नाला बन चुकी यमुना नदी लॉकडाउन में स्वच्छ हो गई। खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी आगरा की हवा भी साफ होकर बेहतर की श्रेणी में आ गई। विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रकृति का इससे बेहतर कोई तोहफा नहीं, लेकिन इसे सहेजने की चुनौती सबके सामने है।
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यमुना नदी
- फोटो : अमर उजाला
यमुना नदी को साफ करने में खर्च हुए 15 सौ करोड़ रुपये और शहर की आबोहवा शुद्ध करने के लिए बनाई गई 100 करोड़ की योजनाओं से लॉकडाउन बेहतर साबित हुआ। पर्यावरण को सहेजने के नाम पर शहर में एयर एक्शन प्लान, वाटर एक्शन प्लान समेत कई योजनाएं बनाकर हजारों करोड़ों रुपये ठिकाने लगा दिए गए लेकिन यमुना नदी नाले में तब्दील हो गई और शहर गैस चेंबर में।
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आगरा की जामा मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में महज 30 दिनों के बाद ही यमुना नदी एकदम स्वच्छ हो गई और शहर की हवा में बदलाव देखने को मिला। आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स इस बार सबसे बेहतर है वहीं यमुना नदी में कई साल बाद घुलनशील ऑक्सीजन बढ़ी है।
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ताजमहल में पसरा सन्नाटा
- फोटो : Amar Ujala
टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य उमेश शर्मा ने बताया कि प्रकृति ने एक बार फिर हमें बेहतर हवा और पानी लौटाया है। अब जिम्मेदारी हमारी है। कोशिश की जानी चाहिए कि इसके बाद ट्रैफिक पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। कोशिश हो कि इलेक्ट्रिक वाहन चलें, साइकिल का इस्तेमाल हो। लॉकडाउन ने दिखा दिया कि किन चीजों के बिना भी हमारा काम चल सकता है।
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आगरा का एमजी रोड
- फोटो : अमर उजाला
टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य केशो मेहरा ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर जितनी भी योजनाएं चलाई गईं वह सब घोटालों और गड़बड़ी के कारण बेकार साबित हुईं। इन सभी योजनाओं की उपयोगिता की अब समीक्षा की आवश्यकता है। पर्यावरण एक बार फिर बेहतर हुआ है। इसे इसी तरह से सहेजने की चुनौती सभी के सामने है।
आगरा में हरियाली के आंकड़े
13.21 लाख पौधे 2018 में लगे
22 लाख पौधे 2019 में लगाने का दावा
26 विभागों के पास थी जिम्मेदारी
100 करोड़ का बनाया एयर एक्शन प्लान
1500 करोड़ यमुना एक्शन प्लान पर हुए खर्च