देखते हुए धारा 144 की अवधि 28 से 30 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ज्यादातर प्रतियोगी बाढ़ग्रस्त मोहल्लों सलोरी, गोविंदपुर, बघाड़ा, ऊंचवागढ़ी, राजापुर आदि मोहल्लों में रहते हैं। ऐसे में कोचिंग संस्थान तक जाने में छात्राें के डूबने तथा जनहानि की आशंका है। इसलिए कोचिंग संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पाठन-पाठन कार्य 30 सितंबर तक प्रतिबंधित किया जाता है।  
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हर तरफ कीचड़ ही कीचड़

जेके नगर के कोने पर रहने वाले छोटकऊ भाई के घर के एक ओर पानी सिमट गया है, जिससे सड़क पर सारा कचड़ा जमा हो गया है। स्थानीय निवासी हसन भाई बोले, इस दुर्गंध में तो सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। गड्ढा कालोनी के बादशाह बोले, बाढ़ के पानी से ज्यादा अब गंदगी से मुसीबत है। यही के हफीज बोले, गंदगी और दुर्गंध ऐसी है कि पड़ोस के बुजुर्ग की हालत रात तकरीबन तीन बजे बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर पास-पड़ोस के लोगों ने गंदे पानी में कूदकर गौस अस्पताल के डॉ.फिरोज के यहां ले जाकर भर्ती कराया गया।

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संक्रामक  बीमारियों का खतरा
गड्ढा कालोनी की गुड़िया, रिया, चंदा के परिवार अब भी घरों में कैद हैं। जसीर की पुलिया के पास रहने वाले बाबू भाई, परवेज, सलमान, रेहान, आसिफ, तारिक के यहां तो राहत की रत्ती भर सामग्री नहीं पहुंची, खाना न पानी, न ही किसी अन्य तरह की मदद ही। हर तरफ गंदगी फैली है। सफाई नहीं कराने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

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तेज हवा से उठीं लहरें, किनारे लगी गंदगी

रविवार को तेज हवाओं से नदियों में उठीं लहरें डरावनी थीं। कछार के मकानों की छतों पर रहने वालों के लिए यह पहला मौका था जब उतरते पानी में लहरें उठ रही थीं। इन्हीं लहरों के साथ नदी से बह रही जलकुंभी और गंदगी मोहल्लों के किनारों पर लगी। गलियों में जलकुंभी परेशानी का कारण बनी रही। 
सफाई के नाम पर खानापूरी ढरहरिया के राजन निषाद का कहना है कि सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जा रही है। कूड़ा हटाया नहीं बाढ़ के पानी में बहाया जा रहा है। चूना और कीटनाशक का छिड़काव तो कहीं दिखता ही नहीं। राजापुर के राजेश श्रीवास्तव के मुतबिक दुर्गंध ऐसी कि छतों पर रहने वाले भी नाक पर रुमाल रखे बिना नीचे देख नहीं सकते। बेली कछार, मऊसरइयां, शंकरघाट, स्वामी सदानंद नगर, मेंहदौरी में स्थितियां लगभग ऐसी ही हैं। 

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दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी

प्रयागराज। बाढ़ प्रभावित मोहल्लों और राहत केंद्रों में गंदगी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने प्रभारी नगर आयुक्त से कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने निर्देश दिया कि सचल शौचालय की व्यवस्था और सफाई आदि तत्काल सुनिश्चित कराएं। लापरवाह अफसरों, कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराएं, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

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सफाई, जानवरों को पकड़ने, छिड़काव के निर्देश

प्रभारी नगर आयुक्त अमरेंद्र वर्मा ने सभी विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों के साथ अन्य अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। प्रभावित इलाकों और राहत केंद्रों को 18 केंद्रों में बांटकर सबको अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने साफ कहा कि सफाई के साथ कीटनाशक का छिड़काव कराया जाए। कर्मशाला प्रभारी को सभी प्रभावित इलाकों के चिह्नित बिंदुओं, राहत केंद्रों पर मोबाइल शौचालय लगवाने, सफाई कराने के निर्देश दिए। पशु कल्याण अधिकारी को अवारा पशुओं को पकड़वाने का निर्देश दिया। उन्होंने साफ कहा,कोताही मिली तो

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बाढ़ से नुकसान का होगा आकलन लेकिन, राहत की उम्मीद कम

प्रयागराज। बाढ़ का पानी कम होने लगा है। इसी के साथ बाढ़ से होने वाले नुकसान के आकलन की कवायद भी शुरू हो गई है। सभी एसडीएम से रिपोर्ट मांगी गई है। सर्वे के लिए उनके नेतृत्व में टीम भी बना दी गई है। हालांकि शहरी क्षेत्र में कितने लोगों को राहत मिल पाएगी यह कह पाना मुश्किल है। ज्यादातर पीड़ित लोग स्टेट लैंड पर बसे हैं। ऐसे परिवारों को मुआवजा या अन्य मदद नहीं मिलेगी। गांवों में भी फसल बीमा कराने वाले किसानों को ही राहत मिलने की उम्मीद है।

कछारी इलाके में हजारों मकान बाढ़ में डूब गए हैं। इसकी वजह से हजारों लोगों ने राहत शिविरों या अपने परिचितों के यहां शरण ले रखी है। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ में फंसे लोगों की गणना की जा रही है। पानी निकलने का क्रम शुरू होने के साथ नुकसान का सर्वे भी होने जा रहा है। हालांकि, शहर में लोगों को बहुत राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। अफसरों का कहना है कि जिनकेे मकान गिर गए हैं या सामान बह गए हैं उन्हें ही मुआवजा मिलेगा। शहरी क्षेत्र में इस तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। इसके अलावा बाढ़ में फंसे ज्यादातर लोग सरकारी जमीन पर बसे हैं। इसकी वजह से भी वे किसी तरह की राहत के हकदार नहीं होंगे।

बाढ़ की चपेट में कई गांव भी हैं। हजारों एकड़ फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है। एक दर्जन से अधिक मकान भी गिर गए। अफसरों के अनुसार जिनके मकान गिरे हैं उन्हें मुआवजा मिलेगा। इसका आकलन किया जा रहा है। जिनकी फसल को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है उन्हें केंद्रीय योजना के अंतर्गत मदद दी जाएगी। इसके अलावा फसली बीमा योजना का लाभ मिलेगा। एडीएम एफआर मार्तंड प्रताप सिंह का कहना है कि सभी एसडीएम से नुकसान की बाबत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा या अन्य कार्रवाई की जाएगी।

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पीड़ितों में बांटे फल, भोजन सबने दिया मदद का भरोसा

प्रयागराज। बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने वालों का तांता लगा है। राहत केंद्रों तक ही मददगार पहुंच रहे हैं। फल, पूड़ी-सब्जी, दाल-चावल, चाय और लाई-चना के साथ गुड़ का वितरण किया जा रहा है। इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल दुबे के नेतृत्व में दवा कारोबारियों ने रविवार को पांच राहत केंद्रों के साथ बघाड़ा, राजापुर में फल वितरित किए। अनिल ने बताया कि लोगों को बुखार, दर्द की दवाएं और खांसी का सिरप भी दिया गया। मोमबत्ती और माचिस के साथ मच्छर क्वायल देकर लोगों को बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक किया गया। 

गुरुनानक फाउंडेशन की ओर से रविवार को गऊघाट में लंगर सेवा के तहत भोजन वितरण किया गया। इस मौके पर सरनपाल सिंह, गुरमीत सिंह, दलजीत सिंह, महेंद्र सिंह, नमजोत सिंह, रोमित सिंह, केसी गौड़, विनायक आदि मौजूद रहे। वहीं नागरिक संघर्ष मोर्चा के संयोजक शिवसेवक सिंह ने पार्षद कमलेश सिंह, आनंद घिल्डियाल, अशोक सिंह, अनुराधा आदि ने राहत केंद्रों के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में भोजन वितरण कराया। लोगों की समस्याएं पूछकर उनके निस्तारण का भरोसा दिलाया गया।
 
