किसानों पर अब ओलावृष्टि के बाद कोरोना की मार
किसानों की मुसीबत कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से परेशान किसानों का कोरोना वायरस की वजह से संकट और बढ़ गया है। लागत भी नहीं निकल पाने की वजह से बड़ी संख्या में किसान सब्जियाें की पैदावार खेत में ही छोड़ने के लिए मजबूर हैं।
बारिश में रबी की फसलों के साथ सब्जियों की खेती पूरी तरह से बर्बाद हो गई। अब लॉकडाउन होने की वजह से वे सब्जियों को मंडियों तक नहीं ले जा पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें जगह-जगह रोका जा रहा है। इसकी वजह से वे गांव या पास के ही बाजार में कम दाम में सब्जी बेचने के लिए मजबूर हैं। सोरांव सब्जी की खेती का हब है। वहां के बर्चनपुर गांव के राकेश पटेल का कहना है कि पत्ता गोभी जो पहले 12 से 15 रुपये में बिक जाती थी, अब उसके चार से पांच रुपये ही मिल रहे हैं। यही स्थिति पालक को लेकर भी है।
लहटी गांव के दिनेश का कहना है कि उनकी टमाटर की खेती है। मौसम अनुकूल नहीं होने की वजह से उत्पादन पहले से घट गया है। अब खपत नहीं होने की वजह से उन्होंने फसल की देखभाल भी छोड़ दी है। कौंधियारा के अशोक का कहना है कि ग्रामीण मंडी में सब्जियोंका उचित दाम मिल रहा है लेकिन जगह-जगह टोका-टाकी की वजह से किसान मंडी तक सब्जी नहीं ले जा रहे।