कमरे से बाहर निकली वृद्धा
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कंकाल सा नजर आ रहा शरीर
छह माह तक बेटों द्वारा दिए जा रहे कष्ट को सहते सहते वृद्धा निढाल हो चुकी थी। ग्राम प्रधान जब अंधेरी कोठरी में दाखिल हुए तो दुर्गंध की वजह से मुंह ढकना पड़ा। वृद्धा सोमवती को जब बाहर लेकर आए तो तेज धूप के कारण काफी देर तक उसकी आंखें नहीं खुलीं। आंखें खोली तो अंजान लोगों को सामने देख दर्द छलक पड़ा। वृद्धा ने कहा कि उसे इस कैद से बाहर निकालो। छह माह तक सूखी रोटी खाने की वजह से उसका शरीर कंकाल बन चुका था। उस पर ठीक ढंग से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था।