अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सोमवार को संदिग्ध हालत में फांसी पर लटके मिले। जिसके बाद नए-नए खुलासे हो रहे हैं। मंगलवार को मीडिया में नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट भी जारी कर दिया गया। इसमें नरेंद्र गिरि ने अपने शिष्य आनंद गिरि पर आरोप लगाए हैं। आपको बता दें कि महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत मामले में दर्ज एफआईआर में भी आनंद गिरि पर संगीन आरोप लगाए गए हैं। मुकदमा वादी व मठ के पुजारी अमर गिरि पवन महाराज की ओर से जार्जटाउन थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि महंत स्वयं कहा करते थे कि आनंद गिरि उन्हें बहुत परेशान करता रहता है। तहरीर में कहा गया है कि, 20 सितंबर को 12.30 बजे महंत मठ के कक्ष में भोजन करने के बाद रोज की तरह विश्राम करने चले गए। रोज दोपहर तीन बजे उनका चाय पीने का समय होता था लेकिन उस दिन उन्होंने पहले ही मना कर दिया था।
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नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
साथ ही यह भी कहा था कि चाय पीना होगा तो वह स्वयं बता देंगे। शाम पांच बजे तक कक्ष से बाहर नहीं आने पर उनके पास फोन किया गया, लेकिन नंबर बंद मिला।
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नरेंद्र गिरि का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दरवाजा खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। इस पर शिष्य सुमित तिवारी, सर्वेश कुमार द्विवेदी और धनंजय आदि ने धक्का देकर दरवाजा खोला तो महंत पंखे में फंसाए गए फंदे पर लटके मिले।
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बाघंबरी मठ में जुटी भीड़ और पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
जीवन की संभावना को देखते हुए शिष्यों ने रस्सी काटकर शव को नीचे उतारा लेकिन तब तक उनका निधन हो चुका था। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि महंत पिछले कुछ महीनों से आनंद गिरि को लेकर परेशान रहा करते थे। यह बात वह कभी-कभी खुद कहा करते थे कि आनंद गिरि उन्हें परेशान करता रहता है।
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बाघंबरी मठ परिसर में मौजूद पुलिस और अन्य लोग
- फोटो : अमर उजाला
दी गई सूचना, किस बात की यह स्पष्ट नहीं
वादी की ओर से दी गई तहरीर में सबसे अंत में लिखा है कि यह सूचना उनकी ओर से थाना जार्जटाउन व आईजी प्रयागराज को दी गई। हालांकि तहरीर पढ़ने से यह स्पष्ट नहीं है कि यहां किस सूचना के संबंध में बात हो रही है। दरअसल इस लाइन से ठीक पहले महंत को आनंद गिरि की ओर से परेशान करने की बात लिखी है।
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महंत का शव ले जाता वाहन
- फोटो : अमर उजाला
जबकि इससे पहले घटना का जिक्र यानी महंत के फंदे पर लटके मिलने की बात लिखी है। अब सवाल यह है कि सूचना देने का संबंध आनंद गिरि की ओर से महंत को परेशान करने से था या फिर यहां घटना की सूचना की बात हो रही है।
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संत आनंद गिरि
- फोटो : अमर उजाला
पुजारी व उसके बेटे का नाम न होने पर उठे सवाल
तहरीर में बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उसके बेटे संदीप का नाम न होने पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। दरअसल महंत का कथित सुसाइड नोट मौके से ही बरामद कर लिया गया था।
इसके बाद यह भी बात सामने आ ही गई थी कि महंत के कथित सुसाइड नोट में पुजारी व उसके बेटे का भी नाम है। इसके बावजूद आठ घंटे बाद भी जब रिपोर्ट थाने में दी गई तो उसमें दोनों का नाम क्यों नहीं शामिल किया गया।