ताजमहल पर शनिवार और रविवार को पर्यटकों को दोपहर बाद टिकट नहीं मिल पा रहा। पांच हजार सैलानियों को प्रवेश की अनुमति के बाद भी केवल 4500 पर्यटक ही ताज में प्रवेश कर रहे हैं, यानी 500 टिकट की बुकिंग पहले कर ली गई, लेकिन उनसे प्रवेश नहीं किया जा सका। ताज देखे बिना सैलानी वापस लौट रहे हैं। इससे न केवल आगरा, बल्कि देश के स्मारकों की व्यवस्था की बदनामी हो रही है। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस तरह से नाइट व्यू के लिए ताजमहल का टिकट दिया जाता है, उसी तरह पहचान पत्र पर टिकटों की संख्या सीमित कर देनी चाहिए।
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ताजमहल पर ऑनलाइन टिकट के लिए क्यूआर कोड स्कैन करते सैलानी
- फोटो : अमर उजाला
हर टिकट बुकिंग पर आधार कार्ड नंबर या अन्य कोई पहचान पत्र का नंबर देना अनिवार्य कर दिया जाए तो लपकों द्वारा ताज की टिकटों की कालाबाजारी रुक सकती है, वहीं गाइड एसोसिएशन और पर्यटन संगठनों से शनिवार रविवार को पर्यटकों की संख्या 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार करने की मांग उठाई है।
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ताजमहल पर सेल्फी लेतीं युवतियां
- फोटो : अमर उजाला
जिस तरह से ताजमहल के नाइटव्यू में पहचान पत्र का नंबर और कॉपी लगती है, वैसे ही एक पहचान पत्र पर पांच से ज्यादा टिकट न दिए जाएं। पर्यटक आगरा आकर बिना ताज देखे लौट रहे हैं, यह पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा झटका है। शमशुद्दीन अध्यक्ष, गाइड एसोसिएशन
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ताजमहल पर युवतियां
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई को शनिवार और रविवार को टिकटों की संख्या बढ़ाकर 10 हजार कर देनी चाहिए। दो स्लॉट में पांच पांच हजार पर्यटकों को अनुमति दी जानी चाहिए। जब पर्यटक आ रहे हैं तो उन्हें टिकट तो मिलना ही चाहिए। काउंटर भी शुरू किया जा सकता है। संजीव जैन उपाध्यक्ष, होटल एसोसिएशन
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ताजमहल पर आए सैलानी
- फोटो : अमर उजाला
एक तरफ सिनेमा हॉल, मॉल आदि खोले गए हैं तो ताज में पर्यटकों की संख्या बढ़ा देनी चाहिए। बाजारों में छोटी दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा, पर ताज में एक बार में 5 हजार पर्यटक आ सकते हैं। वीक एंड पर 10 हजार पर्यटकों की अनुमति होनी चाहिए। राजीव सक्सेना, उपाध्यक्ष, टूरिज्म गिल्ड
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ताजमहल
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टिकटों की संख्या बढ़ाना संस्कृति मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में है। हमने टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए पुलिस से सहयोग मांगा है। पार्किंग में चल रहे टिकटों के खेल की एक माह पहले ही शिकायत दर्ज कराई थी। वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद