उन्होंने तो तन-मन-धन से हमेशा तुम्हारी पूजा की, सेवा में कोई कसर न छोड़ी। हे खाटू श्याम... फिर क्यों तुमने मेरी दुनिया उजाड़ दी? ये बातें संदीप गुप्ता की पत्नी सुनीता गुप्ता के मुंह से निकल रही थीं। सोमवार रात से रो-रोकर उनका बुरा हाल था। मांग का सिंदूर उजड़ने की सूचना मिली तो सुनीता सुधबुध ही खो बैठीं। व्यापारी संदीप गुप्ता बाबा खाटू श्याम के अनन्य भक्त थे। हर महीने सैकड़ों की संख्या में लोगों को खाटू श्याम के दर्शन कराने मुफ्त यात्रा पर ले जाते थे। रुकने से लेकर खाने-पीने तक का इंतजाम उन्हीं का रहता था। कुछ दिन पहले ही कस्बे व क्षेत्र के लोगों को खाटू श्याम लेकर गए थे। उनकी पत्नी सुनीता के मुंह पर रोते-रोते यही बात आती रही कि कभी किसी का बुरा नहीं चाहा, फिर यह यह सजा किसकी मिली? दरवाजे पर जो भी अपनी समस्या को लेकर आया, उसकी हर संभव मदद की।