कोख के सौदागर गैंग की सिलीगुड़ी से पकड़ी गई एजेंट नर्स कल्पना ने एक साल में छह बच्चों को अस्मिता को सौंपने की बात पुलिस की पूछताछ में कबूल की है। इनमें चार बच्चे दो महिलाओं का प्रसव कराने पर पैदा हुए थे, दो बच्चों को एजेंट राहुल लेकर गया था। कल्पना को दस से 20 हजार रुपये कमीशन मिलता था। अस्मिता ही इन बच्चों को अपने एजेंट के साथ आकर ले गई थी। आगरा लाने के बाद पुलिस ने सोमवार को आरोपी कल्पना, उसके पति सूरज और राहुल को कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।
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आरोपी नवजात बच्चों के सौदागरों को जेल भेजती पुलिस (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि विगत 19 जून 2020 को फतेहाबाद में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पुलिस ने फरीदाबाद की नीलम सहित पांच लोगों को पकड़ा था। उनके पास से तीन बच्चियां मिली थीं, जिन्हें नेपाल बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। नीलम से पूछताछ में खुलासा हुआ था कि नेपाल की अस्मिता सेरोगेसी कराती है। बच्चों और महिलाओं को नीलम के एजेंट लेकर नेपाल बार्डर तक जाते हैं।
बच्चों को अस्मिता और उसके एजेंट लेकर चले जाते हैं। पुलिस ने पिछले दिनों एक अन्य एजेंट आनंद राहुल सारस्वत को भी गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ में गैंग के मास्टरमाइंड डा. विष्णुकांत का नाम सामने आया था। राहुल को रिमांड पर लेकर सिलीगड़ी से नर्स कल्पना और उसके पति सूरज को गिरफ्तार किया गया। दोनों को आगरा लेकर आया गया।
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पुलिस गिरफ्त में अस्मिता के एजेंट और नेपाल की अस्मिता
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्राधिकारी फतेहाबाद विकास जायसवाल ने बताया कि नर्स कल्पना और सूरज से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि तीन साल से अस्मिता और नीलम के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि छह बच्चों को ही अस्मिता के हवाले करने की बात बताई है। मई 2019 में दो महिलाओं को नीलम लेकर आई थी। इस पर कल्पना ने दोनों की डिलीवरी कराई थी। दोनों महिलाओं ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था।
इन बच्चों को लेने के लिए अस्मिता अपने एजेंट के साथ आई थी। वह बच्चों को लेकर चली गई। उन्हें कितना कमीशन दिया? इसकी जानकारी नहीं दी है। नर्स होने की वजह से अस्पताल में कल्पना की ओर से लाई गईं महिलाओं को भर्ती कर लिया गया। इसी तरह जून में नीलम और अस्मिता का फोन आने पर राहुल के माध्यम से दो बच्चों को अस्मिता के एजेंट के हवाले किया था। इसके लिए 1.10 लाख रुपये मिले थे। इनमें से कल्पना ने 20 हजार रुपये ही लिए थे। बाकी रकम राहुल के साथ आईं रूबी, मीना और चालक को दे दिए थे। उन्होंने अपनी रकम आपस में बांट ली थी।
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स्थानीय सरगना नीलम
- फोटो : अमर उजाला
नर्स कल्पना ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह कभी नेपाल की अस्मिता से नहीं मिली है। अस्मिता से संपर्क फोन पर एक एजेंट के माध्यम से हुआ था। इसके बाद नीलम से बात होने लगी। दोनों ने एक साल पहले दो महिलाओं को भेजने के लिए कॉल किया था। तब उन्होंने तैयारी की थी। इसी तरह एक महीने पहले दो बच्चों को भेजा, तब नीलम ने कॉल किया था।
बच्चों को लेने के लिए अस्मिता खुल नेपाल से आती थी। कल्पना ने पुलिस को बताया कि पिछले माह वह बच्चे देने बॉर्डर पर गई थी। अस्मिता के एजेंट कार से बाहर आए थे, लेकिन अस्मिता ने बाहर आकर बात नहीं की। वह अंदर ही बैठी रही। बच्चों को लेने के बाद एजेंट ने कल्पना को रकम पकड़ा दी थी। इस कारण कल्पना अस्मिता का चेहरा भी नहीं देख सकी। वह कहां की रहने वाली है? इसकी भी जानकारी नहीं है। अब पुलिस कल्पना के मोबाइल की कॉल डिटेल भी निकलवाएगी।
सीओ फतेहाबाद विकास जायसवाल ने बताया कि कल्पना एक अस्पताल में नर्स है, जबकि उसका पति सूरज एक पर्दे की दुकान पर नौकरी करता है। दोनों को ही ज्यादा पैसा नहीं मिलता है। इसलिए कोख के सौदागर गैंग से जुड़ गए। सूरज को भी पत्नी के अस्मिता से संबंध की जानकारी है।