स्वाधीनता सेनानी रानी सरोज गौरिहार के राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार में लापरवाही के बाद सोमवार को जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने तहसीलदार सदर रजनीश वाजपेयी को हटा दिया है। तहसीलदार को पूर्ण राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन दिवंगत सेनानी के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं मिला। हालांकि डीएम के आदेश में लिखा है कि तहसीलदार का स्थानांतरण प्रशासनिक हित में किया है।
आगरा की आखिरी स्वतंत्रता सेनानी रानी सरौज गौरिहार रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गई। पूर्ण राजकीय सम्मान से उनका अंतिम संस्कार होना था। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगा से ढका गया, लेकिन बंदूकों से सलामी नहीं दी गई। ताजगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह पर भी उनके पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं मिला। इस दौरान मौजूद डीएम प्रभु एन सिंह को अत्येष्टि में शामिल हुए भाजपा विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, साहित्यकार व समाजसेवियों ने अवगत कराया था।
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स्वतंत्रता सेनानी का पार्थिव शरीर ले जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
जब तक जिलाधिकारी को इस बात की खबर लगी, तब तक मुखाग्नि दी जा चुकी थी, जिसके बाद डीएम ने पुलिस अधिकारियों से वार्ता की और गारद बुलवाकर विद्युत शवदाह भट्टी के सामने गार्ड ऑफ ऑनर की रस्म अदा कराई।
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डीएम से बात करते भाजपा विधायक
- फोटो : अमर उजाला
पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं मिलने पर कई लोगों ने आपत्ति जताते हुए इसे लापरवाही बताया था। पूर्ण राजकीय सम्मान की व्यवस्थाएं तहसीलदार रजनीश वाजपेयी को करनी थीं। वह दिवंगत सेनानी के घर से लेकर शवदाह गृह तक मौजूद रहे थे।
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अंतिम संस्कार के दौरान दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
- फोटो : अमर उजाला
एक दिन बाद सोमवार को डीएम प्रभु एन सिंह ने तहसीलदार को सदर तहसील से हटा दिया है। उन्हें किरावली भेजा गया है। उनकी जगह फतेहाबाद से तहसीलदार न्यायिक आशीष त्रिपाठी को सदर में तहसीलदार पद पर भेजा है।
किरावली के तहसीलदार नीरज शर्मा को किरावली में ही तहसीलदार न्यायिक पद पर तैनात किया है। हालांकि डीएम के आदेश में स्थानांतरण की वजह प्रशासनिक कार्यहित बताया है। संबंधित अधिकारियों को तत्काल अपना कार्यभार हस्तांरित करने व नई तैनाती स्थल की योगदान आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।