वाचस्पति मधुपति प्राणि सेवा संस्थान की ओर से पूर्व विधायक डॉ. वाचस्पति और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कौशाम्बी मधुपति वाचस्पति ने एनी बेसेंट, न्यू कैंट राहत शिविरों में भोजन वितरण कराया। तीन दिनी राहत कार्य के दौरान घूरपुर के कंजासा गांव में भोजन वितरण कराया गया। इस दौरान चुन्नीलाल, महेश शंकर श्रीवास्तव, अनुभा शर्मा, केडी सिंह के साथ एबीआईईटी के शिक्षक, छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। वहीं राष्ट्रीय नारायणी सेना के जिलाध्यक्ष शिवांश श्रीवास्तव ने बैठक में निर्णय लिया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगावाए जाएंगे।

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नांव संचालकों की मनमानी ने और बढ़ाई परेशानी

प्रयागराज। नांव संचालकों की मनमानी ने बाढ़ पीड़ितों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई इलाकों में नांवें नहीं पहुंच रही हैं। इसके अलावा सूचना दिए जाने के बाद नांव के लिए डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार कराने की भी शिकायत है। इसकी वजह से लोग जरूरत की चिजें नहीं ला पा रहे। सलोरी के बड़े इलाके में अब तक राहत सामग्री नहीं पहुंचने की भी शिकायत है। नांव न मिलने की शिकायत बेली, राजापुर में अधिक है। राजापुर के आशीष मिश्र, बेली कछार के लिए मकबूल का कहना था कि नांव वाले दिखाई देते हैं लेकिन उनके बुलाने पर नहीं आते। रिंकू यादव, पारस पटेल ने नांव के लिए पैसा मांगे जाने की भी शिकायत की। आजमगढ़ के शिवम तिवारी, बलिया के शिविशंकर गौड़ नामक छात्र बेली कछार के भीतरी क्षेत्र में कई दिनों से फंसे थे। वे नाविकों को लगातार आवाज लगाते रहे लेकिन वहां कोई नहीं पहुंचा। रविवार को सिविल डिफेंस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें बाहर निकाला। सिविल डिफेंस की नांव भी उधर भटककर चली गई थी। नांव न चलने की शिकायत ज्यादातरों क्षेत्रों में है।

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एमएल कान्वेंट में खाना न मिलने की शिकायत

एमएल कान्वेंट बाढ़ राहत शिविर में रविवार को शरणार्थियों ने खाना न मिलने की शिकायत की। दिन में शिविर पहुंचे एसडीएम से भी उन्होंने इसकी शिकायत की। शरणार्थियों का कहना था कि यदि वे मौके पर शिविर में नहीं हैं तो उनका पैकेट परिवार वालों को नहीं दिया जाता। वितरण के समय सिर्फ शिविर मौजूद लोगों को ही खाने का पैकेट दिए जाने की शिकायत ज्यादातर जगहों पर है। जबकि, उनके नाम शरणार्थियों के रजिस्टर में दर्ज हैं। इससे लोगों में जबरदस्त नाराजगी रही।

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बाढ़ का पानी निकलने तक चालू रहेंगे शिविर

जब तक बाढ़ का पानी नहीं निकल जाता शिविर चालू रहेंगे। एडीएम वित्त एवं राजस्व का कहना है कि दोनों नदियों में जल स्तर नीचे गिरने लगा है। दो से तीन दिनों में पानी कम हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी निकलने तक शिविर चालू रहेंगे। प्रभावित क्षेत्रों में भी राहत कार्य जारी रहेंगे। जिले के प्रभारी मंत्री डॉ.महेंद्र सिंह का कार्यक्रम स्थगित हो गया है। वह सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तथा राहत शिविरों का निरीक्षण करने वाले थे लेकिन अब वह नहीं आएंगे।

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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जुटे कारोबारी 

