शरद पूर्णिमा के साथ ही ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के खानपान और रहन सहन में भी बदलाव आ गया। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा से सर्दी का आगमन भी हो जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ठाकुरजी की सेवा में भी बदलाव हो गया है। गुरुवार को पड़वा से ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज के मंदिर में भोग सेवा में मौसम के अनुरूप परिवर्तन हो गया है। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी को अब हल्की रेशमी पोशाकों के स्थान पर वेलवेट, सनील, ऊनी कपड़े की पोशाकें धारण कराई गईं हैं। ठाकुरजी को सर्दी न लगे, इसके लिए रजत जड़ित शयन शैया पर पशमीने की चादर, शेमल की रुई वाली रजाई, तकिये बिछाए जाते हैं और चांदी की सिगड़ी में अग्नि सुलगाकर गर्भगृह को गर्म रखा जाता है।