मथुरा में गुरुवार की शाम एकाएक मौसम बदल गया। जिले में कई स्थानों पर बारिश होने के साथ ओलावृष्टि भी हुई। करीब आधा घंटे गिरे ओले कांच की गोलियों के बराबर बताए जा रहे हैं। वहीं ठंडी हवाएं चलने से सर्दी और बढ़ गई। ओलावृष्टि से सरसों समेत रबी की फसल को नुकसान होने का अनुमान है।
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मथुरा में गिरे ओले
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार सुबह से ही बादल छाए रहे। शाम लगभग सात बजे अचानक मौसम बदल गया। जनपद के बरसाना में बारिश के बाद ओलावृष्टि हुई। ओलों की बरसात होते ही लोग घरों की ओर दौड़ पड़े। बरसाना के गांव चिकसोली, मानुर, रूपनगर, डभाला, राकोली, रिठौरा, कमई, उंचागांव, गाजीपुर, संकेत आदि गांवों में भी ओले पड़ने से किसानों के चेहरे पर शिकन छा गई।
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मथुरा में गिरे ओले
- फोटो : अमर उजाला
मांट में तेज हवा के साथ बारिश और इसके बाद ओले गिरे। चौमुहां में ओले और बारिश हुई। नंदगांव के समीपवर्ती गांव लौहरवारी में ओले गिरे। टैंटीगांव में बूंदाबांदी और बलदेव में हवा चली। वृंदावन, गोवर्धन, राधाकुंड, और मथुरा में बूंदाबांदी के बाद मौसम सर्द हो गया।
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मथुरा में गिरे ओले
- फोटो : अमर उजाला
रात भर तेज सर्द हवाओं के बाद सर्दी बढ़ गई। तापमान गिर गया है। पिछले कई दिनों से सुबह और शाम के समय ही सर्दी का अहसास हो रहा था, जबकि दिन में तेज धूप निकलने से गर्मी बढ़ी थी। राया संभागीय कृषि प्रशिक्षण केंद्र के अनुसार अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
2 से 4 फीसदी फसलों को नुकसान
उप कृषि निदेशक धुरेंद्र सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण कुछ स्थानों पर ओले गिरे हैं। इसका ही प्रभाव है कि एक दिशा में ही ओलावृष्टि हुई है। ओले कभी-कभी एक खेत में गिर जाते हैं तो दूसरे में नहीं। चूंकि बारिश तेज नहीं थी, ओले थे, लिहाजा फसल जमीन पर गिर गई है। सरसों, गेहूं, आलू, जौं आदि फसलों को नुकसान पहुंचा है। जिस फसल में दाना पड़ गया है और जमीन पर गिर गई है तो उसका दाना पतला हो जाएगा। अनुमान है कि 2 से 4 फीसदी फसल हो नुकसान पहुंचा है। इसी तरह का मौसम एक-दो दिन और रह सकता है। किसान सचेत रहें।