कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में पुलिसकर्मी ड्यूटी के साथ इंसानियत का फर्ज भी निभा रहे हैं। मथुरा जिले के वृंदावन में पुलिस ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। यहां पिता की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार करने में असमर्थ दिव्यांग बेटी की मदद के लिए पुलिसकर्मी फरिश्ते बनकर आए। उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कराया।
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सिपाही नितिन मलिक
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन में 28 अप्रैल को 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। मृतक के परिवार में इकलौती 17 वर्षीय दिव्यांग बेटी के सिवाय कोई नहीं है। लॉकडाउन में पिता की मौत के बाद दिव्यांग बेटी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वो शव के पास रो रही थी। इस बीच किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी।
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पुलिस ने कराया मृतक का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
सूचना मिलने के बाद पीआरवी पर तैनात सिपाही नितिन मलिक और होमगार्ड रोहिताश मौके पर पहुंचे। सिपाही नितिन ने बताया कि जब वो वहां पहुचे तो देखा कि मृतक की दिव्यांग बेटी शव के पास लेटी थी और रो रही थी। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण पिता का दाह संस्कार करने में समर्थ थी।
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पुलिस ने कराया मृतक का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
यह देखकर नितिन और रोहिताश का दिल पसीज गया। वे दोनों दुकान खुलवा कर अंतिम संस्कार का सामान खरीद कर लाए। उन्होंने कुछ लोगों की मदद से सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए यमुना घाट पर दिव्यांग बेटी के पिता का अंतिम संस्कार कराया।
पुलिस के इस नेक काम की लोग सराहना कर रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ गौरव ग्रोवर ने प्रशस्ति पत्र देकर सिपाही नितिन और होमगार्ड रोहिताश को सम्मानित किया है।