फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'कैद' में 2000 मौतों का राज: विसरा की जांच हुई तो होंगे बड़े खुलासे, चौंकाने वाले हैं यह आंकड़े

Sat, 30 Nov 2019 02:08 PM IST
मुकेश कुमार चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 8
पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के पुराने पोस्टमार्टम हाउस के जर्जर कमरे में कैद 2000 विसरा की जांच कराई गई तो हत्या और आत्महत्या के बड़े राज खुलेंगे। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला में पिछले तीन साल में विसरा जांच में 60 फीसदी में जहर पाया गया है। कुल 3350 विसरा की जांच हुई, इनमें 2010 हत्या और आत्महत्या के निकले।
विज्ञापन

2 of 8
पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
प्रयोगशाला के टॉक्सिकोलॉजी सेक्शन में विसरा का परीक्षण किया गया है। इनमें सल्फाज, कीटनाशक, साइनायड जैसे जहर मिले। ऐसे भी मामले हैं जिनमें एक से अधिक जहर देकर किसी की जान ली गई। लैब में दो साल पहले तक आगरा, मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, झांसी, सहारनपुर मंडल के विसरा परीक्षण के लिए आते थे। मुरादाबाद, झांसी और मेरठ मंडल में लैब खुल जाने के बाद वहां से नहीं आ रहे।
विज्ञापन

3 of 8
आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला - फोटो : अमर उजाला
आगरा में वर्ष 1990 से 2004 के बीच संरक्षित किए गए विसरा में से 2000 को परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा ही नहीं गया तो उन लोगों की मौत का सच कैसे सामने आता जिनके ये विसरा हैं। दरअसल, 2004 में पोस्टमार्टम हाउस की नई बिल्डिंग तैयार हुई। इसके बाद पुरानी इमारत में रखे विसरा को पुलिस ने देखा तक नहीं।

4 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Flickr
विसरा को संरक्षित उसी सूरत में किया जाता है जब पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट न होने पाए। डॉक्टरों को लगता है कि मौत की वजह जहर या शराब हो सकती है तो विसरा संरक्षित किया जाता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि विसरा जांच रिपोर्ट मुकदमे में बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। 
 
विज्ञापन

5 of 8
पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
डीजीसी (क्रिमिनल) वसंत कुमार गुप्ता ने बताया कि विसरा जांच रिपोर्ट मुकदमे में बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य है। इसी से पता चलता है कि मौत का कारण जहर है या नहीं। इतना ही नहीं, जहर है तो कौन सा है? अगर जहर से आत्महत्या या हत्या के मामले में विसरा की रिपोर्ट ही न हो तो निर्णय में भी कठिनाई आती है।
विज्ञापन

6 of 8
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ हरिदत्त शर्मा - फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ हरिदत्त शर्मा ने कहा कि विसरा जांच रिपोर्ट से ही सच्चाई सामने आती है। इसी से पता चलता है कि मौत का कारण जहर है या नहीं। यह न केवल दोषियों के सजा दिलाने के लिए साक्ष्य है बल्कि बेकसूरों को बचाने के लिए भी है। अगर विसरा में कोई जहर न आया हो, सिर्फ अल्कोहल आया हो तो हत्या जैसे संगीन आरोप में फंसे बेकुसूर लोगों के लिए बड़ा अहम साक्ष्य साबित होता है।
विज्ञापन

7 of 8
आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला - फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी यूपी के वर्ष 2006 के चर्चित केस कविता चौधरी हत्याकांड में आरोपी रविंद्र प्रधान की मौत का राज आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हुई विसरा जांच से हुआ था। बुलंदशहर के घनसूपुर गांव निवासी कविता सीसीएस यूनिवर्सिटी में लेक्चरर थीं। रविंद्र प्रधान की मौत गाजियाबाद जेल में हुई थी। पोस्टमार्टम में मौत का कारण साफ न हुआ। आगरा लैब में विसरा जांच हुई। इसमें शरीर के अंदर जहर पाया गया। इससे माना गया कि उसकी हत्या जहर देकर की गई।
विज्ञापन

8 of 8
टूटे पड़े विसरा के जार - फोटो : अमर उजाला
एटा में जुलाई 2016 में जहरीली शराब से 40 लोगों की जान गई। इनके विसरा संरक्षित कर आगरा लैब भेजे गए। यहां जांच में पता चला कि शराब मेथाइल अल्कोहल से बनाई गई थी, जो जहरीला होता है। आरोपियों के खिलाफ यह साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस ने इसी आधार पर चार्जशीट दाखिल की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें