संगम के सुरम्य तट पर जग विख्यात रामकथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने शुक्रवार को प्रेम, अपमान, सत्य और साधुता की व्याख्या कर देश-दुनिया से आए मानस प्रेमियों में आत्म चेतना का संचार कर दिया। उन्होंने रामनाम महामंत्रों को प्रेम रूपी अक्षयवट का मूल बताया और उसके तने की तुलना धीरता और वीरता से की। संदेश दिया कि जिसमें धैर्य नहीं होगा, वह प्रेम नहीं कर सकता।