लगातार जलस्तर बढ़ने से शनिवार की शाम गंगा-यमुना ने विकराल रूप धारण कर लिया। दोनों नदियां चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गई हैं। तेजी से बढ़ते जलस्तर के चलते बाढ़ के पानी ने निचले इलाकों में बने सैकड़ों घरों को चपेट में ले लिया। इस बीच बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे लोगों को नावों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। बाढ़ आपदा से निबटने के लिए प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। शाम छह बजे गंगा-यमुना चेतावनी बिंदु से 39 सेमी और खतरे के निशान से सिर्फ 1.39मीटर नीचे बह रही थीं।
सिंचाई बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम के अनुसार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 83.34 मीटर, छतनाग में 82.58 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 83.28 मीटर रिकार्ड किया गया। गंगा में 2.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से जल दबाव और बढ़ने के संकेत मिले हैं। इस दिन गंगा में हरिद्वार से 44,820 क्यूसेक, नरोरा में 42,381 क्यूसेक और कानपुर बैराज से 1.60 लाख, 292 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोपहर बाद ही नागवासुकी-बक्शीबांध मार्ग डूब गया। देर शाम दारागंज जाने वाली रामघाट, दशाश्वमेध घाट की सड़क से ऊपर पानी आ गया।
श्मशान घाट डूबने से अंतिम संस्कार में भी दिक्कतें आने लगी हैं। तीर्थपुरोहितों की चौकियां और पूजा-प्रसाद बेचने वाले बांध पर पहुंच गए। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अभियंताओं के मुताबिक हमीरपुर में यमुना के जल स्तर में तेजी बनी हुई है। इससे यहां भी जलस्तर बढ़ने की आशंका है। फिलहाल इससे प्रयागराज में गंगा-यमुना के जल स्तर में और तेजी के संकेत मिले हैं। उधर, गंगा-यमुना में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ राहत चौकियों पर इंतजाम शुरू कर दिए हैं। एसडीए व तहसीलदारों को प्रभावित इलाकों पर नजर रखने और लोगों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।