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गंगा-यमुना में उफान, प्रयागराज शहर पर बाढ़ का खतरा

Sat, 14 Sep 2019 12:46 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
मध्य प्रदेश में भारी बारिश और माताटीला व बरियारपुर बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के चलते शहर पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पिछले दो दिनों से गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इस बीच शुक्रवार सुबह नौ बजे माताटीला बांध से 4.14 लाख क्यूसेक और बरियारपुर बांध से 1.72 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ चौकियों पर राहत शिविरों के प्रबंध शुरू कर दिए हैं। वहीं, कछारी इलाकों दारागंज, सलोरी, बघाड़ा, बेली में पानी घुसने से खलबली मच गई है।

केन और बेतवा में उफान की वजह से यमुना में जल दबाव लगातार बढ़ रहा है। शाम को गंगा के जलस्तर में तीन और यमुना में चार सेंमी प्रतिघंटे की रफ्तार से वृद्धि होती रही। इससे कछार के कई इलाके जलमग्न हो गए। सिंचाई बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से जारी बुलेटिन के अनुसार रात दस बजे गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 82.75 मीटर, छतनाग में 82.07 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 82.66 मीटर रिकार्ड किया गया। देर शाम दारागंज जाने वाली रामघाट दशाश्वमेध घाट की सड़क भी डूब गई। श्मशान घाट पर पानी आ गया। सैकड़ों की तादात में तीर्थपुरोहितों की चौकियां और पूजा-प्रसाद बेचने वाले बांध पर पहुंच गए। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के एक्सईएन बृजेश सिंह के मुताबिक माताटीला व बरियारपुर से लगातार पानी छोड़े जाने के साथ ही हमीरपुर में यमुना के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। इससे आने वाले 24 घंटे के दौरान यमुना के जलस्तर में तेजी का रुख बना रहेगा। 

जलस्तर
82.75 मीटर पर फाफामऊ में गंगा
82.66 मीटर पर नैनी में यमुना

आज का डिस्चार्ज
4.14 लाख क्यूसेक पानी माताटीला बांध1.72 लाख क्यूसेक पानी बरियारपुर बांध
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flood in Prayagraj - फोटो : प्रयागराज
लगातार बारिश की वजह से ग्रामीण इलाकों में कई कच्चे मकान गिर गए। इसमें दबने से एक महिला की मौत हो गई। इसके अलावा कई परिवार बेघर हो गए हैं। उन्हें आशियाना तथा भोजन के लिए प्रशासन की मदद का इंतजार है। बीती रात हंडिया के औरा गांव में छप्पर और दलान गिरने से इनरावती देवी नामक महिला की मौत हो गई। साथ में तीन बच्चे भी सो रहे थे और बाल-बाल बच गए। राजेश की पत्नी इनरावती देवी तीन बच्चों मिथिलेश सात वर्ष, विपिन छह और एक वर्षीय देवेन्द्र के साथ छप्पर में सो रही थी।

बड़ा लड़का धीरज बगल के कमरे में था। पति भदोही स्थित गोशाला में काम करने गया था। रात्रि में छप्पर गिरने की आवाज आई तो आस-पास के लोग राजेश के घर पर जमा हुए। ग्रामीणों ने तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला लेकिन इनरावती दीवार से दबी थी। इसकी वजह से तत्काल नहीं निकाला जा सका। धीरे-धीरे  गांव के अन्य लोग भी एकत्रित हो गए तथा इनरावती को निकाला गया लेकिन तब तक मौत हो चुकी थी। एसडीएम समेत अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मेजा के टुड़िहार गांव में निजाम अहमद का कच्चा घर ढह गया। उसमें सामान भी नष्ट हो गए। इसकी वजह से पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने के लिए विवश है। निजाम ने एसडीएम से मदद की मांग की है। मांडा के बरहाकला गांव में भी छविनाथ आदिवासी का कच्चा मकान गिर गया। गृहस्थी का सारा सामान भी उसमें दब गया।
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flood in prayagraj - फोटो : प्रयागराज
प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए जिले में 102 मेडिकल टीमें तैनात की हैं। इनमें 23 शहर और 81 ग्रामीण क्षेत्रों में लगाई गई हैं। सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को आपदा प्रबंधन के लिए अलर्ट कर अतिरिक्त दवाएं मुहैया कराई गई हैं। सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी के मुताबिक जिलाधिकारी कार्यालय में तीन और उनके कार्यालय में दो विशेष टीमों को तैनात किया गया है। इनमें पालीवार डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को लगाया गया है। उन्होंने बताया कि सभी टीमों को ओआरएस, एंटी फंगल क्रीम, दर्द निवारक समेत अन्य दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जिला संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. एएन मिश्रा को प्रभावित इलाकों की रिपोर्ट लेकर टीम के साथ भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएमओ को एंटी लार्वा छिड़काव तेज कराने को कहा गया है। 

