खनन माफिया के गुर्गों के हमले में जान गंवाने वाले सोनू कुमार चौधरी के गांव फाजिलपुर में उनकी मौत की खबर से मातम छा गया। सैंया क्षेत्र में भी लोग गमगीन हो गए। पिता विनोद की मौत के बाद सोनू ही परिवार के मुखिया थे। उनकी शादी को डेढ़ साल ही हुआ था। पत्नी प्रिया बेसुध हो गईं। उन्हें परिवार के लोगों ने किसी तरह संभाला।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 6
शहीद सिपाही सोनू चौधरी को अंतिम विदाई
- फोटो : अमर उजाला
आगरा पुलिस लाइन में शहीद सिपाही को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। सैंया के लोगों का कहना था कि कोरोना काल में सिपाही सोनू ने लोगों की मदद की थी। इससे लोग प्रभावित थे। उनका स्वभाव भी काफी अच्छा था। परिजनों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
3 of 6
मृतक सिपाही सोनू चौधरी का फाइल फोटो और मौके पर पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
मूलरूप से अलीगढ़ के जट्टारी स्थित गांव फाजिलपुर निवासी सोनू कुमार चौधरी वर्ष 2018 बैच के सिपाही थी। उनके पिता विनोद कुमार चौधरी किसान थे। परिजनों ने बताया कि सात महीने पहले सोनू के पिता की बीमारी से मौत हो गई थी। परिवार में सोनू का छोटा भाई नवनीत है। वह सेना में है। सोनू की शादी आठ मई 2019 को खुर्जा, बुलंदशहर की प्रिया से हुई थी। सोनू की पुलिस लाइन से ही थाना सैंया में ड्यूटी लगी थी। पत्नी प्रिया भी साथ रह रही थी। पत्नी के साथ हुई घटना की जानकारी से प्रिया बेसुध हो गई। उसे किसी तरह परिवार के लोगों ने संभाला। वहीं गांव में मौत की खबर से मातम छा गया।
4 of 6
सिपाही सोनू चौधरी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने बताया कि पिता की मौत के बाद सोनू ही परिवार के मुखिया थे। घर के सभी निर्णय वो ही लेते थे। सूचना पर दोपहर में परिजन आए। पोस्टमार्टम के बाद सिपाही के पार्थिव शरीर को पुलिस लाइन लाया गया। यहां पर अंतिम विदाई दी गई। सलामी के बाद पार्थिव शरीर को परिजन गांव में ले गए।
विज्ञापन
5 of 6
पकड़ा फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला गैंग
- फोटो : अमर उजाला
फर्जी आरटीओ दफ्तर से खुला था अवैध खनन का खेल
सैंया टोल के पास पुलिस ने दो महीने पहले फर्जी आरटीओ ऑनलाइन टैक्स की आड़ में चल रहे जीएसटी के बिल के खेल को पकड़ा था। यहां पर अवैध खनन करके आने वाले वाहनों को जीएसटी बिल दिए जा रहे थे। पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। इस मामले में विजिलेंस जांच अभी चल रही है। इस कारण खनन के वाहन गांवों के रास्तों से आ रहे हैं। यहां पर टैक्स भी नहीं देना पड़ता है। सैंया की तरफ से आने पर टोल भी देना होगा। आरटीओ के साथ ही जीएसटी अधिकारियों के पकड़ने का भी भय रहता है।
अवैध खनन को लेकर हो चुकी फायरिंग
2007 में यहां पर खनन करने वाले 8 लोगों का दस्यु सरदार जगजीवन परिहार ने अपहरण किया था। जबकि 8 लोगों ने बीहड़ में कूदकर अपनी जान बचाई थी। सभी अपहृत फिरौती की मोटी रकम देकर छूटे थे। इसके बाद अवैध खनन को लेकर गढ़ी टिडावली घाट पर फायरिंग भी हुई। इतना सब होने के बाद भी चंबल में अवैध खनन नहीं रुका।