कृषि कानूनों का वापस लेना किसानों की जीत
केंद्र सरकार की ओर से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने को कांग्रेस सहित छोटी राजनीतिक पार्टियों, संगठनों ने खुशी जताते हुए इसे किसानों की जीत बताया। इसके साथ ही इसे देर से वापस लेने पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। कहा कि केंद्र सरकार ने सात सौ किसानों की शहादत के बाद यह कदम उठाया है।
कांग्रेसियों ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा देश के किसानों और कांग्रेस की जीत है। सुभाष चौराहे पर सभा कर कहा कि आंदोलनरत किसानों के संघर्ष का नतीजा है। पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश और अन्य चार राज्यों के चुनाव में हार दिखने लगी तो यह घोषणा की गई है। कांग्रेसियों ने संसद में कानून को लेकर विशेष सत्र बुलाया जाने की मांग की। कांग्रेसियों ने किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। कांग्रेसजनों ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले सात सौ शहीद किसानों के प्रति शोक व्यक्त किया। प्रदीप मिश्रा अंशुमन, राघवेंद्र प्रताप सिंह, किशोर वार्ष्णेय, हरिकेश त्रिपाठी, विजय मिश्रा, वसीम अंसारी, विनय दुबे, जावेद उर्फी, सुधीर दीक्षित, अल्पना निषाद, अजय श्रीवास्तव, परवेज सिद्दीकी, अरशद अली आदि मौजूद रहे।
उधर, सर्वदलीय पार्षद पूर्व पार्षद संघर्ष समिति के सदस्यों ने भी खुशी जताई। संयोजक पूर्व वरिष्ठ पार्षद शिवसेवक सिंह ने कहा कि किसानों और मजदूरों को चंद पूंजीपतियों की गुलामी से बचाने के लिए लड़ने वालों की जीत है। पूर्व वरिष्ठ पार्षद शिवसेवक सिंह, वरिष्ठ पार्षद आनंद घिल्डियाल, अशोक सिंह, कमलेश सिंह, सुशील कुमार आदि मौजूद रहे। आम आदमी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी बिल की वापसी को किसानों की जती जताई। वीरेंद्र कुशवाहा, ज्योति प्रकाश चौबे, अफसर महमूद, मो. उस्मान, मो. शाह आलम, अरशद अली आदि मौजूद रहे।