अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उनका शव अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास में मिला। रोज की तरह सोमवार दोपहर भी महंत ने शिष्यों संग भोजन ग्रहण किया। इसके बाद मठ परिसर में ही बने एक कमरे में यह कहते हुए चले गए कि वह आराम करने जा रहे हैं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सोमवार को संदिग्ध हालत में फांसी पर लटके मिले। बांघबरी मठ स्थित एक कमरे में उनका शव फंदे पर लटका मिला। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें अपमान से आहत होकर कदम उठाने समेत अन्य बातें लिखी हैं। पुलिस अफसर इसे खुदकुशी बता रहे हैं लेकिन बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है। अफसर देर रात तक जांच पड़ताल में जुटे रहे। महंत नरेंद्र गिरि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष होने के साथ ही बाघंबरी मठ के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव भी थे। बंधवा स्थित हनुमान मंदिर के वह बड़े हनमंत भी थे। शिष्यों के मुताबिक, दोपहर तक सब सामान्य था। रोज की तरह सोमवार दोपहर भी महंत ने शिष्यों संग भोजन ग्रहण किया। इसके बाद मठ परिसर में ही बने एक कमरे में यह कहते हुए चले गए कि वह आराम करने जा रहे हैं।
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नरेंद्र गिरि का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आमतौर पर वह शाम चार बजे के करीब बाहर आकर शिष्यों व अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठ जाते थे। लेकिन पांच बजे तक भी वह बाहर नहीं आए।
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नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इस पर बबलू नाम का सेवादार उन्हें जगाने पहुंचा। बहुत देर तक आवाज देने पर भी वह बाहर नहीं आए तो उसने आश्रम में ही रहने वाले सुमित नाम के शिष्य को बुलाया। दोनों ने धक्का दिया तो कुंडी टूट गई। जैसे ही दरवाजा खुला, भीतर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। महंत फांसी पर लटके हुए थे।
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narendra giri
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने शोर मचाया तो अन्य शिष्य व आश्रम में रहने वाले पदाधिकारी आ गए। रस्सी काटकर शव फंदे से नीचे उतारा गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। सूचना पर आईजी, कमिश्नर, डीएम, डीआईजी समेत पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। करीब पांच घंटे की जांच पड़ताल के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
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शव ले जाती एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
प्रथम दृष्टया मामला खुदकुशी का लग रहा है। शिष्यों की सूचना पर मैं अन्य पुलिस अफसरों संग मौके पर पहुंचा, तब तक शव नीचे उतारा जा चुका था। मौके से सुसाइड नोट मिला है। उसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। केपी सिंह, आईजी रेंज प्रयागराज
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narendra giri
सम्मान सब कुछ, इसके बिना जीवन व्यर्थ
मौके से जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें वसीयत नामे से लेकर छोटे महंत आनंद गिरि तक का नाम लिखा है। यह भी लिखा है कि उनके लिए सम्मान सबकुछ है और इसके बिना जीवन व्यर्थ है। पुलिस अफसरों का कहना है कि जांच में ही स्पष्ट होगा कि सुसाइड नोट किसने लिखा।
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महंत का शव ले जाता वाहन
- फोटो : अमर उजाला
फिर चर्चा में अरबों की सपंत्ति का विवाद
महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत के बाद निरंजनी अखाड़े व बाघंबरी मठ की अरबों की संपत्ति का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। गौरतलब है कि इसी विवाद को लेकर पूर्व में महंत और कुछ समय तक उनके सबसे करीबी शिष्य रहे आनंद गिरि के बीच विवाद हुआ था। जिसे लेकर आनंद गिरि का अखाड़े से निष्कासन तक हुआ था। इससे पहले निरंजनी अखाड़े के ही एक अन्य सचिव आशीष गिरि संदिग्ध हाल में मृत मिले थे।
आत्महत्या या हत्या: कई सवालों का जवाब मिलना बाकी
1- पुलिस के मुताबिक मामला खुदकुशी का लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर महंत ने जान देने जैसा कदम क्यों उठाया?
2- पुलिस की थ्योरी सच मानी जाए तो आत्महत्या जैसा कदम उठाने से पहले क्या उनकी मनोदशा ऐसी थी कि इतना लंबा चौड़ा सुसाइड नोट लिख सकें।
3- मौके से मिले सुसाइड नोट में आनंद गिरि का भी नाम लिखा है तो क्या आनंद गिरि उन्हें किसी बात को लेकर परेशान कर रहे थे?
4- महंत की मौत के बाद शिष्यों ने आखिर पुलिस के आने से पहले ही दरवाजा क्यों तोड़ा? इतना ही नहीं उनका शव भी फंदे से नीचे उतार लिया?
5- सूचना पर आला पुलिस अफसरों ने आखिर इस बात के लिए निर्देशित क्यों नहीं किया कि फोरेंसिक टीम के मौके पर पहुंचने से पहले शव को न छुआ जाए?