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कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा वेरियंट रहा घातक, जांच में नहीं मिला डेल्टा प्लस, जिले में पांच नए कोरोना पॉजिटिव, चार हुए स्वस्थ

Wed, 04 Aug 2021 12:12 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • लखनऊ, दिल्ली भेजे गए नमूनों की नहीं आई रिपोर्ट, बीएचयू भेजे गए सात नमूनों में चार में डेल्टा वेरियंट की पुष्टि 
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कोरोना डेल्टा प्लस वैरिएंट - फोटो : Amar Ujala
कोरोना की दूसरी लहर में मार्च से अब तक 50 फीसदी संक्रमितों की गंभीर स्थिति के लिए डेल्टा वेरियंट को जिम्मेदार माना जा रहा है। जींस सीकवेंसिंग के लिए भेजे गए नमूनों में डेल्टा प्लस वेरियंट नहीं पाया गया। यह राहत की बात है, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर साफ हो गया है कि देश के अन्य प्रदेशों की तरह यहां भी अल्फा के साथ डेल्टा वेरियंट घातक स्वरूप में हावी रहा। 

शासन के निर्देश पर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी की कोबास लैब से जींस (जीनोम) सिक्वेंसिंग के लिए पहली बार जून में 15 संक्रमितों के नमूने कोडिंग के साथ आईईजीआईबी दिल्ली को भेजे गए। इससे पहले मई महीने में केजीएमयू को भी इतने ही नमूने भेजे गए थे। मंशा थी कि डेल्टा प्लस वेरियंट मिले तो उपचार और रोकथाम की व्यवस्था की जा सके। दो बार भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट यहां नहीं मिली। 

शासन ने जून के अंतिम सप्ताह जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए प्रयागराज से कोरोना संक्रमितों के नमूने आईएमएस बीएचयू भेजने के निर्देश दिए। प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक जून में चिह्नित कोरोना संक्रमितों के सात नमूने जुलाई के पहले सप्ताह में बीएचयू भेजे गए। जिसकी रिपोर्ट 30 जुलाई को मिली है। जिसमें बीएचयू भेजे गए सात में चार नमूनों में डेल्टा वेरियंट ही मिला। 
 
 

डेल्टा प्लस से जिला बचा, अब मरीज भी हुए कम

जीनोम सिक्वेंसिंग को भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट से से साफ है कोरोना की दूसरी लहर में करीब 55 फीसदी लोग डेल्टा वेरियंट के प्रभाव से गंभीर हालत में पहुंचे। वह मरीज कौन थे, अब किस स्थिति में हैं, इस बारे में लैब कर्मियों को ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग को भी खबर नहीं है। सभी नमूने कोडिंग कर भेजे गए थे, जिसकी रिपोर्ट में डेल्टा प्लस वेरियंट की पुष्टि नहीं हुई। जून महीने में संक्रमण की दर और गंभीर मरीजों की संख्या तो कम थी, पर वायरस के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस की आशंका से सतर्कता बरती जा रही थी, जो वर्तमान में भी जारी है।
 

 

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कोरोना वायरस - फोटो : ANI

17 महीने बाद एसआरएन का कोरोना वार्ड हुआ खाली

मंगलवार को डिस्चार्ज किया गया अंतिम मरीज, नई भर्ती नहीं 
प्रयागराज। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के करीब 17 महीनों के दौरान मंगलवार को एलथ्री कोविड अस्पताल एसआरएन संक्रमितों से खाली हो गया। तीन दिन से अस्पताल के वार्ड में एक ही संक्रमित भर्ती था। सह प्रभारी कोरोना डॉ. सुजीत के मुताबिक पहली और दूसरी लहर के बीच में कई बार ऐसा हुआ कि वार्ड में एक ही संक्रमित बचा पर खाली कभी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कोरोना काल के दौरान 66650 संक्रमितों का इलाज किया गया। अब खाली वार्डों में सैनिटाइजेशन और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। एक 24 बेड के वार्ड में कोरोना संक्रमितों को भर्ती किए जाने की सुविधा रहेगी।

पांच नए कोरोना पॉजिटिव, चार हुए स्वस्थ

जिले में मंगलवार को कोरोना के पांच नए पॉजिटिव चिह्नित किए गए। चार लोगों ने कोरोना को मात दी। जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. एके तिवारी के मुताबिक मंगलवार को 7685 लोगों की कोविड जांच कराई गई। कोरोना को मात देने वालों में तीन ने होम आइसोलेशन पूरा किया। एक मरीज को एसआरएन अस्पताल के कोरोना वार्ड से डिस्चार्ज किया गया। उन्होंने बताया कि संक्रमण दर कम हुई है, समाप्त नहीं, इसलिए जांच और सतर्कता जारी रहेगी।
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