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देख तेरे मथुरा की हालत क्या हो गई भगवान, गाय हैं भूखी, यमुना दूषित, दहशत में इंसान

Tue, 20 Aug 2019 12:04 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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- फोटो : अमर उजाला
अब कहां वो कान्हा वाली मथुरा रह गई। न तो गायों का पेट भर पा रहा है और न ही उनके गोचारण के लिए कोई जंगल बचा है। गोपालों के चेहरे की रौनक गायब है। मोक्षदायिनी यमुना मैया का जल आज आचमन काबिल भी नहीं रह गया है। जहां भगवान ने अपने साथी बाल गोपालों के साथ मिलकर ब्रज के रज में लीलाएं की थीं, उनका स्वरूप भी बहुत बदल गया है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पढ़िए कान्हा की नगरी पर अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट...
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गोशाला में गोवंश - फोटो : अमर उजाला
कृष्ण ने ब्रज में तमाम लीलाएं की हैं। यमुना किनारे ग्वालों के साथ गायें चराईं हैं। कहा जाता है कि कान्हा को गाय से बहुत प्रेम था। लेकिन आज गायों का पेट तक नहीं भर पा रहा है। मथुरा में पंजीकृत गोशालाओं की संख्या 99 है। जबकि गोवंश की संख्या 3 लाख से अधिक है। इन गायों के चारे की भी व्यवस्था नहीं हो पा रही है। सरकार एक गाय के लिए 30 रुपये प्रतिदिन चारे का पैसा दे रही है। लेकिन इतने पैसे में भला गाय का पेट कैसे भर सकता है। ऐसे में गाय भूख और प्यास से मर रही हैं। एक साल के भीतर ही 800 से अधिक गाय मर गईं हैं।
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वृंदावन किनारे बहती यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
यमुना को साफ और स्वच्छ बनाने के प्रयास तो हो रहे हैं लेकिन आज भी शहर के 35 नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। इन नालों के जरिए शहर का गंदा पानी यमुना में पहुंच रहा है। यमुना में प्रदूषण का स्तर भी टॉप पर पहुंच गया है। इतना प्रदूषण है कि जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाने के कारण जलीय जीव मर रहे हैं। पानी आचमन काबिल भी नहीं रह गया है। कई दफा तो पानी का रंग भी काला हो जाता है। बरसात में तो सारे नाले सीधे यमुना जी में खोल दिए गए थे।

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गोवर्धन पर्वत
कभी पूरे ब्रज में गोचारण भूमि हुआ करती थी। जिले में 516 ग्राम पंचायतें हैं और हर ग्राम पंचायत पर बड़े रकबे में गोचारण भूमि हुआ करती थी। लेकिन आज 516 ग्राम पंचायतों में से मुश्किल से 100 में ही गोचारण भूमि रह गई होगी। कहीं मकान बना लिए गए हैं तो कहीं खेती हो रही है। ऐसे में गायों को चरने के लिए भूमि नहीं बची है। यही वजह है कि भूखी गाय किसानों के खेत में घुस जाती है और फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं। हालांकि सरकार दावा कर रही है कि गोचारण के लिए भूमि खरीदी जाएगी।
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मथुरा जिले में हर रोज होती हैं अपराधिक घटनाएं - फोटो : अमर उजाला
आज हर तरफ दहशत का माहौल है। कब किसके साथ कहां वारदात हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। पिछले तीन महीनों के भीतर ही 250 से ज्यादा चोरी की वारदातें हो गईं। 50 लूट हो गईं जबकि 16 कत्ल हो गए हैं। यह तो वह आंकड़े हैं जो पुलिस के रिकार्ड में दर्ज हैं। वरना इससे अधिक घटनाएं तो पुलिस रिकार्ड का हिस्सा तक नहीं बन रहीं। महिलाओं के साथ होने वाली वारदातों ने खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। महिलाओं को कत्ल करके सड़कों पर फेंका जा रहा है। हर दूसरे दिन नहर में महिलाओं के शव मिल जाते हैं।
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