करणी सेना का गठन 23 सितंबर 2006 को जयपुर के जोतवाड़ा में लोकेंद्र सिंह कालवी ने किया था। संगठन का मुख्य उद्देश्य सरकारी नौकरियों और शिक्षा में राजपूतों के लिए जाति-आधारित आरक्षण की मांग करना था। संगठन का नाम करणी माता के नाम पर रखा गया, जिन्हें उनके अनुयायी हिंगलाज का अवतार मानते हैं।
हालांकि करणी सेना कोई राजनीतिक संगठन नहीं है, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से इसे लुभाने की कोशिशें लगातार होती रही हैं। राजस्थान सहित कई राज्यों में राजपूत बहुल वाले इलाकों में इसका प्रभाव देखा जाता है। मार्च 2023 में संगठन के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी के निधन के बाद भी यह संगठन सक्रिय बना हुआ है और विभिन्न राज्यों में इसका विस्तार जारी है।
करणी सेना तब सबसे अधिक चर्चा में आई जब 2018 में संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के विरोध में इसने राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया। संगठन का आरोप था कि फिल्म में रानी पद्मिनी के चरित्र को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे राजपूत समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इस विरोध ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में उग्र रूप ले लिया था। फिल्म के सेट पर तोड़फोड़, भंसाली पर हमले और सिनेमाघरों में हिंसा जैसी घटनाएं भी सामने आईं।
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