देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले मैनपुरी के शहीद राम वकील का परिवार से किया वादा अधूरा रह गया। उन्होंने बेटों से फुटबॉल दिलाने और पत्नी से घर बनवाने का वादा किया था, लेकिन गुरुवार की रात जैसे ही उनकी शहादत की खबर आई परिवार में कोहराम मच गया। पूरा गांव गम में डूब गया। किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। शहीद राम वकील की पत्नी गीता का रो रोकर यही कहना था कि 'कोई मेरे पति को लौटा दे...। पिता का साया उठने पर मासूम बच्चों की आंखों से भी आंसू नहीं थम रहे थे।
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रोते बिलखते शहीद के परिजन
बरनाहल थाना क्षेत्र के गांव विनायकपुर निवासी सीआरपीएफ जवान राम वकील की शादी वर्ष 2003 में इटावा के गांव खेड़ा हेलू निवासी गीता देवी के साथ हुई थी। रामवकील के तीन पुत्र राहुल (12), शाहिल (10), गोलू (4) हैं। बच्चों को अच्छी तालीम दिलाने के लिए पत्नी इटावा के अशोकनगर मोहल्ले में किराए के मकान में रह रही हैं।
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रोते बिलखते शहीद के परिजन
राम वकील के शहीद होने की जानकारी इटावा में रह रहीं उनकी पत्नी गीता देवी को नहीं दी गई। शुक्रवार की सुबह गांव से परिजन इटावा के लिए रवाना हुए और आवश्यक काम से गांव चलने की बात कहकर पत्नी और बच्चों को विनायकपुर ले आए। यहां का दृश्य देखकर गीता देवी सबकुछ समझ गईं और रोते रोते बेसुध हो गईं।
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शहीद के बच्चे
बिलखते हुए पत्नी गीता देवी ने बताया कि जाते हुए उन्होंने कहा था कि अगली बार जब छुट्टी पर आएंगे तो बेटों के लिए फुटबॉल लाएंगे। यह भी कहा था कि दो महीने बाद वो रिटायरमेंट लेकर अपना घर बनवाएंगे। उन्हें क्या मालूम था कि वो अब घर नहीं लौटेंगे। चार वर्षीय बेटा गोलू पिता की शहादत से अनजान है। घर के प्रत्येक सदस्य को रोते देख वो भी फफक पड़ता और फिर गुमसुम हो जाता है।
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रोते बिलखते परिजन
शहीद की पत्नी व अन्य परिजन दहाड़ मार मारकर रो रहे थे। ग्रामीण महिलाओं ने शहीद की पत्नी और बहन को संभालने की कोशिश की, लेकिन वो भी अपने आंसू नहीं रोक सकी। दिनभर गांव में परिजनों, रिश्तेदारों की चीख गूंजती रही। शहीद की पत्नी का रो रोकर यही कहना था कि 'कोई मेरा पति लौटा दे'। गीता ने रोते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों की शहादत का बदला लें।
शहीद के बड़े भाई रामनरेश दिवाकर ने बताया कि वर्ष 1999 में राम वकील की सीआरपीएफ की 176 बटालियन गोल्फ कंपनी में तैनाती हुई थी। कुछ दिन पहले ही वो 10 दिन की छुट्टी पर आए थे और 11 फरवरी को यहां से गए थे। वीर बहादुर राम वकील की शहादत पर पूरा विनायकपुर गमजदा है। शहीद के परिजनों को सांत्वना देने के लिए लोग घर पर पहुंचे। इस दौरान शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।