आगरा के बोदला जमीन कांड की विवेचना सीबीसीआईडी ने शुरू कर दी है। बृहस्पतिवार को एडीजी एंटनी देव कुमार ने जमीन का निरीक्षण किया। जेल में बंद केयरटेकर रवि कुशवाहा की पत्नी और बहन से पूछताछ की। उनसे कई सवाल किए। पुलिस ने परिवार के 5 लोगों को गांजा और शराब बरामद कर जेल भेजा था। फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए थे। बरामदगी की फर्द में शामिल पुलिसवालों की गर्दन अब विवेचना में फंस सकती है। जनवरी में बोदला में 10 हजार वर्गगज जमीन पर कब्जे का मामला सामने आया था। दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर केयरटेकर बने रवि कुशवाहा के परिवार को जेल भेजा गया था। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया था। तत्कालीन एसओ जितेंद्र कुमार सहित अन्य को जेल भेजा गया। मामले में एसआईटी ने विवेचना कर चार्जशीट लगाई। मगर, शासन स्तर से विवेचना सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दी गई। मामले में विवेचक अनिल प्रताप बनाए गए हैं।
एडीजी, सीबीसीआईडी एंटनी देव कुमार दोपहर 2:45 बजे विवादित जमीन पर पहुंचे। उन्होंने जमीन पर भवन को देखा। इसके बाद रवि कुशवाहा के परिवार की महिलाओं से बात की। पत्नी और बहन ने बताया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। वह 40 साल से इस जमीन पर निवासित हैं। पुलिस ने गांजा-शराब बरामदगी कर पूरे परिवार को जेल भेज दिया। पहले गांजा बरामद कर पति को पकड़ा गया। बाद में उन्हें शराब बरामद कर जेल भेज दिया। 3 साल के बेटे को भी उनके साथ सजा भुगतनी पड़ी। दोबारा आवाज उठाई तो पुलिस ने फिर से पति और जेठ को जेल में भेज दिया। एडीजी ने मौके पर मौजूद एसीपी लोहामंडी मयंक तिवारी और इंस्पेक्टर आनंद वीर सिंह से सवाल किए। उन्होंने जमीन मामले के विवेचक से पुख्ता साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए।
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बोदला जमीन प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
ये किए सवाल
- जमीन का असली मालिक टहल सिंह कैसे बताए गए?
- जमीन पर 40 साल पहले एक फैक्ट्री चलने का दावा किया गया। इसका क्या सुबूत मिला।
- कुल्फी की ठेल कौन लगाता था।
- दीवार कब बनवाई गई थी।
- रवि कुशवाहा का परिवार कब रहने आया था।
- गांजा कैसे और किसने बरामद किया।
- शराब कहां पर मिली थी। कौन पुलिसकर्मी और आबकारी के अधिकारी शामिल थे।
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लंबित विवेचनाएं निस्तारित की जाएं
एडीजी ने पुलिस लाइन में बैठक की। इसमें आगरा और मेरठ सेक्टर के अधिकारी शामिल रहे। उन्होंने लंबित विवेचनाओं के शीघ्र निस्तारण के लिए निर्देश दिए।
बरामदगी करने वाले क्यों नहीं बने आरोपी
पुलिस ने केस में चार्जशीट लगाई थी। तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार को आपराधिक साजिश का आरोपी बनाया। 15 को आरोपी बनाने के बाद भी यह नहीं पता किया गया कि फर्जी मुकदमे दर्ज करने के लिए गांजा और शराब कहां से आई। फर्द में एसओ शामिल नहीं था। जिन पुलिसकर्मियों और आबकारी विभाग के कर्मियों ने बरामदगी की? उनको आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। इस सवाल का जवाब आज तक नहीं मिल सका है। सूत्रों की मानें तो सीबीसीआईडी की विवेचना में गांजा और शराब बरामद करने वाली टीमें भी फंसेंगी।
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बच निकला था बिल्डर
मामले की शिकायत डीजीपी से हुई थी। पहले अगस्त 2023 में पुलिस ने दबिश देकर गांजा बरामद दिखाया था। मुकदमा दर्ज कर केयरटेकर रवि कुशवाहा, उसके भाई शंकरिया, ओमप्रकाश को जेल भेजा। अक्तूबर में फिर से जमीन पर रहने वाले रवि के घर में दबिश दी। इस बार पत्नी पूनम, बहन पुष्ष्पा को जेल भेजा था। उनसे शराब बरामद दिखाई थी। जेल से बाहर आने पर पीड़ित डीजीपी से मिले थे। मामले की गूंज लखनऊ तक हुई थी। इस पर कथित मालकिन उमा देवी की तहरीर पर डकैती का मुकदमा लिखा गया। इसमें एसओ जेल गया, जबकि बिल्डर कमल चौधरी और उसका बेटा धीरू चौधरी बच निकला।
कथित मालकिन भी फंस गई
बाद में कथित मालकिन उमा देवी भी फर्जी निकली थी। वह वारिस नहीं थी। बाद में टहल सिंह सामने आए थे। उन्हें पहले मृत दर्शाया गया था। इस पर मामले में रवि कुशवाहा, शंकरिया, मोहित उर्फ किशन कुमार, राजू, धर्मेंद्र को जेल भेजा गया। वह जेल में बंद हैं। मामले में एसआईटी ने कमल चौधरी, आर्यन उर्फ धीरू चौधरी, पुरुषोत्तम पहलवान, भूपेंद्र पहलवान, किशोर बघेल, अमित अग्रवाल, नेम कुमार जैन के खिलाफ डकैती और कब्जे के मामले में आरोपी बनाते हुए चार्जशीट लगाई थी।