रामलाल वृद्ध आश्रम में रहते हुए चार बुजुर्गों को दस साल पूरे हो चुके हैं। इन बुजुर्गों को यह उम्मीद है कि उनका बेटा एक दिन आएगा। किसी की आंखें आश्रम के मुख्य द्वार को देखते-देखते पथरा गई हैं, तो कोई आज भी अपने बेटे की बचपन की शरारतें याद कर रोने लगता है। अगली स्लाइड में पढ़िये इन बुजुर्गों की कहानी...
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मूलचंद
- फोटो : अमर उजाला
मेरे जन्मदिन पर बेटा लेने आएगा: मूलचंद
केदार नगर के रहने वाले 62 वर्ष के मूलचंद का कहना है कि आश्रम में दस साल कब निकल गए, पता ही नहीं चला। हर बार मुझे लगता है कि इस बार मेरे जन्मदिन पर बेटा लेने आएगा। पिछले दस साल से मेरा यह भ्रम टूट रहा है।
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हेतराम
- फोटो : अमर उजाला
बेटे की पुरानी बातें आती हैं याद: हेतराम
रामबाग, सीता नगर के निवासी 78 वर्ष के हेतराम गोयल की आंखें बेटे की राह देखते-देखते पथरा गई हैं। दस साल बेटा आश्रम छोड़ गया था। हेतराम कहते हैं कि कई बार बेटे की पुरानी बातें याद आती हैं। फिर सोचता हूं कि मेरी किस्मत में शायद यही था।
बेटे को लेकर टूट गया भ्रम: मदनलाल
पथवारी के रहने वाले 85 वर्ष के मदनलाल वर्मा को इस बात का अफसोस है कि दस साल में बेटे को उनकी एक भी बार याद नहीं आई। जब मैं आश्रम आया था, तब मुझे लगा कि मेरा बेटा ज्यादा दिन मेरे बिना रह नहीं सकेगा। लेकिन वह आज तक देखने नहीं आया।
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पं. रम्मो गुरु
- फोटो : अमर उजाला
बेटे से दूर रहने की पीड़ा: पं. रम्मो गुरु
शाहगंज के रहने वाले 76 वर्ष के पं. रम्मो गुरु को अभी भी इस बात की आस है कि उनके बेटे को एक दिन अपनी गलती का अहसास होगा। आश्रम में दस साल पूरे कर चुके रम्मो गुरु का मानना है अपने बेटे से दूर रहने की पीड़ा काफी दर्द देती है।
इस बार लिया है जन्मदिन मनाने का फैसला
हमारी कोशिश रहती है की आश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों को परिवार जैसा माहौल दिया जाए। ये कहना है रामलाल वृद्ध आश्रम के उपाध्यक्ष विनय शर्मा का। विनय का कहना है कि यहां दस साल पूरे कर चुके बुजुर्ग आज भी कई बार घर की याद करते रो जाते हैं। उस समय माहौल काफी भावुक हो जाता है। हम आंसू पोंछने का काम करते हैं। इस बार से आश्रम में सभी बुजुर्गों का जन्मदिन मनाने का फैसला लिया गया है। विनय का कहना है कि अभी भी कई बुजुर्गों को यह उम्मीद है कि उनके परिजन उन्हें यहां से आकर ले जाएंगे।