प्रयागराज। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों को राहत देेने के कार्य में स्थानीय व्यापारी भी जुट गए हैं। रविवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले व्यापारियों ने दो नाव के माध्यम से बेली रोड के समीप बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत सामग्री वितरित की। इस दौरान 150 से ज्यादा घरों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई। व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष आशीष गुप्ता, महानगर अध्यक्ष योगेश गोयल आदि ने मकबूल हुसैन इंटर कालेज के पीछे ब्रेड, दूध, बिस्कुट, मोमबत्ती, माचिस, पानी की बोतल, लाई आदि का पैकेट बनाकर उसका प्रभावित क्षेत्र में वितरण किया। इस दौरान कुछ घरों में 20 फीट तक पानी भरा हुआ था। इन घरों के दूसरे तल में लोगों ने अपना डेरा जमा रखा था। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि वे करेली, बघाड़ा, फाफामऊ आदि क्षेत्र में भी राहत सामग्री का वितरण करेंगे। इस दौरान विपुल मित्तल, नवीन अग्रवाल, अमिताभ गौड़, भरत हिरानी, रमन गुप्ता, राजीव अग्रवाल, हिमांशु आदि के साथ सिविल डिफेंस से रवि द्विवेदी भी मौजूद रहे। उधर व्यापारी नेता अमर वैश्य मुन्ना भइया भी सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव से जाकर राहत सामग्री का वितरण करेंगे। 

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बाढ़ से बचने के लिए शिवकुटी से संगम तक बने ‘प्रयाग की पैड़ी’

प्रयागराज। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने रविवार को बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों की हिफाजत के लिए ‘हर की पैड़ी’ की तर्ज पर ‘प्रयाग की पैड़ी’ बनाने की जरूरत पर बल दिया। बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा करने के बाद उन्होंने बताया कि शिवकुटी से संगम तक गंगा कैनाल का निर्माण कराकर बांध के रूप में प्रयाग की पैड़ी नहीं बनाई गई तो बाढ़ की विभीषिका से उबरना आने वाले दिनों में मुश्किल होगा।

पूर्व राज्य सभा सदस्य ने कहा है कि नागवासुकि मंदिर से बघाड़ा, सलोरी, शिवकुटी, शंकरघाट, रसूलाबाद, मेहदौरी, बेली, राजापुर होते हुए कैंट सदर तक बांध बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बांध निर्माण के मुद्दे को लेकर वह विधान सभा में उठा भी चुके हैं। ऐसे में बांध निर्माण ही बाढ़ की समस्या के समाधान की दिशा में सार्थक पहल हो सकती है। प्रभावित इलाकों के दौरे के समय श्याम कृष्ण पांडेय, विजय प्रकाश, मुकुंद तिवारी, नफीस अनवर, हसीब अहमद, अनिल पांडेय समेत कई नेता उनके साथ थे। 

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नांव संचालकों की मनमानी ने और बढ़ाई परेशानी

प्रयागराज। नांव संचालकों की मनमानी ने बाढ़ पीड़ितों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई इलाकों में नांवें नहीं पहुंच रही हैं। इसके अलावा सूचना दिए जाने के बाद नांव के लिए डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार कराने की भी शिकायत है। इसकी वजह से लोग जरूरत की चिजें नहीं ला पा रहे। सलोरी के बड़े इलाके में अब तक राहत सामग्री नहीं पहुंचने की भी शिकायत है।

नांव न मिलने की शिकायत बेली, राजापुर में अधिक है। राजापुर के आशीष मिश्र, बेली कछार के लिए मकबूल का कहना था कि नांव वाले दिखाई देते हैं लेकिन उनके बुलाने पर नहीं आते। रिंकू यादव, पारस पटेल ने नांव के लिए पैसा मांगे जाने की भी शिकायत की। आजमगढ़ के शिवम तिवारी, बलिया के शिविशंकर गौड़ नामक छात्र बेली कछार के भीतरी क्षेत्र में कई दिनों से फंसे थे। वे नाविकों को लगातार आवाज लगाते रहे लेकिन वहां कोई नहीं पहुंचा। रविवार को सिविल डिफेंस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें बाहर निकाला। सिविल डिफेंस की नांव भी उधर भटककर चली गई थी। नांव न चलने की शिकायत ज्यादातरों क्षेत्रों में है।

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 बारिश से आफत: आंखों के सामने भीगने से गृहस्थी बर्बाद

रविवार सुबह हुई तेज बारिश बाढ़ पीड़ितों पर आफत बनकर बरसी। तमाम एहतियात के बाद भी छतों पर डेरा जमाए लोग बरसात से अपना घरेलू सामान नहीं बचा पाए। लोगों का अधिकतर सामान पानी में भीग करके बर्बाद हो गया। लोग परेशान हैं और बाढ़ के पानी का उतरने का इंतजार कर रहे हैं। केडब्ल्यू, चच्चा चायवाले की गली में रहने वाले बाबू के घर के भीतर कई दिनों से पानी भरने के कारण सारा बिस्तर, खाने-पीने का सामान खराब हो गया। मोहम्मद आसिफ ने कहा, सामान हटाकर थोड़ी ऊंचाई पर रखा था लेकिन वहां भी पानी भरने से फ्रिज, आलमारी, तख्त, पलंग आदि पानी में डूब गया।

लकी सिद्दकी ने कहा, बड़ी वाली टीवी, बरतन और खाने पीने का सामान नुकसान हो गया है। इलियास अहमद सिद्दकी बोले, पानी आने वाले दिन जाफरी कॉलोनी वाले मकान में थे, सुबह आने तक तो काफी पानी घर में घुस गया था, फिर तो कोई भी सामान बाहर निकालना मुमकिन नहीं था। अब पांच-छह दिनों के बाद इलेक्ट्रानिक और लकड़ी के सामान सब बर्बाद हो गए। इन्हें दोबारा इस्तेमाल में लाना बहुत मुमकिन नहीं है।

गड्ढा कॉलोनी के अकबर, मोहम्मद नौशाद ‘मामू’, अरशद प्लंबर, काटिज, नौशाद मास्टर, गुड्डूभाई, जावेद भाई, अफसर, मोहम्मद माशूक, शानू, जीनत, मदीरुन्निसां आदि ने कहा कि बाढ़ ने पूरी गृहस्थी ही चौपट कर दी। कई महीनों की कमाई बाढ़ में भीग जाने से बर्बाद हो गई। आफताब आलम बोले, पांच दिनों से बस घर का ताला देख रहे हैं। इस दौरान पानी बढ़ता गया और सारा सामान डूब गया। लाखों रुपये का नुकसान हो गया, जिसे बनाने में पता नहीं कितना वक्त लगेगा।

राजापुर के हरीश पाल, राकेश यादव ने बताया कि बारिश नहीं आफत बरसी है। तमाम जतन के बाद सिर भी नहीं पचा। सामान ऐसा भीगा कि हजारों की चपत लगी है। इसी तरह छोटा बघाड़ा की संगीता सिंह, हिम्मत यादव ने भीगने से गृहस्थी का सामान भीगकर खराब होने की बात कही है। 
द्रौपदी घाट के राजेश पाल, जगन पटेल, रामजीत यादव सड़क पर छावनी बनाकर रह रहे हैं। प्रभावित लोगों के मुताबिक गृहस्थी भीगने से अस्तव्यस्त हो गई है। बिस्तर तो भीगे ही बौछारों ने रसोईं का सामान भी गीला कर दिया। यहां जनक देवी ने बताया कि आटा भीगने से मुसीबत बढ़ी है। रविवार को घर के लोगों को खिचड़ी से काम चलाना पड़ा। कमोवेश यही हालत बाढ़ प्रभावित हर मोहल्ले की है। हजारों लोगों को बारिश से परेशान तो हुए ही उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा। 

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
...तो असली मुसीबत तो पानी उतरने के बाद होगी

