आगरा में करोड़ों की लागत से ताजगंज प्रोजेक्ट में ताज की गलियों को संवारा गया था। प्रोजेक्ट को पूर्ण हुए अभी एक साल भी नहीं बीता है मगर इसके पत्थर दरकने लगे हैं। ताज के पश्चिमी गेट के सामने ही दो माह से पत्थर टूटे पड़े हैं। इसी तरह नीम तिराहे पर फर्श धंस गया है। बुकिंग खिड़की से अमरूद टीले तक पत्थर के लैंप पोस्टों में लगाई गई रोशनी भी गुल हो चुकी है।
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टूटे पत्थर
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में प्रोजेक्ट की देखरेख का जिम्मा संभालने वाले एडीए पर सवाल उठने लगे हैं। पर्यटन विभाग ने ताजगंज प्रोजेक्ट के तहत 197.5 करोड़ की लागत से ताजमहल के आसपास के क्षेत्र की तस्वीर को बदलने के लिए पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी गेट की सड़कों को लाल पत्थर से बनवाया था।
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रोड पर लगे पत्थर टूट गए
- फोटो : अमर उजाला
इसके चारों को लैंप पोस्टों के साथ ही फुटपाथ और रेड स्टोन की बेंच भी लगाई गई थीं। करोड़ों की लागत से इलाके की सूरत खासी बदल गई है, लेकिन देखरेख के अभाव में अभी से सड़कों के पत्थर दरकने लगे हैं। पश्चिमी गेट के सामने नाले के ऊपर के तीन पत्थर दो माह से टूटे पड़े हैं।
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पत्थरों के बीच गैप हो गया है
- फोटो : अमर उजाला
इसी तरह कई स्थानों पर पत्थर निकलकर टूट गए हैं। पश्चिमी गेट पर दो बेंच भी टूट गई हैं। पाथवे के डिवाइडर भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। सूर्यास्त के बाद बड़े हिस्से में अंधकार छा जाता है, क्योंकि अमरूद के टीले तक लैंप पोस्ट खराब हो चुके हैं। इनकी एलईडी बदलने की जहमत भी नहीं उठाई गई है।
जगह-जगह दिख जाएंगी ऐसी तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
ताजगंज विकास समिति के लोगों का कहना है कि करोड़ों के प्रोजेक्ट से ताजमहल की गलियों को संवारा गया मगर अब उनकी देखरेख भी होनी चाहिए। यहां घूमने वाले आवारा जानवरों के कारण भी नुकसान पहुंच रहा है। पर्यटन विभाग ने इसकी देखरेख का जिम्मा आगरा विकास प्राधिकरण को सौंपा है, लेकिन एडीए के अधिकारी भी अनदेखी कर रहे हैं।