मथुरा के थाना सुरीर कोतवाली में पति जोगेंद्र के साथ 28 अगस्त को आग लगाने वाली चंद्रवती की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शुक्रवार की देर रात को मौत हो गई। इससे पूर्व 31 अगस्त को इसी अस्पताल में जोगेंद्र ने भी दम तोड़ दिया था। शनिवार दोपहर को जब चंद्रवती का शव गांव में पहुंचा तो लोग भड़क गए।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दंपती की मौत के बाद गांव सुरीरकलां के लोगों में पुलिस के खिलाफ भारी गुस्सा था। लोगों का कहना था कि अगर पुलिस ने सुनवाई की होती तो दंपती को यह आत्मघाती कदम नहीं उठाना पड़ता। ग्रामीण प्रशासन से जमीन का पट्टा, बेटे को नौकरी और आर्थिक मदद की मांग कर रहे थे। गुस्साए ग्रामीणों ने घंटों शव नहीं उठने दिया।
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जोगेंद्र और उसकी पत्नी चंद्रवती के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
गांव सुरीरकलां निवासी जोगेंद्र के साथ पड़ोसी मारपीट करते थे। शिकायत के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इससे दुखी दंपती ने खुद को आग लगी ली थी। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पति जोगेंद्र की मौत के बाद पत्नी चंद्रवती की भी हालत बिगड़ गई थी। दो दिन पहले उसे खून भी चढ़ाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका।
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दंपती की मौत से गांव में पसरा मातम
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार दोपहर को करीब सवा तीन बजे महिला का शव गांव में पहुंचा तो लोगों में उबाल आ गया। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी। इन दोनों की मौत के लिए पूरी तरह से पुलिस जिम्मेदार है। अगर पुलिस ने दबंगों के खिलाफ कार्रवाई कर दी होती तो एक हंसता खेलता परिवार न उजड़ता। ग्रामीणों ने कहा कि जोगेंद्र को जो भी शिकायत थी उसका निस्तारण करना चाहिए था।
ग्रामीणों से वार्ता करते एडीएम व एसपी देहात
- फोटो : अमर उजाला
गांव का माहौल बिगड़ता देख कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। अफसरों के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। मौके पर पहुंचे एडीएम वित्त ब्रजेश कुमार ने आश्वासन दिया कि वो हर संभव मदद करेंगे। ग्रामीण कहने लगे कि पट्टे के कागज दिए गए। इस पर अफसरों ने भरोसा दिलाया कि पट्टा दे दिया जाएगा। आर्थिक मदद भी की जाएगी। इस पर लोग शांत हो गए और सवा पांच बजे शव को उठाया जा सका।