बाढ़ पीड़ितों की परेशानी अभी कम होने के बजाय बढ़ने जा रही है। गंगा-यमुना का जलस्तर घटने लगा है। हालांकि पानी कम होने की गति रविवार को मंद रही, लेकिन सोमवार को पानी ने लौटने में तेजी दिखाई तो मुसीबतें बढ़ने के आसार हैं। वर्ष 2013 और वर्ष 2016 में बाढ़ की विभीषिका में फंसे लोगों के मुताबिक आठ-दस दिन की बाढ़, कम से कम महीने भर तक परेशानी का कारण बनेगी। शंकरघाट के जेएन यादव के मुताबिक अभी तीन दिन पानी उतरेगा तो सात दिन तो रास्ता साफ होने में लगेगा। सीलन भरे घरों में तुरंत रहना मुश्किल होगा। साफ-सफाई के बाद लोग घरों में रहने भी लगेंगे तो नालियों में जमा गंदगी बीमारी बांटेगी। बेली के रहमतउल्ला दर्द भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने बताया कि घर तो किसी तरह दुरुस्त कर लेंगे। मोहल्ले की गलियों और नालियों की गंदगी कैसे साफ होगी, यह सवाल पिछली बार की तरह शायद अनसुलझा ही रहेगा। बाढ़ प्रभावित मोहल्लों के रहने वाले अधिकतर लोगों की चिंता इसी से बढ़ी है कि पानी उतरने के बाद कैसे दिनचर्या पटरी पर लाएंगे। हर किसी ने कहा, अगली मुसीबत तो पानी उतरने के बाद होगी।
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गंगा-यमुना किनारे सैकड़ों खंभे डूबे,बिजली संकट बढ़ा 

प्रयागराज। गंगा -यमुना की बाढ़ से प्रभावित बस्तियों में दो उपकेंद्रों समेत सैकड़ों खंभे डूबने से तटवर्ती इलाकों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है। खासतौर से यमुना बैंक रोड उपकेंद्र में पानी आने के बाद वहां से शिफ्ट हुए फीडरों के 25 ट्रांसफारमरों को निरंतर आपूर्ति देना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। रोस्टरवाइज भी दूसरे उपकेंद्रों से इन फीडरों पर पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। उधर, थरवई केचार फीडरों पर भी बिजली आपूर्ति न के बराबर हो रही है। रविवार को बाढ़ प्रभावित तटीय बस्तियों में फिर सैकड़ों घरों की बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ी। हालांकि अफसरों का कहना है कि पानी उतरने के साथ ही फीडरों को दुरुस्त आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

गंगा किनारे 33 हजार केवी क्षमता की बख्शीबांध-दारागंज लिंक लाइन पिछले 10 दिनों से बंद है। अकेले इस इलाके में गंगा तट के 80 से अधिक खंभे डूब गए हैं। दो ट्यूबवेल समेत तीन ट्रांसफारमर भी बाढ़ के पानी में समा गए हैं। एसडीए शुभम मिश्रा का कहना है कि पानी उतरने के बाद भी कीचड़ बना रहता है। ऐसे में जब तक पेट्रोलिंग कर एक-एक खंभे को चेक नहीं कर लिया जाएगा, तबतक आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकती। इसलिए कि नमी से करंट फैलने का खतरा बना रहता है। इसी तरह यमुना बैंक रोड सबस्टेशन के तीन फीडर यमुना बैंक, यमुना चर्च फीडर और चौखंभी फीडर के 25 ट्रांसफारमरों पर कीडगंज और गऊघाट से आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने में दिक्कतें आ रही हैं। ओवरलोडिंग की वजह से बार-बार ट्रिपिंग हो रही है। सबसे अधिक दिक्कत बघाड़ा इलाके में बसी नई आबादी के बीच पैदा हुई है। वहां 15 से अधिक ट्रांसफारमर बाढ़ केचलते प्र्रभावित हुए हैं। सलोरी, चांदपुर, बाघाड़ा के अलावा गंगानगर, राजापुर, बेली, नेवादा समेत कई हिस्से की बिजली आपूर्ति बंद करा दी गई है।
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