फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएए प्रदर्शनकारी से वसूली के नोटिस पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Sat, 15 Feb 2020 05:47 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
1 of 3
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएए प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एडीएम कानपुर सिटी द्वारा जारी नोटिस के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस पर अमल सुप्रीमकोर्ट में लंबित मामले में होने वाले आदेश पर निर्भर करेगा। 

कानपुर के मोहम्मद फैजान की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति एसएस शमशेर की सुनवाई कर रही है । मोहम्मद फैजान ने चार जनवरी 2020 को एडीएम सिटी द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी है।

इस नोटिस में उसे सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कहा गया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए 2009 में गाइड लाइन तय की गई है। गाइडलाइन के तहत लोक संपत्ति के नुकसान का आंकलन करने का अधिकार हाईकोर्ट के कार्यरत या सेवानिवृत्त जज अथवा कार्यरत या सेवानिवृत्त जिला जज को है।
विज्ञापन

2 of 3
दिल्ली हाईकोर्ट
प्रदेश सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नियमावली बनाई है, जिसे सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई है। एडीएम सिटी ने इसी नियमावली के तहत नोटिस जारी किया है जबकि उनको ऐसा करने का अधिकार नहीं है। सरकारी वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतरिम राहत नहीं दी है लिहाजा नोटिस पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है।

 कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में विचारणीय प्रकरण एक जनहित याचिका है। जबकि यहां पर याची नेे नोटिस जारी करने वाले प्राधिकारी की अधिकारिता को चुनौती दी है। कोर्ट ने चार जनवरी 2020 को जारी नोटिस के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से एक माह में जवाब मांगा है। याचिका पर 20 अप्रैल को सुनवाई होगी। कोर्ट ने कहा कि याची सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को मानने के लिए बाध्य होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीमकोर्ट की गाइड लाइन
1- जब कभी भी भीड़ या लोगों के समूह के द्वारा सार्वजनिक और प्राइवेट संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, संबंधित राज्य का हाईकोर्ट मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर उसकी जांच के लिए कमेटी गठित कर नुकसान का आंकलन करेगा और मुआवजा दिलवाना सुनिश्चित करेगा।
2- जहां एक से अधिक राज्यों का मामला होगा वहां सुप्रीमकोर्ट सीधे संज्ञान लेगा।
3- हर मामले में हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट एक हाईकोर्ट के या  सिटिंग या रिटायर्ड जज या जिला जज की नियुक्ति क्लेम कमिश्नर के रूप में करेगा जो नुकसान का आंकलन करने के साथ जिम्मेदारी की जांच करेंगे।
4- क्लेम कमिश्नर का सहयोग करने के लिए एक सलाहकार की नियुक्ति की जाएगी।
5- क्लेम कमिश्नर और सलाहकार हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट से निर्देश प्राप्त कर लोक प्राधिकारियों और जनता से वीडियो रिकार्डिंग लेकर नुकसान करने वालों की पहचान करेंगे।
6- एक बार सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान और ऐसा करने वालों के बीच गठजोड़ साबित हो जाता है तो पूरी जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू किया जाएगा।
7- घटना को अंजाम देने वालों और उस कार्यक्र म का आयोजन करने वाले जिनकी वजह से घटना हुई है दोनों पूरी जिम्मेदारी तय की जाएगी। किसके हिस्से में कितनी जिम्मेदारी आएगी यह हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट तय करेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें