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आरिफ मोहम्मद खान बोले : बंदूक की संस्कृति से नहीं निकलता नायक बनने का रास्ता

Sat, 18 Sep 2021 09:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

केरल के राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिए बिना आर्थिक-सामाजिक पिछड़ापन दूर कर पाना संभव नहीं। इंडिया थिंक काउंसिल की परिचर्चा में आतंकवाद और महिलाओं की उपेक्षा पर जताई चिंता ।
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Prayagraj News : आरिफ मोहम्मद खान, राज्यपाल, केरल। - फोटो : प्रयागराज
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पड़ोसी देश में स्वतंत्रता हासिल करने की आड़ में आतंकवाद को प्रोत्साहन दिए जाने पर शनिवार को चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बंदूकें लेकर घूमने वाले स्वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकते। हमारे पूर्वजों ने लंबे संघर्ष के बाद देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया, तो क्या वो 15-16 अगस्त को बंदूकें लेकर घूमते देखे गए थे? नहीं, उनका हर तरफ स्वागत हो रहा था। लेकिन, पड़ोसी मुल्क में महिलाओं, बच्चों पर जुल्म ढाने वाले बंदूकधारियों को स्वतंत्रता सेनानी कहा जा रहा है। यह हम किस संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। बंदूक की संस्कृति को अपनाने वाले न नायक हुए हैं न कभी हो सकते हैं। यह बातें बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रीतम दास मेहता प्रेक्षागृह में इंडिया थिंक काउंसिल की ओर से राजनीति के बदलते स्वरूप और शासन की चुनौतियां विषयक परिचर्चा में कही।
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Prayagraj News : आरिफ मोहम्मद खान, राज्यपाल, केरल। - फोटो : प्रयागराज
राज्यपाल ने कहा कि महिलाएं समाज में बराबरी की हकदार हैं। हमारी महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। लेकिन, जहां बंदूक के बल पर महिलाओं को घरों में बंद किया जा रहा है, वहां के सामाजिक खतरे को समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरे लोग क्या करते हैं, उस पर मेरा नियंत्रण नहीं हो सकता, लेकिन खुद पर तो अपना नियंत्रण होना ही चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति विविधता के साथ ज्ञान, विज्ञान की अतुलनीय पूंजी को दुनिया के लिए सदियों से अनुकरणीय बताया। उनका कहना था कि बारत की स्त्रियों और पुरुषों की त्वचा के रंग अलग हैं। पहनावा अलग है। वो अलग-अलग देवी-देवताओं को मानने वाले हैं।
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Prayagraj News : मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज सभागार में थिंक इंडिया की ओर से आयोजित सेमिनार केरल के राज्यपाल मो. आरिफ खान समेत अन्य विशिष्टजनों को अभिनंदन किया गया। - फोटो : प्रयागराज
उनके रस्म-रिवाज भी अलग हैं, लेकिन हमारी सांस्कृतिक विकास की यात्रा में उनकी स्वीकार्यता की कोई सानी नहीं है। उन्होंने उन्होंने कहा कि नारी को बच्चा पैदा करने की मशीन कहना, सभ्य समाज के खिलाफ है। यह सिर्फ जानवरों में ही हो सकता है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपना बेहतर आचरण प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि हमारे देश में महिला सशक्तीकरण की अवधारणा पौराणिक काल से ही रही है। यहां घोषा, गार्गी, मैत्रेयी, अपाला जैसी वेदज्ञाता महिलाएं रही हैं।

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Prayagraj News : मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज सभागार में थिंक इंडिया की ओर से आयोजित सेमिनार केरल के राज्यपाल मो. आरिफ खान का अभिनंदन किया गया। - फोटो : प्रयागराज
राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की उपेक्षा की समस्या महिलाओं की समस्या नहीं है। इस भेदभाव की समस्या से निबटना होगा। समाज में महिलाओं को बराबर का दर्जा देने के लिए लोग तैयार नहीं हैं, उन्हें अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, तो यह समाज की ही समस्या है। हम महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं दे सकते तो बैकवर्ड बने रहेंगे। उन्होंने कोरोना संक्रमण के खतरों के प्रति भी आगाह किया। हमें अपने स्वास्थ्य के साथ दूसरों के स्वास्थ्य के बारे में भी सोचना होगा। 
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Prayagraj News : मेडिकल कालेज सभागार में थिंक इंडिया की ओर से आयोजित सेमिनार में उपस्थित लोग। - फोटो : प्रयागराज
कोरोना काल ने साबित कर दिया है कि बीमारी कहीं भी होगी, वह विश्व के लिए खतरा बनेगी। इस मौके पर मिजोरम के पूर्व राज्यपाल कुम्मकम राजशेखरण ने सीता की रक्षा के लिए गिद्धराज जटायू के बलिदान को याद किया। उन्होंने केरल के कोल्लम में प्रस्तावित जटायू मंदिर के निर्माण की सराहना की। इस मौके पर पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान, बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी, भाजपा के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल, आईजी केपी सिंह ने विचार व्यक्त किए। पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अशोक मेहता ने आभार जताया। संचालन सौरभ पांडेय ने किया।
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Prayagraj News : मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज सभागार में थिंक इंडिया की ओर से आयोजित सेमिनार में बोलते पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी। - फोटो : प्रयागराज
अपनी कार्यशैली के बल पर सदियों से विश्वगुरु रहा है भारत
केरल के राज्यपाल ने कहा कि भारत की कार्यशैली हमेशा से ही विश्वगुरु की रही है। यह कोई उपाधि नहीं है, जिसे किसी के जरिए हासिल किया जाना है। उन्होंने कहा कि 9वीं, 10वीं शताब्दी में जब इतिहास लिखा जा रहा था, जब अरब के हर इतिहासकार के प्रथम अध्याय भारत की गौरवमयी संस्कृति को समर्पित रहे हैं। जिस तरह रोम की संस्कृति सुंदरता के लिए तुर्क वीरता के लिए जाने जाते है, उसी तरह भारत की संस्कृति हमेशा से अपने ज्ञान,विज्ञान के लिए दुनिया में जानी जाती है। विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं के लोग दुनिया भर से अपनी संस्कृति के बारे में जानने, सीखने के लिए भारत आते रहे हैं। 

राजनीति में बदलाव का नया स्वरूप चिंताजनक: केशरी नाथ
पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने शनिवार को मौजूदा दौर के राजनीतिक बदलावों पर चिंता जताई। साथ ही कोरोना संक्रमण को लेकर नकारात्मक प्रचारों से बचने का भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 1952 के दौर की राजनीति के बाद का स्वरूप जो बदला है, वह चिंता का विषय है। उस दौर में आपस की मर्यादा कभी नहीं टूटती थी। अब बदलाव यह है कि राजनीति अमर्यादित शब्दों का खेल हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल होने लगा है। इसकी प्रतिक्रिया समाज में बहुत ही आलोचनात्मक रूप में सामने आ रही है। आम लोगों में ऐसे राजनीति करने वालों के प्रति नफरत का भाव पैदा हो रहा है। यह भावना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छी नहीं है। सिद्धांत की राजनीति खत्म हो गई है।
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