छेत्रु अगम गढ़ु गाढ़ सुहावा/ सपनेहुं नहिं प्रतिपच्छिन्ह पावा/ सेन सकल तीरथ बर बीरा। कलुष अनीक दलन रनधीरा ...। चंवर जमुन अरु गंग तरंगा/ देखि होहिं दुख दारिद भंगा...। तीरथपति प्रयागराज के हृदय रूपी त्रिवेणी संगम की महिमा रामचरित मानस की इन चौपाइयों में संत तुलसी ने इसी तरह गाई है। इसका आशय है कि संगम तीर्थ भक्ति-ज्ञान के मजबूत और सुंदर गढ़ यानी ऐसे किला के समान है, जिसे स्वप्न में भी पाप रूपी शत्रु नहीं पा सके हैं।
संपूर्ण तीर्थ उसके श्रेष्ठ वीर सैनिक के समान हैं, जो हर डुबकी के साथ मन, वाणी और कर्म रूपी पाप की सेनाओं को कुचल डालने वाले रणधीर के रूप में संगम पर वास कर रहे हैं। इतना ही नहीं, संगम रूपी सिंहासन पर विराजमान भगवान के आसपास गंगा-यमुना श्याम और श्वेत चंवर की तरह डोलती रहती हैं, जिन्हें देखकर संतों-भक्तों की दुख और दरिद्रता नष्ट हो जाती है।
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महाशिवरात्रि पर संतों ने अपने ईष्ट देव को भी संगम में कराया स्नान।
- फोटो : अमर उजाला।
संगम जाने वाले सभी रास्तों पर रही भीड़
इन्हीं भावों को लेकर महाकुंभ के आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती की अविरल धारा में संगम पर भक्ति के कलकल निनाद की पूरी दुनिया साक्षी बनी। सारे फर्क,भेद ही नहीं तन-मन के क्लेश-विकार भी त्रिवेणी तट पर पावन डुबकी में मिट गए। संगम जाने वाले रास्तों पर भीड़ के अत्यधिक दवाब की वजह से कई रास्ते बंद करने पड़े। शाम छह बजे तक मेला प्रशासन ने 1.44 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी का दावा किया।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर चक्रमण करते घुड़सवार पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला।
किसी ने सूर्योदय का इंतजार किया न पुण्यकाल का। आधी रात त्रिवेणी के सुरम्य तट पर हर कोई प्रयाग में महाशिवरात्रि की महिमा का पुण्य बटोरने की ललक लिए डुबकी मारने लगा। रेती पर न कपड़े बदलने की ठांव थी न ठिठकने की, लेकिन पुरोहितों-संतों की शंखध्वनियां,घंट-घड़ियाल के बीच आस्था, विश्वास और भक्ति की लहरें चहुंदिश हिलोरें मारती रहीं।
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महाशिवरात्रि पर संगम में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला।
भक्ति के अनंत सागर से निकली आस्था की दिव्य आभा ने संगम से लेकर चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफ्रल में बसे महाकुंभ नगर के शिविरों से निकले रास्तों पर हर तरफ अद्भुत छटा बिखेर दी। पौ फटते ही पूरब की लाली से फूटी किरणें संगम की लहरों पर उतर कर हर तन-मन में शक्ति और उल्लास का संचार करने लगीं। पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही उन्हीं लहरों पर लोक मंगल के गीत गाए जाते रहे। मनाही के बावजूद संगम पर सौभाग्य के दीप भी जलते रहे और दुग्धाभिषेक भी होता रहा।
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संगम पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई।
- फोटो : अमर उजाला।
तिलक-त्रिपुंड लगाने वाले पुरोहितों के चेहरे की मुस्कान देखते बन रही थी। आजमगढ़ के बब्लू पांडेय अपनी पत्नी शशिबाला पांडेय के साथ बस से झूंसी में उतर कर पैदल ही भोर में संगम पहुंचे तो त्रिवेणी की धवल धारा देख उनके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी। पूछते ही चहकते हुए बोल पड़े कि संगम को निहार कर तो ऐसा लग रहा है , जैसे पूरे जीवन की थकान मिट गई हो। तीन किमी पैदल चलने के बाद भी संगम से साक्षात्कार होना उनके लिए निधि मिलने के बराबर था।
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महाशिवरात्रि पर त्रिवेणी मार्ग पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
इसी तरह मुंबई से आए अंबुज शुक्ला डुबकी लगाकर धन्य हो गए। महानगरी एक्सप्रेस से छिवकी रेलवे स्टेशन पर उतकर पैदल 12 किमी का सफर तय कर वह भोर में संगम पहुंचे थे। उनका कहना था कि यह दूरी कैसे तय हो गई, उनको पता ही नहीं चला। मां गंगा से प्रार्थना की कि उनका परिवार जहां भी रहे खुशहाल रहे। भजनानंदी ढोल-हारमोनियम के साथ समूहबद्ध होकर संगम जाने वाले रास्तों पर कीर्तन करते रहे।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
अलग-अलग भाषा, पहनावा और संस्कृतियों के रंग आपस में इस तरह उल्लसित होकर मिल रहे थे, जैसे वर्षों की चाह पूरी हो रही हो। बच्चे मम्मी-पाप के कंधे पर सवार थे तो महिलाएं अपने पति या पुत्रों का हाथ थाम कर संगम में नहाने पहुंची थीं। संगम पर पुण्य रूपी कमाई को अर्जित करने के लिए ऐसा ही समागम महाकुंभ में हर तरफ नजर आया।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला।
संगम समेत 42 स्नान घाटों पर संतों-भक्तों पर बरसे श्रद्धा के फूल
पौ फटने के बाद ही योगी आदित्यनाथ सरकार ने हेलिकॉप्टर से स्नान घाटों पर गेंदा-गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्प वर्षा शुरू कर दी। संगम समेत गंगा-यमुना के 42 घाटों पर फूलों की वर्षा देख संत-भक्त निहाल हो उठे। कोई पुष्पों की लड़ियां चुनकर माथे लगा रहा था तो कोई जयकारा लगाकर मुग्ध होता रहा।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला।
भीड़ का दबाव बढ़ा तो आला अफसरों कोे बदलनी पड़ी रणनीति
सुबह भीड़ का दबाव बढ़ने पर आला अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन के लिए संगम समेत अन्य घाटों पर उतरना पड़ा। यूपीपीसीएल के चेयरमैन आशीष गोयल, राहत आयुक्त भानुचंद्र गोस्वामी खुद संगम समेत अन्य घाटों पर भीड़ का दबाव कंम करने की रणनीति में जुट गए। कंट्रोल रूम से लगातार संगम समेत स्नान घाटों पर दबाव बढ़ने पर दूसरे घाटों पर श्रद्धालुओं को डायवर्ट करने की अपील की जाती रही।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला।
महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
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महाशिवरात्रि पर संगम पर स्नान करने के बाद अर्घ्य देती महिला श्रद्धालु।
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महाशिवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भीड़।
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