"मैं ये सब अपनी मर्जी से किया, घर वालों मुझे माफ करना। भाई लोगों ने हमारे लिए बहुत कुछ किया, लेकिन मैं ही नहीं कर पाया। असली दिक्कत मकान मालिकों से है, हमें 4-5 महीने से कह रहा था कि तुम विश्वविद्यालय के हो तुमको नहीं रखेंगे। रोज-रोज यही सुनते कि कब जाओगे, कब मरोगे, उधर हॉस्टल के लिए पता करता तो हौसला सर रोज डांट के भगा देते थे। कल मैं गया बताया कि तबियत खराब है सर हमारी, तो कहे कि हम क्या करें जाओ कहीं मरो। भाईयों, अपने भाई के मौत की चिता को शांत मत रखना, उदय, अंकित यादव, राहुल भैया, अखिलेश इसका बदला जरूर लेना।"
ये बातें एक कागज पर लिखकर 18 साल के रजनीकांत यादव उर्फ गोलू ने फांसी के फंदे पर लटक कर जान दे दी।