उत्तर प्रदेश में भीख मांगने वाली हथिनी के रूप में लगभग 50 वर्ष बिताने के बाद 'फूलकली' ने स्वतंत्रता की दसवीं वर्षगांठ मनाई। वर्षों के दुर्व्यवहार और अपर्याप्त देखभाल ने उसे कई चिकित्सकीय परेशानियां जैसे कि फोड़े, संक्रमित घाव और कटे-फटे पैरों के तलवों के साथ छोड़ दिया था। दस साल पहले, वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने फूलकली को रेस्क्यू किया था, जिसके बाद उसे हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र, मथुरा में सुरक्षित जीवन जीने का एक नया अवसर मिला। 2012 में रेस्क्यू से पहले, फूलकली उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की सड़कों पर घूमने, भीख मांगने में अपना पूरा दिन बिताती थी। वर्षों के दुर्व्यवहार और उपेक्षा ने उसे कटे नाखून, दर्दनाक रूप से क्षतिग्रस्त फुटपैड और गंभीर बीमारियों के साथ छोड़ दिया था, जिसकी वजह से उसे ना केवल शारीरिक बल्कि मनोवैज्ञानिक आघात भी पंहुचा था।