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Hathras Stampede: किसी का बेटा तो किसी का पति हुआ गुम...भगदड़ के बीच गूंज रही थी पुकार; इधर-उधर दौड़ते रहे लोग

Wed, 03 Jul 2024 02:03 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
150 बीघा के सत्संग स्थल पर पचास हजार से ज्यादा की भीड़ जुटी थी। बड़ी दूर-दूर से लोग आए थे। दोपहर को जब आयोजन खत्म हुआ तो सभी अपने घरों को वापस जाने के लिए अपनी बसों की तरफ बढ़ने लगे। इसी दौरान भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में किसी का बेटा गुम हो गया तो किसी का पति। सभी अपनों की तलाश में इधर उधर भागने लगे। जब बता चला कि अस्पतालों में घायलों को ले जाया गया है तो लोग अस्पतालों तक पहुंच गए। कई लोग तो ऐसे थे जिन्हें देर रात तक भी अपनी खोज खबर नहीं हो पाई थी।
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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
बहराइच निवासी रानी देवी की जेठानी और उसका बेटा भी भीड़ में गुम हो गए थे। रानी देवी इनकी तलाश में भटक रही थी। जो भी अधिकारी पहुंचता उसी के आगे हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती और जेठानी के बारे में पूछती। कभी मोबाइल पर फोटो दिखाती तो कभी उनके हुलिए के बारे में। इनका भी देर रात तक पता नहीं चला। 

 
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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
फतेहाबाद निवासी महिला पांचो की बेटी छाया भी लापता हो गई। उसका भी कोई पता नहीं चला था। हाथरस की संगीता का बच्चा भी गायब हो गया था। कन्हैया लाल जो बिचपुरी मुरसान के रहने वाले हैं उनकी भी मां और भतीजा गायब हो गए। हाथरस के लाला का नगला निवासी बहादुर की भाभी भी लापता हो गईं हैं। ऐसे लोगों की संख्या भी बड़ी थी जो अपनों की तलाश देर रात तक करते रहे।

 

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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शी ज्योति बोलीं, सबको थी निकलने की जल्दी
सिकंदराराऊ। प्रत्यक्षदर्शी ज्योति ने बताया कि सत्संग के बाद सबको निकलने की जल्दी हो रही थी। रास्ता चौड़ा नहीं था और ऊंचा नीचा भी था। भीड़ एक दम से रुक गई। अचानक हमें पीछे से धक्का लगा और भगदड़ मच गई। धक्का लगने से लोग गिरने लगे। 


 
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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
लापता बेटी की तलाश करते हुए फफकती रही पांचो
फतेहाबाद निवासी पांचो करीब 16 वर्षीय बेटी छाया को लेकर कुछ अन्य महिलाओं के साथ भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने आई थीं। जिस समय सड़क पर भगदड़ मची वह मुख्य पंडाल के पास थीं। चप्पल पहनने लगीं तभी बेटी छाया का हाथ छूट गया और वह लापता हो गई। 

 
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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद से वह लगातार फफकते हुए अपनी बेटी की तलाश करते हुए कभी पंडाल की ओर जातीं। कभी सड़क और खेतों की ओर। पांचो ने बताया कि उनकी बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ है। मुंछ से झाग निकलने की बीमारी है। वह अधिक कुछ बता नहीं सकती। पूरे समय बेटी को पकड़े रहीं, लेकिन चप्पल पहनते समय भगदड़ में उनकी बेटी लापता हो गई।
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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
कभी वह सेवादारों से पूछतीं। कभी किसी पुलिस कर्मी के पास पहुंच जातीं। साथ की महिलाएं उन्हें सांत्वना देती रहीं। आसपास के लोग उन्हें रोता देखकर मामला पूछते। किसी अस्पताल में छाया के होने, या सड़क पर ही इधर-उधर कहीं बैठे होने की बात कहते हुए सांत्वना देते रहे। देर शाम तक उन्हें बेटी छाया नहीं मिल पाई थी।

 

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
पहचान न होने पर नंबर डाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव
हादसे में मारे गए लोगों की पहचान नहीं हो पा रही थी। एंबुलेंस, निजी बसों व गाड़ियों से उन्हें अलीगढ़, कासगंज और अन्य आसपास के जिलों में भेजा गया। पोस्टमार्टम के लिए शव भेजते समय केवल नंबर डाले जा रहे थे और इसमें भी करीब दो घंटे लग गए।

 

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
सत्संग में दूसरे प्रदेश से काफी तादाद में में श्रद्धालु आये थे। स्थानीय लोगों के लिए वह अनजान थे। लोग अपने परचितों को तलाशते रहे। तीन बच्चों की मौत सबसे ज्यादा हृदय विदारक रही। उनकी मां छोटे बच्चे को छाती से लगा कर बिलख बिलख कर रो रही थी। एक युवती जिसकी कि मां की मौत हो गई रो रो कर बेहोश हो गई थी। कई लोग अपने परिजनों को लाशों के ढेर में तलाशते नजर। कोई कह रहा था मेरी मां कहां है तो कोई भाई को तलाश रहा था। किसी बहन लापता थी। बाद में ये लोग एटा के लिए रवाना हो गए। 

 

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
ट्रैफिक को नियंत्रित कर रहे थे बाबा के सेवादार
मंगलवार की सुबह से बाबा के सेवादार यातायात नियंत्रित कर रहे थे। एनएच ओवरब्रिज पर मंडी समिति से नगर की तरफ बसों को रोक दिया था। इसके बावजूद सैकड़ों की तादाद में बसें और अन्य वाहन एनएच पर दोनों ओर खड़े कर दिए गए। एक लेन बंद थी दूसरी लेन में दोनों ओर का यातायात होने के कारण जाम की स्थिति थी।

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
कदम कदम पर खड़ी थी लापरवाही
भीड़ का कोई पक्का आकलन तो नहीं है लेकिन प्रशासन भी पचास हजार से अधिक की भीड़ मान रहा है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि प्रशासन ने इस भीड़ की सुरक्षा के लिहाजा से कोई इंतजाम नहीं किया था। जब भी किसी बड़े आयोजन की अनुमति दी जाती है, तब साथ में कार्यक्रम स्थल पर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड भी लगाई जाती है। लेकिन यहां कुछ भी ऐसा नहीं किया गया था। इसे तो छोड़िए किसी प्रशासनिक अधिकारी तक की तैनाती मौके पर नहीं थी।

 
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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
जिस फुलरई-मुगलगढ़ी गांव में आयोजन था, वह सिकंदराराऊ तहसील मुख्यालय से महज छह किलोमीटर दूर है। लेकिन इसके बाद भी इतने बड़े आयोजन की निगरानी के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। पुलिस के कुछ सिपाही जरूर थे लेकिन वह भी सब कुछ सेवादारों को सौंपकर एक साइड में जाकर खामोशी से खड़े हो गए थे। अगर एंबुलेंस पहले से यहां मौजूद होती तो शायद काफी जानें बचाई जा सकती थीं। दमकल कर्मी मौके पर होते तो वह भी तत्काल राहत कार्य में जुट सकते थे। लेकिन यहां तो कदम कदम पर थी तो केवल लापरवाही।
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