495 साल पहले पानीपत के पहले युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराने के बाद मुगल बादशाह बाबर 10 मई, 1526 को आगरा पहुंचा तो गर्मी से बेहाल हो गया। यमुना किनारे जहां अब जवाहर पुल है, उसके नजदीक अपनी आरामगाह बनवाई। इस आरामगाह में ऐसे इंतजाम किए गए कि भीषण गर्मी में भी यहां ठंडक से फुरफुरी दौड़ने लगे। दो मंजिला बारादरी के साथ आरामगाह को नाम दिया गया हिश्त-बहिश्त। समरकंद की चारबाग शैली पर बने भारत के इस पहले बाग को आरामबाग कहा जाने लगा। बाद में आगरा पर मराठों का शासन हुआ तो उन्होंने नाम बदलकर रामबाग कर दिया। तब से यही नाम चला आ रहा है। अगली स्लाइड्स में पढ़िए ऐतिहासिक रामबाग के बारे में रोचक तथ्य....
अपनी पुस्तक में इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे लिखते हैं कि हिश्त-बहिश्त बाग में बाबर ने जल प्रपात, नहरें, बड़ा कुंआ, हम्माम बनवाए और कनेर, अनार, चंदन के पौधे लगवाए। ग्वालियर से कनेर की पौध मंगवाई गई। हिश्त-बहिश्त के पास ही उसने जौहरा बाग बनवाया था। इसके बाद बेटी के नाम पर अचानक बाग बनवाया था।
विज्ञापन
3 of 5
ताजमहल पूर्वी गेट पर दशहरा घाट से सटी हवेली
यमुना किनारे 48 बाग व हवेलियां बनवाईं
राजकिशोर राजे के मुताबिक बाबर ने यमुना किनारे हवेलियों और बाग की शुरुआत की। रामबाग से नदी किनारे दोनों तरफ मुगलों ने हवेलियां बनवाना शुरू कर दिया। बाबर के बाद अकबर, जहांगीर, शाहजहां के काल में यमुना किनारे कुल 48 बाग और हवेलियां बनीं।
4 of 5
रामबाग स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
रामबाग की ठंडक और समरकंद की तरह के बाग के कारण ब्रिटिश काल में अंग्रेजों ने इसे हनीमून के लिए उपयोग करना शुरू कर दिया। अंग्रेज अफसर छुट्टी मनाने के लिए रामबाग आते। तब इसकी बुकिंग के लिए इंतजार करना पड़ता था और 15 दिनों से ज्यादा किसी को बुकिंग मिलना मुश्किल था। मूल ढांचे के ऊपर अंग्रेजों ने कमरे बनवाए थे जो बाद में गिर गए।
रामबाग एक संरक्षित स्मारक है। बाग के नाम पर सिर्फ कुछ पेड़ बचे हैं। इसके आसपास घनी आबादी है। इस पूरे इलाके को रामबाग के नाम से जाना जाता है। यह शहर का प्रमुख इलाका है।