वसंत पंचमी पर तीसरे अमृत स्नान के दौरान संगम तीरे सनातन धर्म का विराट स्वरूप नजर आया। सनातन परंपरा के सभी 13 अखाड़ों ने राजसी ठाठ-बाट के साथ अमृत स्नान किया। संगम नगरी महादेव और सियाराम के जयकारों से गूंजती रही।
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संगम तट पर स्नान के दौरान करतब दिखाते साधु
- फोटो : अमर उजाला
संगम घाट का दृश्य किसी स्वप्नलोक जैसा दिख रहा था। चारों ओर श्रद्धालुओं की अपार भीड़, माइक पर गूंजते मंत्रोच्चार, दूर-दूर तक संत-महात्मा दिख रहे थे। पैदल आ रहे लोगों की भीड़ धीरे-धीरे प्रशासन की व्यवस्था पर आगे बढ़ रही थी। संगम के एक किनारे पर अखाड़ों की भव्य रथ यात्रा और आस्था की अद्भुत लहरें मानो इस पवित्र स्थल को दिव्यता से भर रही थीं।
भोर की किरण के पहले ही श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की ओर उमड़ पड़े। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाने के लिए भक्तों में उत्साह देखते ही बन रहा था।
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संगम घाट पर अमृत स्नान के दौरान श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा के संत-साधु करतब दिखाते हुए
- फोटो : संवाद
लोग हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे थे, हर हर गंगे और जय गंगा मैया के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। स्नान के बाद लोग पूजा-अर्चना कर रहे थे, पंडितगण भी वैदिक मंत्रोच्चार में लीन थे और चारों ओर भक्ति और अध्यात्म की अद्भुत छटा थी।
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अमृत स्नान के दौरान श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के संत-साधु घोड़े पर सवार होकर करतब दिखाते हुए
- फोटो : संवाद
अखाड़ों का दृश्य भी देखने योग्य था। नागा संन्यासियों का भव्य जुलूस, गेरुआ वस्त्रधारी संतों की टोली, माथे पर भस्म लगाए साधु-संत अपने-अपने ध्वज थामे शोभायात्रा निकाल रहे थे। कोई ध्यान में मग्न था तो कोई अपने चमत्कारी योगबल का प्रदर्शन कर रहा था।
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वसंत पंचमी पर अमृत स्नना करते साधू संत
- फोटो : संवाद
श्रद्धालु दूर-दूर से आकर इन संतों का आशीर्वाद ले रहे थे। कुछ लोग दौड़कर चरणरज माथे पर लगा रहे थे। केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने श्रद्धालुओं के लिए आने-जाने के लिए व्यवस्था संभाल रखी थी। हर पांच कदम पर जवान खड़ा था, जो लोगों को आगे बढ़ने का इशारा कर रहा था। श्रद्धालु भी केंद्रीय बल के होते सुरक्षा महसूस करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
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वसंत पंचमी पर अमृत स्नना करते साधू संत
- फोटो : संवाद
आखिरी अमृत स्नान पर दिखा सनातन का विराट रूप
वसंत पंचमी पर तीसरे अमृत स्नान के दौरान संगम तीरे सनातन धर्म का विराट स्वरूप नजर आया। सनातन परंपरा के सभी 13 अखाड़ों ने राजसी ठाठ-बाट के साथ अमृत स्नान किया। संगम नगरी महादेव और सियाराम के जयकारों से गूंजती रही। हजारों की संख्या में नागा संन्यासी त्रिशूल, गदा और तलवार लहराते हुए स्नान के लिए पहुंचे। आखिरी अमृत स्नान के साथ अखाड़ों का प्रयाग प्रवास सोमवार को पूर्ण हो गया।
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वसंत पंचमी स्नान पर्व पर बुलट से सफर करते इंटरनेशनल बाबा
- फोटो : शिव त्रिपाठी
शैव अखाड़े के संन्यासी अगले चरण में काशी प्रवास के लिए यहां से रवाना होने लगे हैं। वहीं, अनि और उदासीन अखाड़े के संत अन्य धार्मिक संस्कार पूर्ण करके अपने-अपने स्थान को लौटेंगे। अमृत स्नान के लिए सबसे पहले तड़के करीब चार बजे छावनी से श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा और श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा निकले। विधि-विधान से छावनी में ईष्ट देव की पूजा-अर्चना की गई।
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स्नान करते साधु-संत
- फोटो : PTI
नागा संन्यासियों ने अजब-गजब करतब दिखाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया
इसके बाद हजारों नागा संन्यासियों ने शस्त्र प्रदर्शन किया। अखाड़े के दिव्य भाल सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश को नागा संन्यासियों ने कंधों पर थामा। उनके पीछे ईष्ट देव भगवान कपिल की पालकी चली। आचार्य महामंडलेश्वर के पीछे नागा संन्यासी तलवार, गदा और त्रिशूल लहराते हुए बढ़े। दर्जनों महामंडलेश्वर भी शिष्यों के संग रथों पर सवार होकर निकले। अस्त्र-शस्त्र के साथ दौड़ लगाते नागाओं ने संगम में डुबकी लगाई। संगम घाट पर ही नागा संन्यासियों ने अजब-गजब करतब दिखाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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स्नान के लिए जाते साधु-संत
- फोटो : PTI
श्री निरंजनी अखाड़ा व आनंद अखाड़ा भी पुलिस की सुरक्षा के बीच तय समय पर छावनी से निकले। अखाड़े की अगुवाई निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि और आनंद पीठाधीश्वर बालकानंद गिरि ने की। अखाड़े के साथ अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं श्री महंत रवींद्र पुरी, सचिव महंत रामरतन गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरी, महामंडलेश्वर निरंजन ज्योति, श्री महंत शंकरानंद सरस्वती समेत सौ से अधिक महामंडलेश्वरों और श्री महंतों ने हजारों शिष्यों के साथ स्नान किया।
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स्नान के लिए जाते नागा साधु-संत
- फोटो : PTI
तीसरे क्रम में जूना अखाड़े के साथ आवाहन और अग्नि अखाड़ा के संन्यासी स्नान के लिए निकले। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि की अगुवाई में हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए भारी संख्या में नागा जुलूस में शामिल हुए। पूरे शरीर पर भस्म रमाए नागा संन्यासी अलग कौतूहल पैदा कर रहे थे। पूरे अखाड़ा मार्ग पर करतब दिखाते नागा संन्यासी संगम तक पहुंचे।
सुबह करीब नौ बजे तक सभी शैव अखाड़े छावनी में लौट गए
अखाड़ों के कोतवालों से इशारा मिलते ही नागा संन्यासियों ने हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए संगम की ओर दौड़ लगा दी। स्वामी अवधेशानंद ने षोडशोपचार पूजन किया। स्नान के पश्चात नागा संन्यासियों ने शरीर पर भस्म रमाई। पूरे रास्ते फूलों की बारिश होती रही। उधर, सुबह करीब नौ बजे तक सभी शैव अखाड़े छावनी में लौट गए। छावनी में लौटने के साथ ही संन्यासियों ने वापसी की तैयारी शुरू कर दी।