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lete hanuman mandir, prayagraj - फोटो : प्रयागराज
खतरे के निशान की ओर बढ़ता गंगा-यमुना का जलस्तर शहरियों की चिंता का कारण बन गया है। कछारी इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। द्रौपदी घाट, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा में बाढ़ से घिरे दर्जनों घरों में पानी घुस गया। कछारी इलाकों में रहने वाली करीब दो लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में है। हर घंटे बढ़ रहे पानी से लोग दहशत में हैं। द्रौपदी घाट पर शाम 5.30 बजे गंगा का पानी देख रहीं गुड्डी खासी चिंतित थीं। वहां बाढ़ का पानी देखने को जुटे लोगों से बोलीं रात में पानी चढ़ा तो सामान समेटना पड़ेगा। ओम प्रकाश ने बताया कि नदी किनारे बने नौ घर बाढ़ के पानी से घिरे हैं। आदमी ही नहीं मवेशी भी फंसे हैं। लोगों ने सामान समेटकर दूसरी जगह ठिकाना बना लिया है। वहीं घाट किनारे बस्ती में रहने वाले एहतियातन सामान समेटने की तैयारी दिखे।
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lete hanuman mandir, prayagraj - फोटो : प्रयागराज
स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ का पानी मौजसरैयां कब्रिस्तान तक पहुंचा तो समझिए खतरा बढ़ा है। बातचीत में मालूम चला कि रात भर जागकर लोग बारी-बारी से बढ़ते पानी को देखने का काम कर रहे हैं। आशंका जताई कि नदी का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो घाट किनारे बस्ती के हर घर में बाढ़ का पानी पहुंच जाएगा। घाट किनारे ही लोग हनुमान मंदिर में स्थापित मूर्ति के डूबने को बाढ़ का खतरा बिंदु मानते हैं, जो दो मीटर जलस्तर और बढ़ने के बाद ही संभव हो पाएगा।
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द्रौपदी घाट में बाढ़ से घिरे लोगों तक शुक्रवार को मदद नहीं पहुंची। कोई उनका हाल पूछने तक नहीं आया। एक घर के बाहर बंधे मवेशी दूसरे स्थान पर भेजने की तैयारी में लगे सरवन ने बताया कि जो घर बाढ़ के पानी से घिरे हैं, वहां तक पहुंच पाना मुश्किल है। हर तरफ पानी है, बिना नाव के वहां जाना संभव नहीं है। प्रभावित लोगों को उम्मीद है कि उन तक प्रशासनिक मदद पहुंचेगी। 
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flood - फोटो : प्रयागराज
शहर के कछारी इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से प्रभावित मोहल्लों में रहने वालों की नींद उड़ी है। द्रौपदी घाट, छोटा बघाड़ा, सलोरी, शंकरघाट, बेली कछार, शिवकुटी, मेंहदौरी, रसूलाबाद, राजापुर, नेवादा, बक्शीमोढ़ा, गौसनगर, सदियापुर, करेलाबाग समेत अन्य मोहल्लों में रहने वाले लाखों पर बाढ़ से घिरे हैं। कहीं घरों में पानी घुसा है तो कहीं हर घंटे बढ़ रहा जलस्तर खतरे की आशंका को बढ़ा रहा है। 

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flood in prayagraj - फोटो : प्रयागराज
सलोरी के कमलेश शर्मा, हरिकिशन, छोटा बघाड़ा के शिवराम, राजेश, विजय बहादुर, नेवादा की रामसिया पांडेय के घरों में बाढ़ का पानी पहुंचा। खतरा भांप कर सभी सामान हटा चुके थे, अब सुरक्षित स्थानों पर परिचितों, रिश्तेदारों के घरों में शरणार्थी बने हैं। इन मोहल्लों के दर्जनों घरों के चारों तरफ पानी ही पानी है। प्रभावित मोहल्लों में नदी किनारे मकान बनाकर रहने वालों ने बाढ़ का पानी और खतरा भांपने को कहीं बांस तो कहीं लोहे की पाइप लगाया है। लहरों की उछाल प्रभावित इलाकों में लोगों की धड़कन बढ़ा रही है। 

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flood in prayagraj - फोटो : प्रयागराज
नदियों में नावें प्रतिबंधित
कछारी इलाके में बसे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। गंगा और यमुना नदी का जल स्तर एक बार फिर खतरे की निशान के करीब पहुंच गया है। यह स्थिति अभी आगे भी बनी रहेगी। इसे देखते हुए सभी चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की अपील की गई है। इसके अलावा तेज बहाव को देखते हुए नदियों में नांव का संचालन प्रतिबंधित कर दिया गया है। अफसराें का कहना है कि फिलहाल एक सप्ताह तक इस तरह की स्थिति बने रहने की आशंका है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सदर, फूलपुर, चाका, करछना तहसील के अंतर्गत नदियों के किनारे बनाई गईं चौकियों को हाई एलर्ट पर रखा गया है। इनमें सफाई, पानी, बिजली, राशन आदि की व्यवस्था के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है। मेडिकल कैंप लगाने का भी निर्देश दिया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व मार्तंड प्रताप सिंह आदि अफसरों ने बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया। उनका कहना है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है लेकिन खतरा को देखते हुए जरूरी कदम उठाए गए हैं। बदरा-सोनौटी में सड़क पर पानी आ जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। वहां नावें चलाई जाएंगी। पानी बढ़ने के बाद अन्य स्थानों पर भी नावें चलाई जाएंगी। नावें संगम से मंगाई जाएंगी। एसडीएम सदर गौरव रंजन का कहना है कि  अफसर क्षेत्र में हैं। लेखपाल लोगों से संपर्क में हैं। अफसरों तथा लेखपाल के नंबर लोगों को भी दिए गए हैं।
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flood in prayagraj - फोटो : प्रयागराज
गंगा और यमुना में पानी के तेज रफ्तार को देखते हुए स्नान पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन की ओर से इस बाबत एलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा घाटों पर पुलिस तथा गोताखोरों की भी ड्यूटी लगाई गई है। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि स्नानार्थियों को तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने तथा स्नान से रोकें। एनडीआरएफ, जल पुलिस की टीम संगम तट पर कैंप कर रही हैं। उन्हें 24 घंटे एलर्ट रहने के लिए कहा गया है। इसके अलावा गोताखोरों, नागरिक सुरक्षा कोर के सदस्यों को भी सतर्क कर दिया गया है।
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