Prayagraj News : इलाहाबाद विश्वविद्यालय। संस्कृत विभाग।
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101 साल पहले मिला था आवासीय विश्वविद्यालय का दर्जा
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की स्थापना तो 23 सितंबर 1887 को हुई थी, लेकिन आवासीय विश्वविद्यालय का दर्जा आज से 101 साल पहले मिला था। विश्वविद्यालय के सफर की शुरुआत 1872 में म्योर कॉलेज की स्थापना के साथ हुई। विलियम म्योर के प्रयासों से कॉलेज की शुरुआत हुई।
इसकी कक्षाएं दरभंगा कैसल में चलती थीं। पहले साल कुल 13 छात्रों ने पढ़ाई शुरू की और जब म्योर कॉलेज की विशाल इमारतें 1886 में बनकर तैयार हुईं, तब तक दरभंगा कैसल में पढ़ने वालों की संख्या लॉ के छात्रों सहित 129 हो चुकी थी। 23 सितंबर 1887 में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया और इसके बाद नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस ऑफ अगरा एंड अवध, सेंट्रल प्रोविंसेस (अजमेर-मेवाड़, राजपुताना और सेंट्रल इडियन एजेंसीज) के एक मात्र संघटक विश्वविद्यालय के रूप में इसकी स्थापना हुई।
इतिहासकार प्रो. योगेश्वर तिवारी बताते हैं कि मार्च 1889 में विश्वविद्यालय ने पहली बार प्रवेश परीक्षा कराई, जिसमें रीवा, सतना, जबलपुर, देवास, अजमेर, पटियाला और जोधपुर तक के छात्र शामिल हुए।1921 तक इविवि संघटक विश्वविद्यालय ही रहा। 1921 में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ इलाहाबाद एक्ट’ पारित होने के बाद इसे आवासीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। 1927 से 1957 तक विश्वविद्यालय का स्वर्णिम युग रहा। इसी दौरान इसे ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ का दर्जा मिला। 2005 में यह केंद्रीय विश्वविद्यालय बना और इविवि को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया।