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UP: मौत के भंवर में फंसी थीं 12 जिंदगियां...7 की तलाश में जवानों को चुनौती; जाल नहीं, ऐसे चला रहे सर्च ऑपरेशन

Sun, 05 Oct 2025 03:14 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा की उटंगन नदी में दो अक्तूबर को डूबे सात लोगों की तलाश में जवानों को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सेना और एनडीआरएफ की स्कूबा डाइविंग टीम को भगवती और अभिषेक के शव दबे मिले थे। बाकी की भी 4-5 फीट मिट्टी में दबे होने की आशंका है।
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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा में दो अक्तूबर को उटंगन नदी में 12 जिंदगियां मौत के भंवर में फंस गई थीं। पानी में डूबने के बाद मिट्टी की मोटी परत ने किसी को फिर से सूरज नहीं देखने दिया। पांच के शवों को किसी तरह बाहर निकाल लिया गया। 

इनमें से टीमों को अभिषेक और भगवती तीन फीट तक मिट्टी की परत के नीचे दबे मिले। बाकी सात के भी इसी तरह होने की आशंका है। इस कारण सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को 6-6 जवानों की 4 टोलियां अलग-अलग काम करती रहीं। मगर, डूबे हुए किसी भी युवक को बाहर नहीं निकाला जा सका।
 
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बृहस्पतिवार को घटना के बाद शाम को इटावा से एसडीआरएफ के 20 से अधिक जवान पहुंचे थे। शुक्रवार को गाजियाबाद से एनडीआरएफ की 60 सदस्यीय टीम पहुंची। दोपहर में 50 पैरा ब्रिगेड की 411 पैरा फील्ड यूनिट के 19 सदस्यीय दल ने भी मोर्चा संभाल लिया था। 
 
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ पानी में उतरे स्कूबा डाइवर
टीम में शामिल स्कूबा डाइवर ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ पानी में उतरे, लेकिन उन्हें मिट्टी की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सेना और एनडीआरएफ के 6 जवान एक-एक करके पानी के अंदर जा रहे थे। मोटर बोट में बैठे 6 जवान उनके रिलीवर बने हुए थे।

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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डूबे हुए लोगों को तलाशने में परेशानी
पानी के अंदर गए जवान दलदल में 1 से 2 फीट तक फंस रहे थे। ऐसे में उन्हें भी डूबे हुए लोगों को तलाशने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इस कारण उन्हें बार-बार बाहर आना पड़ रहा था। ऐसे में उनका कैमरा (सर्चिंग रोप) भी काम नहीं कर पा रहा था। 

 
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह कैमरा 10 मीटर तक आसपास मानव गतिविधि का पता लगाने में समक्ष होता है। मगर पानी में मिट्टी होने की वजह से कैमरे ने भी काम करना बंद कर दिया। खुद न फंस जाएं, इसलिए जवान अपने साथ रस्सी लेकर गए थे। फंसने पर वो मोटर बोट में बैठे अपने साथियों को रस्सी हिलाकर इशारा दे रहे थे, जिससे उन्हें ऊपर की तरफ खींचा जा रहा था।
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खनन करने की वजह से बन गए हैं गड्ढे
एनडीआरएफ की कमान असिस्टेंट कमांडेंट संजय रावत संभाल रहे हैं। उनकी टीम के निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि जिस स्थान पर युवक डूबे हैं, वहां पर 25 फीट गहरा गड्ढा हैं। इसके अलावा भी आसपास 10 से 15 फीट के कई गड्ढे हैं। यह सभी गड्ढे खनन करने की वजह से बने हैं। इनमें पानी भरने की वजह से दलदल बन गया है।
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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश जारी, इंतजार करते ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके साथ ही पानी का भंवर भी बना हुआ है। जब सभी युवक बड़े गड्ढे की तरफ गए, तभी अचानक ढाय गिर गई। इस वजह से एक-एक करके 12 लोग गड्ढे में गिर गए। गड्ढे में अंदर जाने की वजह से मिट्टी में दब गए। इसके बाद वो बाहर नहीं आ सके।

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आगरा की उटंगन नदी पर बांध बनाते ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन फीट की दूरी पर मिले अभिषेक और भगवती
इंस्पेक्टर ने बताया कि शुक्रवार को कुछ घंटों के अंतराल में अभिषेक और भगवती को निकाला गया था। उनका मिलना भी आसान नहीं था। एक युवक का जवानों को हाथ नजर आया था। मिट्टी हटाने पर वो पूरी तरह से दिख गया। इस पर उसे बाहर निकाल लिया। यही हाल दूसरे युवक का भी था। वह 3 फीट की दूरी पर 2 फीट तक मिट्टी के नीचे दबा हुआ था।

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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश जारी, विलाप करती महिलाएं - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब आशंका यही है कि मिट्टी की मोटी परत ने डूबे हुए युवकों ढक दिया। इस वजह से 72 घंटे बाद भी वह बाहर नहीं आ सके। अमूमन नदी में डूबने वाले लोगों के शव 72 घंटे बाद बाहर आ जाते हैं। मगर इस मामले में ऐसा मिट्टी की वजह से नहीं हो पा रहा है।

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नदी में डूबे लोगों की तलाश करती टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जाल नहीं, रस्सी के सहारे चला रहे सर्च ऑपरेशन
स्कूबा डाइवर के साथ सेना और एनडीआरएफ की टीम अपने साथ जाल, रस्सी, ऑक्सीजन सिलिंडर, मोटर बोट, सर्चिंग कैमरा, कांटा सहित अन्य उपकरण लेकर आई है। इनमें से जाल को नहीं डाला पा रहे हैं। क्योंकि डूबे हुए युवकों के मिट्टी में फंसने की आशंका है।

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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश जारी, विलाप करती महिलाएं - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जाल तब डाला जाता है, जब कोई बहता हुआ आ जाए। इसलिए जवान रस्सी का प्रयोग कर रहे हैं। स्कूबा डाइवर की 4 टीम के अलावा अलग से एक-एक जवान 20 से 25 फीट की दूरी पर अलग-अलग तरह से रस्सी पकड़कर तलाशने में लगे हुए थे।
 
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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश जारी, विलाप करती महिलाएं - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिकंदरा से बुलाए निजी गोताखोर
स्थानीय लोगों ने सिकंदरा से निजी गोताखोरों को भी बुलाया था। इन गोताखोरों को यमुना नदी में लोगों को तलाशने का अनुभव था। नगला नाथू, सिकंदरा के गुड्डू ने बताया कि उसके साथ पूरन, महेंद्र, सनी, मुन्ना, प्रीतम सिंह, श्रीभगवान, रवि आदि आए हैं। इन सभी ने कई बार लोगों को बचाया है तो शवों को निकाला है। पुलिस प्रशासन के सहयोग के लिए वो आए थे जिससे डूबे हुए लोगों को निकाला जा सके। हाल ही में उन्होंने रुनकता में डूबी किशोरियों को निकालने में मदद की थी।
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