संगम की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी में चलाचली की बेला है। जप, तप, संयम के संगम के साथ तकरीबन माह भर का कल्पवास मंगलवार को माघी पूर्णिमा पर डुबकी के साथ पूरा होगा। फिर कल्पवासी शिविरों से अपने-अपने घरों के लिए विदा हो जाएंगे। एक समय भोजन, दो या तीन बार गंगा स्नान और भूमि पर शयन जैसे अनुशासन से इतर भी कल्पवासी फिलहाल सभी संकल्प पूरेकरने में जुटे हैं। विदा की बेला में शिविरों में अखंड रामायण, सुंदरकांड पाठ, श्रीसत्यनारायण कथा जैसे अनुष्ठान जारी हैं। शिविर की परंपरा पूरी करते हुए तीर्थपुरोहित को सज्जादान के साथ ही शिविर-शिविर भंडारा भी जारी है। अचला सप्तमी से आरंभ अनुष्ठान, भंडारा और सज्जादान का क्रम माघी पूर्णिमा तक जारी रहेगा।