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Narendra Giri Death : आखिरी बार 12 बजकर 24 मिनट पर सीढ़ियों से उतरे थे नरेंद्र गिरि, आगंतुक कक्ष में किया था किसी का इंतजार

Mon, 27 Sep 2021 12:00 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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महंत नरेंद्र गिरि केस - फोटो : अमर उजाला
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जांच में जुटी सीबीआई को प्रारंभिक जांच के बाद मामले में गहरी साजिश के संकेत मिले हैं। महंत नरेंद्र गिरि की मौत के दिन मठ में लगे कैमरे बंद पाए गए हैं। हालांकि कक्ष से लेकर सीढ़ियों तक पर लगे सीडी प्लस के कैमरे सही पाए गए हैं। इसके अलावा आगंतुक कक्ष में नरेंद्र गिरि को किसी का इंतजार था। वह कौन था इसके बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है। वहीं, महंत की मौत की जांच कर रही सीबीआई ने रविवार को मठ में क्राइम सीन दोहराया। इसके साथ सीबीआई टीम के कुछ सदस्यों ने लेटे हनुमान मंदिर पहुंचकर वहां प्रशासन देखने वालों से पूछताछ की। सीबीआई मंदिर प्रांगण में स्थित ऑफिस भी गई। नरेंद्र गिरी और आनंद गिरि जिन कमरों में बैठते थे, वहां भी सीबीआई पहुंची। टीम ने मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों से पूछताछ की। वह जगह भी देखी जहां संदीप तिवारी और उसके भाई दुकान चलाते थे।
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बाघंबरी गद्दी मठ में छानबीन करने पहुंची सीबीआई टीम। - फोटो : प्रयागराज
आखिरी बार 12:24 बजे सीढ़ियों से उतरे से महंत नरेंद्र गिरि
प्रयागराज के बाघंबरी मठ की पहली मंजिल पर महंत के कक्ष से लेकर सीढ़ियों तक पर लगे सीडी प्लस के कैमरे सही पाए गए हैं। इन कैमरों में उस दिन महंत के अपने निजी कक्ष से बाहर निकलने की फुटेज मौजूद है।
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मठ बाघंबरी गद्दी - फोटो : प्रयागराज
घटना वाले दिन महंत नरेंद्र गिरि दिन के 12:24 बजे अपने कक्ष से निकलकर सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए दिखाए दे रहे हैं। इसके बाद वह किधर गए और किससे, कहां मिले, बाहरे के कैमरे बंद होने की वजह से यह सब रहस्य बन गया है।

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महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले की जांच करने मठ बाघंबरी गद्दी पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : प्रयागराज
आगंतुक कक्ष में किसी का था उन्हें इंतजार
मठ के मुंशी सर्वेश तिवारी उर्फ बब्लू का कहना है कि उस दिन नरेंद्र गिरि महाराज भोजन के बाद अपने ऊपर वाले कक्ष में गए ही नहीं थे। दिन के 11:30 बजे भोजन के लिए मठ की घंटी बजी, इसके बाद वह नीचे आए थे।
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महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले की जांच करने मठ बाघंबरी गद्दी पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : प्रयागराज
भोजन के बाद वह आगंतुक कक्ष में किसी मुलाकाती का इंतजार करने चले गए थे। तब उन्होंने वहां मौजूद सेवादारों और चाय-नाश्ते के इंतजाम में रहने वाले कर्मियों को यह जानकारी दी थी, कि कोई उनसे मिलने के लिए आने वाला है। वह कौन था? कब आया और कैसे महंत की जान चली गई, यह सारे सवाल उन्हीं कर्मियों, सेवादारों और विद्यार्थियों के बीच रहस्य बनकर रह गए हैं। 

 
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नरेंद्र गिरि(फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
फोन भी मिला था बंद
अलबत्ता किसी सेवादार ने जब चाय देने के लिए कई बार दरवाजा खुलवाने की कोशिश की और फोन करने पर उनका मोबाइल नहीं उठा, तब दरवाजा तोड़कर मठ के शिष्य भीतर घुसे। यहां भूतल पर बने उस कक्ष का दरवाजा तोड़कर भीतर घुसने वाले शिष्यों की बात कितनी सच है, यह भी गहरी जांच का हिस्सा हो सकता है। इसलिए कि जिस कक्ष में महंत का शव मिला, उससे संबद्ध बाथरूम का दरवाजा भीतर से लिंक होने के साथ ही बाहर भी खुलता है। खुफिया विभाग ने घटना के बाद उस कक्ष के चोर दरवाजे की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी थी।

 
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शव ले जाती एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
इतना ही नहीं, महंत के पार्थिव शरीर को जब समाधि दी गई, तब शव के साथ नमक की बोरियां पहले पाटी गईं। इसके पीछे कुछ संतों ने शास्त्रोक्त पद्धति का हवाला दिया था, ताकि हड्डियां भी गल जाएं और सबकुछ परमात्मा में विलीन हो जाए।
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नरेंद्र गिरि का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अब, कहा जा रहा है कि नमक की बोरियां डाले जाने से शव जल्द ही गलकर नष्ट हो सकता है। ऐसे में सीबीआई अगर साक्ष्य के तौर पर चोट के निशान या अन्य जख्मों, फंदे के चिह्नों को देखने के लिए समाधि से शव बाहर निकलवाना भी चाहेगी तो क्या और कितना हासिल हो सकेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। 
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